बोनसाइ - ज्योत्सना चन्द्रम - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 4 अप्रैल 2009

बोनसाइ - ज्योत्सना चन्द्रम

प्रगति- पथपर
द्रुतगतिएँ अभिनय करैत युग
क्षणे-क्षण
ल' रहल अछि नब आकार
बदलि रहल अछि रंगमंच
अपन सभटा पूर्व रंग

कुशल लाइटमैन जकाँ
द' रहल अछि फोकस
जीवनक एक-एक स्पॉटपर
आ,
मनुक्खक लगपासक दुनिया
नहा रहल अछि
सराबोर भ' रहल अछि
एहि नब अर्थबोधक
बहुरंगी इजोतसँ

चिक्कन पाउडर सन
गमकैत प्रभाव
छिहलि रहल अछि सभतरि -
शहर, गाम
डगर, डगर ...
आगाँ बढ्क्षबाक प्रतिस्पर्धामे
पिछड़बाक डर
बिसरि रहल छै परिसर-परिवेश
स्वयं ,
स्वयंटाकेँ चीन्ह' लागल अछि लोक

आधुनिकताक हड़कम्पमे
बिला रहल अछि आत्मीयता
खियाए रहल अछि भावना
अर्थतंत्रक बजार मे
उड़िया रहल अछि मोनक सुगंधि
बर्फक सिल्ली तर मुर्दा भेल आपकता
स्पंदनहीन
निश्चेत पड़ल अछि
सहमल,
सुटकल सन अनुराग
कात भेल ठाढ़ अछि

उपेक्षाक धाह
पजरि रहल अछि सभतरि
आब त' जेना शेष नहि रहल
ममताक छाहरि
संरक्षणक शांति...

भरिसक,
सम्बन्धक सेहो भ' रहल अछि
बोनसाइ संस्करण !