रक्षा बंधन (बिहनि कथा) - वी०सी० झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 18 अगस्त 2016

रक्षा बंधन (बिहनि कथा) - वी०सी० झा"बमबम"

~ माँ गऽई सबहक हाथ पर रंग विरंगक राखी बान्हल देखय छियहि ?
~ आय राखी पूर्णीमा छियहि ने तांय सब राखी बन्हेने छहि !

~ तखन हम किआ ने बन्हेलिए ? कि अपना सब कैंऽ इ पावनि नहि होइत छहि ?
~ इ पावनि सब कैंऽ होइत छहि !

~ जखन सब कैंऽ होइत छहि तखन हमरा हाथ पर किआक ने राखी - - - ?
~ इ भाई - बहिन केर नेहक पावनि छियहि ! बहिन भाई'क हाथ पर राखि बन्हैत छहि ! अहाँ'क बहिन नहि अछि तांय नहि बन्हायल !

~ माँ गऽई पुनीता दाय , तन्नू , आरती , सविता  ओहो सब तऽ बहिने ने छियहि ?
~ मुदा ओ तोहर अप्पन बहिन नहि ने छियऽ ओ तऽ पितिऔत बहिन भेलह ने ! तांय - - -

~ पितिऔत रहउ आ अप्पन बहिन तऽ बहिने ने होइत छहि ?
~ से तऽ होइत छहि परंच  - - - -
~ परंच - तरंच किछ नहि जाय छियहु सब संऽ राखी बन्हाबऽ - - -

  वी०सी० झा"बमबम" 
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