गजल - मिथिला दैनिक

Breaking

रविवार, 24 जुलाई 2011

गजल


घिसियाइत सहसह करैत अधसर अबैए भगलो नै होइए
बात फुराइए घुरियाइए टनटनाइए मुदा बजलो नै होइए

जड़िआएल तहिआयल बात टोइआ दैत अछि दगधल मोनमे
बीझ काटि साफ केलक आ बिनु पढ़ने जाइए ओ रोकलो नै होइए

ककरा कहबै जे पतिआएत आइ ह्रिदै लगैए छै सीयल सभक
सभ बोल वचन उपरागो बिनु सुनेने जाइए सहलो नै होइए

घुरत नै देखेलक अपनैती अपन ओ घुमि रहल छी ऐ शून्यमे
अछि आँखिक झोँझक शून्य असगर हहराइए रहलो नै होइए

आफदी-आसमानी आएल अछि ऐमे के टोकत ठाढ़ होइले कहत
सभ मुँह सीयल शून्य-परिधि बढ़ैत देखाइए देखलो नै होइए

थितगर कौआठारि बनल छी ऐरावतक गत्र-गत्र सिहरै अछि
करजनी सन आँखि बिन बजने जे कहि जाइए सुनलो नै होइए