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बभनगमाबाली भौजीक जीवनक महत्वपूर्ण
घटना सभक एकटा संक्षिप्त विवरणिका

- कृष्णमोहन झा



आ से एहेन अहिबाती के हेती
जे बभनगमाबाली भौजीक सोहाग-भाग देखि जरि नइँ जेती

ओना मानलहुँ
जे हुनका पोथी-पतराक दर्शन नइँ भेलनि

मानलहुँ जे पाबनि-तिहारे हुनका तेल-कूड़ भेटलनि

मनलहुँ जे चाभीक गुच्छा
ओ कहियो अपन आँचर में नहि बान्हि सकलीह

ईहो मानलहुँ जे लाख कबुलाक बादो
आजीवन ओ दोसर पुत्र-रत्न प्राप्त नहि क’ सकलीह

मुदा निस्सन्देह
एकटा भरल-पूरल जीवन केँ छाँटैत-फटकैत
अपन 37 बरखक बयस में ओ
38289 टा सोहारी पकेलीह
2173 डेकची भात पसेलीह
13000 बेर बर्त्तन-बासन माँजलीह
307 बेर आँगन निपलीह
47 टा साड़ी आ 92 टा ब्लाउज पहिरलीह
275 राति भूखल सुतलीह
हुनका 3 बेर भेटलनि सम्भोगक सुख आ 949 बेर भेलनि बलत्कार
बेटी जनमौलनि 4 टा

5 बेर भेलनि गर्भपात

मुदा ई देखू सबसँ मार्मिक बात
जे ठीक बरसातिक प्रात
जखन हुनक सीथ रहनि सिनूर सँ कहकह करैत
आ भरल रहनि लहठी सँ हाथ
तखन अपन स्वामीक आगू ओ
बिना अन्न-जल ग्रहण कयने भ’ गेली विदा


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  1. बभनगामा बाली भौजी सभ घर आँगनमे भेटतीह। आर आगू बढ़ू तँ सभ आँगन मे चारि भैयारीमे एकटा मसोमात सेहो भेटतीह। तीन घर चारेक मुदा भरल पूरल, मुदा एकटा एकचरिया ओही आँगनमे ओहि मसोमातक रहिते छन्हि। झगड़ा भेलापर साँय केँ खा जएबाक आरोपो ओही एकचारी बाली मसोमातपर पड़ैत छन्हि।

    बड्ड नीक कविता लागल। कोनो पाँती एहन नहि लागल जकर उपयोग कवि द्वारा जबरदस्ती भेल होए।

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  2. maithili kavita ke ahan dvara dekhaol disha aar aaga jayat se aasha achhi, ham te aab 55 cross kaylahu, aai dhari maithili me 2-4 gote chhori shesh dvara uchhisht parsal jait dekhne rahi, aai ahank ek pher dosar kavita padhi mon gadgad bhay gel.

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  3. bah, prahar kaylahu apan sanskritik durbal paksha par,
    हुनका 3 बेर भेटलनि सम्भोगक सुख आ 949 बेर भेलनि बलत्कार
    बेटी जनमौलनि 4 टा
    आ 5 बेर भेलनि गर्भपात

    aa ant me eho khoob
    मुदा ई देखू सबसँ मार्मिक बात
    जे ठीक बरसातिक प्रात
    जखन हुनक सीथ रहनि सिनूर सँ कहकह करैत
    आ भरल रहनि लहठी सँ हाथ
    तखन अपन स्वामीक आगू ओ
    बिना अन्न-जल ग्रहण कयने भ’ गेली विदा

    kichhu hoy ehibati rahlih babhangama wali bhauji!!!!!
    exclamation ke kateko chinh lagayab kam rahat.

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  4. ओना मानलहुँ
    जे हुनका पोथी-पतराक दर्शन नइँ भेलनि

    मानलहुँ जे पाबनि-तिहारे हुनका तेल-कूड़ भेटलनि

    मनलहुँ जे चाभीक गुच्छा
    ओ कहियो अपन आँचर में नहि बान्हि सकलीह

    ईहो मानलहुँ जे लाख कबुलाक बादो
    आजीवन ओ दोसर पुत्र-रत्न प्राप्त नहि क’ सकलीह
    bad nik

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  5. dhanyavad,

    pharichha-pharichha ke likhba lel,
    muda aabo bhettah ehan,

    je nahi bujhi paytah gapak maram

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  6. कृष्णमोहन जी। जाहि लय मे आ जाहि विश्वासक संग अहाँ ई समस्या कहि गेलहुँ गाबि गेलहुँ ओ अहाँक भीतरक अदम्य प्रतिभाक द्योतक अछि।

    अहाँक आर रचना जल्दी-जल्दी आएत ताहि आशाक संग।

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  7. babhangama bali bhaujik varnan hamra apan gharak varnan lagal, ham katek chorait rahi ee bajay me, muda ahan katek sahajta se baaji delahu

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  8. aab etbe je dobara tebara post karu rachna sabh,
    jaldi-jaldi aa beshi

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  9. dhanyad krishnamohan ji, rachnak sang etukka tippani sabh seho padhlahu, kichhu bajay lel baki nahi rahal

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  10. bhai krishnakant,
    kshuda badha delahu, aar rachna padhbak mon achhi, dui din par nahi te saptah me ek ber jaroore

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  11. karahi rahal acchi mithila,
    dahar,
    sukhar,
    bagal chhori ghar dvar,
    je achhi takare kon hal

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  12. अहाँ आ अहाँक रचनासँ ई ब्लॉग सुन्दर भ' गेल।

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  13. कृष्णमोहन झा9 अप्रैल 2009 को 12:03 am

    अपने सभक आभारी छी।रचना पढ़ल जाय तखनहि ओ सार्थकता ग्रहण करैत अछि। हमर कविता के सार्थक क'र' लेल बहुत-बहुत धन्यवाद!
    किछु टिप्पणी पढि हम असहाय ओ अवाक् भ' गेलहुँ।दुःख अछि जे एहि कविता सँ आगू बढि क'
    हम आर किछु नहि क' सकै छी।
    हम भाइ गजेन्द्र जीक आभारी छि जे ओ हमरा
    'मैथिल आर मिथिला'सँ जोड़लनि।
    -krishnaamjha@gmail.com

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  14. blog par etek ras aa etek tarahak rachna padhi mon aanandit bhay gel,
    babhangama bala bhauji te apratibh kay delak, aaiyo petposa mal, aa gharghussa barad par maithili me kavita likhal ja rahal achhi, tahi sthiti me ee parivartan adbhut,

    manish gautam

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  15. ahank rachna me kichhu bat rahait chhaik, ne kono dambh, ne kono panditya pradarshan, matra kavita,
    lok se jural, je manasi ke dikkat dait chhaik bina sochne chalait rahba par.badhya karait chhaik o sabh sochba par je bad me dekhbai kahi lok tarait rahal achhi.

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  16. गजेन्द्र जी,
    एहेन सुन्दर टिप्पणी देबाक लेल धन्यवाद!
    प्रयास त यैह रहैत अछि जे कविता मे किछु आर नहि,कविते रहय।मुदा सुच्चा कविता लिखब बड्ड मोस्किल।देखियै ई कतेक दिन चलैत अछि।

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  17. १.रचनामे कोनो तथ्यगत कमी नहि।
    २.रचनामे कोनो परिमार्जनक आवश्यकता नहि।
    ३.में केर बदला मे हेबाक चाही, दू ठाम ई त्रुटि अछि।
    ४.रचनामे कोनो आर त्रुटि नहि।
    ५. रचनापर आर कोनो सुझाव नहि।
    ६.रचनाक उज्जवल पक्ष अछि समाजक अन्ध प्रशंसाक बदला ओकर बुराईकेँ सोझाँ आनब। पति-पत्नीक बलात्कार कए सकैत अछि ई आब जा कए कानून मानलक अछि मुदा कवि मोन आह।
    ७. ई रचना नवीन आ आबएवला पीढ़ीक सोचक अनुरूप अछि। ओ कतेक रास सोहारी पकेलन्हि आ कतेक रास भुखल सुतलीह, आह कवि मोन। बलात्कारक परिभाषा तँ कविक अनुरूप कानून बना लेलक, मुदा जनगणना आँकड़ा एखनो कहाँ मानैत अछि आँगन निपनाइ आ डेकचीसँ मार पसेनाइकेँ आर्थिक कार्य!!

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  18. babhangama bala bhauji ekta charitra nahi varan mithilak ekta katu satya achhi jakra sojha aani ahan nirbhiktak parichay del

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