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चौमासा
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अषाढ़ हे सखी मेघ गरजय
वर्षा झहरय जोड़ हे 
कंत मोरा भेल विदेशिया
लागि रहल बर डर हे ।
सौन हे सखी पछबा सिहकल 
घन घटा घनघोर हे 
मयुर नाचय मेघ देखितहि
चारूभर भेल शोर हे ।
भादव हे सखी ठनका ठनकय
बिजली चमकय चहुओर हे
मदन मन तन विरह वेदन 
टूटय पोरे पोर हे ।
आसिन हे सखी आश राखल
औता पिया आब मोर हे
भेल कोजगरा चान पूनम
चकोर मणि गठजोर हे ।।
   - मणिकांत झा दरभंगा

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