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आब एक धक्का फेरसँ मैथिलीक उच्चारण निर्देश आ ह्रस्व-दीर्घ विचारपर आउ।
जेना कहल गेल रहए जे अनुस्वार आ विसर्गयुक्त भेलासँ दीर्घ होएत तहिना आब कहल जा रहल अछि जे चन्द्रबिन्दु आ ह्रस्वक मेल ह्रस्व होएत।
माने चन्द्रबिन्दु+ह्रस्व स्वर= एक मात्रा

संयुक्ताक्षर: एतए मात्रा गानल जाएत एहि तरहेँ:-
क्ति= क् + त् + इ = ०+०+१= १
क्ती= क् + त् + ई = ०+०+२= २

आब आउ किछु आर शब्दपर:
जेना आएल, हएत, हैत
आब हैतकेँ हएत लिखब बेशी वैज्ञानिक अछि कारण हैतकेँ ह + ऐ + त पढ़ल जएबाक खतरा अछि (दोषपूर्ण)। आ ताहि रूपमे आएल क उच्चारण होएत
अ + ऐ + ल = १ + २ + १
तँ आएल = २ + १ + १ = ४

तहिना आओत क उच्चारण होएत
अ +औ + त= १ + २ + १
तँ आओत = २ + १ + १
हएबाक= १+२+२+१
होएबाक= २+१+२+१ (ओ क बाद ए क मान ह्रस्व)
हेबाक= २+२+१
नञि= १+१
नै= २
नहि=१+१
सएह= १+२+१ (ग्राह्य)
सैह= २+१ (दोषपूर्ण उच्चारण)
तखन निअम भेल: दीर्घक बाद वा क गणना १ मात्रा होएत।

आब पाँती वा पाँति खण्डक अन्तिम वर्णपर आउ।
एकरा लय मिलेबाक दृष्टिसँ हलन्तयुक्त रहलापर एक आ लघु रहलापर दीर्घ दू मात्रा लऽ सकै छी, मुदा से अपवादस्वरूप आ आवश्यकतानुसार, आपद् रूपमे।
जेना मनोज- एकर उच्चारण होइत अछि-
म+नो+ज्
मुदा संबोधनमे
म+नो+ज+अ+अ
तखन निअम भेल:
मैथिलीमे स्युक्ताक्षरमे हलन्तक अस्तित्वक अनुसार गणना होएत। मुदा जतए हलन्तयुक्त वर्णसँ पाँती वा पाँती खण्डक समापन होएत ततए हलन्तयुक्तकेँ एक मात्राक गणना लय मिलानी लेल कऽ सकै छी। संगहि लय मिलानी लेल पाँती वा पाँती खण्डक अन्तिम वर्ण ह्रस्व रहलापर ओकरा दीर्घ बुझि मात्रा गणना कऽ सकै छी।

क्ष= क् + ष= ०+१
त्र= त् + र= ०+१
ज्ञ= ज् + ञ= ०+१
श्र= श् + र= ०+१
स्र= स् +र= ०+१
शृ =श् +ऋ= ०+१
त्व= त् +व= ०+१
त्त्व= त् + त् + व= ० + ० + १
ह्रस्व + ऽ = १ + ०
अ वा दीर्घक बाद बिकारीक प्रयोग नहि होइत अछि जेना दिअऽ आऽ ओऽ (दोषपूर्ण प्रयोग)। हँ व्यंजन+अ गुणिताक्षरक बाद बिकारी दऽ सकै छी।
ह्रस्व + चन्द्रबिन्दु= १+०
दीर्घ+ चन्द्रबिन्दु= २+०
जेना हँसल= १+१+१
साँस= २+१
बिकारी आ चन्द्रबिन्दुक गणना शून्य होएत।
जा कऽ = २+१
क् =०
क= क् +अ= ०+१
किएक तँ क केँ क् पढ़बाक प्रवृत्ति मैथिलीमे आबि गेल तेँ बिकारी देबाक आवश्यकता पड़ल, दीर्घ स्वरमे एहन आवश्यकता नहि अछि।

आब आउ बहरे मुतकारिबमे एकटा गजल कही:

बहरे मुतकारिब:- सभ पाँतिमे पाँच-पाँच वर्णक संगीत-शब्द चारि बेर एहि क्रममे:
U । । अरकान सामिल पूर्णाक्षर

आब मैथिलीमे विभक्ति सटलासँ कनेक सुविधा अछि, तैयो शब्दक संख्या चारिसँ बेशी राखि सकै छी मुदा ह्रस्व दीर्घक क्रम वएह राखू।
लुन U।। 
लुन फलुन  लुन फलुन
लुन फलुन  लुन फलुन 

(क्रमशः) 

मैथिली गजलशास्त्र- ९
कविवर जीवन झाक नाटक सुन्दर संयोगसँ लेल मैथिलीक पहिल गजल

सुन्दर संयोग चतुर्थ अंकमे लेखक स्वयं (गजल) कहि एकरा सम्बोधित कएने छथि।
(गजल)
आइ भरि मानि लिअऽ नाथ ने हट जोर करू।
देहरी ठाढ़ि सखी हो न एखन कोर करू ॥१॥

हाय रे दैव! इ ककरासँ कहू क्यो न सुनै।
सैह खिसिआइए जकरा कनेको सोर करू ॥२॥

लाथ मानै ने क्यो सभ लोक करैए हँसी।
बाजऽ भूकऽ ले जँ कनेक जकर सोझ ओठ करू ॥३॥

जाइ एखन ने धनी एक कहल मोर करू।
आन संगोर करू एहि ठाम भोर करू ॥४॥

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