रुबाइ/ कता/ दर्द- ए-दिल मैथिली शायरी... - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 11 मई 2011

रुबाइ/ कता/ दर्द- ए-दिल मैथिली शायरी...

(१) हमर कहानी हमर खिस्सा छी अहाँ,
हमर साँस हमर दुनियाँ छी अहाँ,
अहाँ कें कोना हम बिसैर जाऊ,
हमर हरेक साँसक हिस्सा छी अहाँ!

(२) नोरक लिखाबट कें अहाँ पैढ़ नै सकब,
भिजल कागज पर अहाँ लिख नै सकब,
याद आयब हम अहाँ कें बहुत,
जखन बिसैर कs हमरा अहाँ पाइब नै सकब!

(३) प्रित अहाँक पहचान छी हमर,
स्नेह अहाँक शान छी हमर,
जुदा भs कें अहाँ सँ कोना हम जियब,
अहाँतें अंतिम साँस तक प्राण छी हमर!

(४)
किए ऐना बर्बाद करै छी,
नै हमरा सँ बात करै छी,
प्रित मे हमरा अहाँ,
नै हमरा अहाँ याद करै छी!

(५) खोजब अहाँ तें कियो मिल जेता,
मुदा हमरा जोका अहाँकें के सतेता,
मानलों कमी नै अछि अहाँकें संगतुरियाक,
मुदा "जितू" कें जगह कियो कोना लs लेता!