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समय

 
भोर , दुपहरिया आ सांझ
दिन बीत जायत अछि
जिनगी कर दिन देखैत - देखैत
लाली - लालीसँ लाल कनिया


लाल कनियाँ सँ
लाल दाइ बनी जायत अछि
रुकयत कहाँ अछि
समय भागल जायत अछि
टिक टिक चल पर


जखन समय नहीं रुकयत अछि
तन हम कीयक रुकी
आव आगा बढू
आ निर्माण करू
एक सभ्य सुसंस्कृत समाज के
 
 
- नवीन नवेंदु

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  1. neek kavita ,नवीन नवेंदु ji kavita jari rahay

    जखन समय नहीं रुकयत अछि
    तन हम कीयक रुकी
    आव आगा बढू
    आ निर्माण करू
    एक सभ्य सुसंस्कृत समाज के

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  2. sundar

    समय


    भोर , दुपहरिया आ सांझ
    दिन बीत जायत अछि
    जिनगी कर दिन देखैत - देखैत
    लाली - लालीसँ लाल कनिया



    लाल कनियाँ सँ
    लाल दाइ बनी जायत अछि
    रुकयत कहाँ अछि
    समय भागल जायत अछि
    टिक टिक चल पर



    जखन समय नहीं रुकयत अछि
    तन हम कीयक रुकी
    आव आगा बढू
    आ निर्माण करू
    एक सभ्य सुसंस्कृत समाज के

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  3. neek kavita, ehina nav-nav lekhkak prastuti aybak chahi

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