हमर गाम. - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 1 अगस्त 2016

हमर गाम.

 
"हमर गाम"
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हमर गाम हरा गेल अछि आ हमहूँ गाम सँ हरा गेल छी । गामक माईट- पाईनक सुगंध, खेत- खलिहानक हरितिमा, ईनार- पोखैर एवं संध्याकाल अस्ताचलक हेतु प्रस्थान हेतु उद्यत सूर्यदेवक लालिमायुक्त किरणक प्राकृतिक मनोरम दृश्य इत्यादि अनेकों प्रकारक प्रकृति प्रदत्त चेतनाक चिंतन मानस- पटल सँ विलिन भ' चुकल अछि । हमर गाम हरा गेल अछि, हमहूँ गाम सँ हरा गेल छी ।

भोरे- भोर सूर्यदेवक उदय सँ पूर्व गर्दनि मे घंटी बाँधल टन- टन स्वर सँ प्रातःकालीन वातावरण कें गुंजित करैत जोड़ा बरऽदक समूहक संग हरबाहा द्वारा खेत जोतबाक उन्मुक्तताक दृश्य एवं अनेकों हऽरक इंतजाम भेला उपरांत कतारबद्ध एवं श्रेणीबद्ध खेत जोतनीक दृश्य प्रायः समाप्त जकां भ' गेल अछि आओर वैज्ञानिक पद्धति द्वारा खेती करबाक ललक मे पुरनका खेती करबाक पद्धति, रुदन- क्रंदन करैत अतीतक करुण गाथा कें व्यथित करैत अछि आ गर्दनि मे बाँधल घंटीक टन- टन आवाज कल्पना बनि ट्रैक्टरक शोरगुल मे विलिन भ' चुकल अछि । हमर गाम हरा गेल अछि आ हमहूँ गाम सँ हरा गेल छी ।

गामक पुरनका प्राइमरी स्कूल मोन पड़ि रहल अछि की ? बच्चा सभहक झुण्डमय टोली स्कूल जेबाक तैयारी मे अछि । मास्टर साहेब सेहो स्कूल जेबाक तैयारी मे छथि । शनि दिन हेबाक कारणें स्कूल मे पढौनीक अतिरिक्त आओरो अनेकों काज अछि । स्कूलक साफ- सफैया, गोबर सँ निपबेनाई तदनुपरांत विद्यार्थी द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम इत्यादिक आयोजन । वर्त्तमान परिवेश मे अ, आ, इ, ई, उ, ऊ क समवेत स्वर गुंजित नहिं, मात्र कल्पनाक विषय बनि चुकल अछि । ग्रामीण शिक्षाक प्राथमिक शिक्षा- पद्धतिक स्वरुप विलुप्त भ' गेल । संस्कार संचयन करबाक प्रारंभिक अवस्थाक स्वरुपक क्षरण सँ गामक समाज त्राहि- त्राहि क' रहल अछि । हमर गाम हरा गेल अछि आ हमहूँ गाम सँ हरा गेल छी ।

संध्याकाल बुजुर्गलोकनिक समवेत टोली समन्वित भाव सँ परस्पर आत्मियतापूर्वक एक- दोसरक समाचारक आदान- प्रदान करबाक परम्परा कतय लुप्त भ' गेल ? गामक चौक- चौरास्ता पर अवस्थित चाय- पानक दुकानक भीड़ मे एकाकीपनक अहसास असहज एवं पीड़ादायक किएक भ' गेल ? उपर्युक्त घटित स्थितिक समाधान संभवतः आब संभब नहि भ' सकैछ । अंधकार प्रकाशक प्रतीक्षा क' रहल अछि एवं प्रकाश अंधकार सँ निवृतिक हेतु तत्पर अछि । अतः हमरालोकनि पुनः नीक दिनक प्रतीक्षा करैत अपना गाम कें बचावीं संगहि गामक गरिमा कें गौरवान्वित करी । इत्यलम् । जय श्री हरि । राजकुमार झा ।
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