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"अतीतक स्मृति"
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काल्हि हरिमोहन बाबू द्वारा लिखित पाँच पत्रक कड़ीमे दोसर पत्र प्रस्तुत कयने रहि । पढ़ल जाउ तेसर पत्र :
"हथुआ संस्कृत विद्यालय"
01.01.1939
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शुभाशीर्वाद ।
अहाँक चिट्ठी पाबि हम अथाह चिन्ता मे पड़ि गेलहुँ । एहिबेर धान नहि भेल तखन सालभरि कोना चलत । माएक श्राद्ध मे पाँच सए कर्ज भेल तकर सूदि दिन-दिन बढ़ले जा रहल अछि । दू मासमे बंगटक इमतिहान हएतनि । करीब पचासो टका फीस लगतनि । जँ कदाचित पास कऽ गेलाह तँ पुस्तकोमे पचास टका लागिए जएतनि । हम ताहि चिन्ता मे पड़ल छी । एहिठाम एकमासक अगाउ दरमाहा लऽ लेने छियैक । तथापि ऊपर सँ नब्बे टका हथपैंच भऽ गेल अछि । एहना हालतिमे हम 62 टका मालगुजारी हेतु कहाँसँ पठाउ ? जँ भऽ सकय तँ तमाकू बेचिकऽ पछिला बकाया अदाय कऽ देबैक । भोलबा जे खेत बटाइ कएने अछि, ताहिमे एहिबेर केहन रब्बी छैक ? कोठी मे एक्को मासक योगर चाउर नहि अछि । ताहिपर लिखैत छी जे ननकिरबी सासुर सँ दू मासक खातिर आबऽ चाहैत अछि । ई जानि हम किंकर्तव्यविमूढ़ भऽ गेल छी ।ओ चिल्काउर अछि । दू टा नेना छैक । सभकें डेबब अहाँक बुते पार लागत ? आब छोटकी बच्ची सेहो 10 वर्षक भेल । तकर कन्यादानक चिन्ता अछि । भरि-भरि राति इएहसभ सोचैत रहैत छी, परन्तु अपन साध्ये की ? देखा चाही भगवान कोन तरहें पार लगबै छथि ।
शुभाभिलाषी
देवकृष्ण
पुनश्च : जारनि निघटि गेल अछि तँ उतरबरिया हत्ताक सीसो पंगबा लेब । हम किछु दिनक हेतु गाम अबितहुँ किन्तु जखन महिसिए बिसुकि गेल अछि तखन आबिकऽ की करब ?
अहाँक
देवकृष्ण
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