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मुम्बई। 24 अक्टूबर। पवित्र भूमि मिथिलाक पावन संस्कृति के संगीतक माध्यम सँ प्रस्तुत करैत एवं मैथिली गीत-संगीतक भव्य मनोहारी वातावरण मे सांस्कृतिक कार्यक्रमक मध्य "मैथिल समन्वय समिति" केर तत्वावधान मे भारतवर्ष मे प्रथम बेर आयोजित  "वर-वधू परिचय सम्मेलन - 2016" ऐतिहासिक स्मृति कें जीवंत बनाय जगजियार भS गेल ।

विगत् 23 अक्टूबर, 2016 यथा रविदिन मुंबईक ठाणे उपनगर अवस्थित वाग्ले इस्टेट, ओहि ऐतिहासिक अवसरक साक्षी बनल जखन एहि प्रकारक आयोजन "वर-वधू सम्मेलन" केर रूप-स्वरूप मे पहिल बेर "मैथिल समन्वय समिति" द्वारा मुंबईक समस्त मैथिलीसेवी संस्था एवं मैथिल समाजसेवी लोकनिक सहयोग एवं उपस्थिति मे  आयोजित भेल ।

कार्यक्रमक शुभारम्भ ओम्कार, शंखध्वनि एवं मंगलाचरण केर भक्तिमय वातावरण मे मैथिली ठाकुर द्वारा प्रस्तुत भगवती वंदना "जय जय भैरवि असुर भयाउनि ...... सँ एवं मुख्य अतिथि श्री अनादिनाथ झा केर कर कमल द्वारा दीप प्रज्वलन सँ शुभारम्भ भेल । मैथिली ठाकुर द्वारा प्रस्तुत भगवती वंदना "जय जय भैरवि...."क विलक्षण गायन सँ प्रेक्षागृह मे जमल जनसमूह कें प्रारंभहिं सँ बांधि लेलक । तदनुपरांत अन्य गायक कलाकार श्री विकास झाजी, गायिका श्रुति झा समेत अन्य कलाकार अपन प्रस्तुति सँ प्रेक्षागृहक आंतरिक आवरण मे मिथिलाक संस्कृति के स्थापित करैत मिथिलामय बना देने छलाह । हास्य जीवन मे नैराश्य बोध के समाप्त करैत नव उत्साह व उमंग कें सृजित करैत अछि । अद्भूतानन्द जीक उपस्थिति एवं हुनक प्रस्तुति जमल जनसमूह मैथिल समाज के अपना स्थान सँ टस सँ मस नञि होमय देलखिन । मंच संचालनक लेल भाई किसलय कृष्णा एवं जाह्नवी झा सेहो पूर्ण भाव-भंगिमा मे उमंगित छलाह । मैथिल समाजक हृदय मे रमन केनिहार, मैथिली अकादमीक पूर्व अध्यक्ष व सुप्रसिद्ध मंच संचालक परमादरणीय श्री कमलाकान्त झा जीक विनोदपूर्ण परन्तु ज्ञानबर्द्धक प्रसाद सेहो प्राप्त भेलनि उपस्थित समाज के जकरा बिसरल नञि जा सकैत अछि ।

विदित हो जे मिथिलाक सांस्कृतिक विशिष्टताक पारम्परिक वैवाहिक स्थलीक रूप मे तथा वधू व वर के
दाम्पत्य जीवनक पवित्र बंधन मे आबद्ध करेबाक स्थलीक रूप मे "सौराठ-सभा" विश्व भरि मे प्रसिद्ध अछि । परन्तु बदलैत एवं परिवर्तनक समयावधि मे "सौराठ-सभा" केर स्वरूप मे संकुचनक स्थिति परिलक्षित भS रहल अछि । "मैथिल समन्वय समिति" प्राचीनकाल सँ चलैत आबि रहल मिथिलाक ऐतिहासिक वैवाहिक रीति-रिवाज व संस्कार सहित अनेको प्रकारक जटिलता के सुगम आओर सरल बनेबाक निमित्त "मैथिल वर-वधू परिचय सम्मेलन" आयोजित करैत प्रयास कयलक, जाहि के मैथिलजन हृदय सँ स्वीकार करैत स्वागत कयलनि अछि ।

विवाहयोग्य  मिथिलाक बेटी आओर बेटा कें एक मंच पर परिचयक हेतु प्रस्तुति वर्तमान समय व भविष्य मे सुयोग्या वधू एवं सुयोग्य वरक मध्य चयन प्रक्रिया के सरल बनाओत । "मैथिल समन्वय समिति" द्वारा आयोजित सम्मेलन मे मंच पर जाहि तरहें नवयुवती व नवयुवक स्वयं अपन जानकारी प्रस्तुत करैत सम्वाद प्रगट कयलनि वस्तुतः उत्साहबर्द्धक अछि । एहि अवसर पर भव्य स्मारिकाक विमोचन परमादरणीय बाबूजीक कर-कमल सँ भेल । स्मारिका मे मंचासीन संभावित वर-वधू समेत सैकड़ोंक संख्या मे प्रमाणिक संभावित परिचयक संकलन कें व्यवस्थित तरहें समायोजित कयल गेल अछि ।

कार्यक्रम मे मुंबईक अतिरिक्त अन्य क्षेत्र सँ गणमान्य पाहुन लोकनिक पदार्पण भेल, जाहि मे दिल्ली सँ आदरणीय श्री केशव झाजी समेत अन्य मैथिलप्रेमी लोकनिक सहभागिता आयोजन के विशिष्टता प्रदान कयलक ।

"वर-वधू परिचय सम्मेलन" केर संरक्षक मिथिला गौरव डॉ. संदीप झाजी अपन उद्बोधन मे विचार व्यक्त करैत वैवाहिक समस्याक वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करैत कहलनि जे वर्तमान मे मैथिल ललनाक विवाह, योग्य वरक चयन तथा बेहिसाब खर्च करबाक प्रथा सँ समाज मे तनाव एवं चिंताक वातावरण व्याप्त अछि । मनोनकुल विकल्पक अनुपलब्धता सँ बेमेल विवाह तथा बेशी उम्र मे विवाह समाजक लेल समस्या बनि चुकल अछि । एहि समस्या सँ निदान हेतु परिचय सम्मेलन केर माध्यमें व्याप्त जटिलता के सरल बनाओल जा सकैत छैक । "वर-वधू परिचय सम्मेलन" केर संयोजक श्रद्धेय श्री धीरज चन्द्र झाजी अपन वक्तव्य मे आयोजन विषयक सम्पूर्ण जानकारी के निर्गत कराबैत तथा "मैथिल समन्वय समिति"क गठन करबाक औचित्यक आवश्यकता पर विस्तृत जानकारीक व्याख्या करैत जनतब देलन्हि जे एहि प्रकारक आयोजन समाज मे वैवाहिक समस्याक समाधान हेतु बेहतर विकल्प केर रूप मे स्थायी निदान हेतु उठाओल गेल सशक्त डेग हयत । परमादरणीय बाबूजी अपन सम्बोधन मे समाजक कल्याणक निमित्त सेवा हेतु सतत् समर्पित रहबाक सुझाव "मैथिल समन्वय समिति" के दैत प्रसन्नता व्यक्त कयलनि ।

धन्यवाद ज्ञापित करैत आदरणीय श्री पंकज झाजी उपस्थित मैथिल समाज के एवं एहि कार्यक्रम के सुचारू रुपेण संचालित तथा सहयोग हेतु मिडियाक प्रति, ध्वनि संयोजक, कार्यक्रमक सुन्दर व्यवस्था हेतु स्थानीय प्रशासन समेत "मैथिल समन्वय समिति" केर कार्यकारिणी समितिक आदरणीय पदाधिकारी लोकनि यथा डॉ. संदीप झाजी, श्री धीरज चन्द्र झाजी, श्री जयमाधव झाजी, श्री प्रेम चन्द्र झा 'प्रेमजी', श्री अशोक सिन्हाजी, श्री विनय कान्त झाजी, श्री भगवान चौधरीजी, श्री राजकुमार झाजी, श्री पंकज झाजी, श्री अंगद चौधरीजी, श्री भारतेन्दु विमल झाजी, श्री रविन्द्र झाजी,श्री धनंजय झाजी, श्री कृष्णकुमार झा 'अन्वेषकजी', श्री ललित झाजी, श्री अरूण चौधरीजी, श्रीकुणाल ठाकुरजी, श्री दीपक झाजी, श्रीप्रमोद झाजी, श्री शिवानंद मिश्राजी एवं श्री पवन कुमार झाजी कें सहयोग हेतु धन्यवाद ज्ञापित कयलनि ।

कार्यक्रमक उपरांत स्वादिष्ट भोजनक उत्तम व्यवस्था छल । उपस्थित मैथिल सुधिवृन्द स्वादिष्ट भोजनक संग आओरो विलक्षण व बेहतरीन व्यवस्थाक भरपुर आनन्द लेलन्हि ।

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