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मिथिला उवाच - (भाग -१)



फलना बाबु मईर गेला बहुत नीक लोक छलाह ..........के कहलक ..........एखने एगो धिया-पुता बजैत जाई छल जे फलना दिन भोज हेतई ....बाहर निकल्हूँ त ...हरिबोल - हरिबोल सुनाई परल .!

तू ....जेबहक की नई कठियारी .....
हा हाँ कियक नई जेबै !
.....ज़ाब त संग क लेब कने -
...

फलना बाबु छि यु कठियारी के हकार दैत छि .........चिलना बाबु नै रहला .........!

ओहो.. ओहो ...काल्हिये त गप्प भेल छल हुनका संग हमरा पोखैर पर भेटल छलाह .........आहा..हां .. कहियोऊ ....... जन्म मरण के कोनो भरोसा नई होईत छई यऊ बाबु ..........ठीके कहैत छिये काका .......!

लेकिन गेलाह सबटा सुख भोइग क बेटा-पुतौह बड़ निक छैन , खूब सेवा वारी करैत छलैन .........!
.हाँ हाँ कियाक नई कर्थिन कमिये कोण छलैन ....एगो बेटा डाक्टर छैन ...एगो, वन विवाग के अधिकारी छैन ........बेटियों सब सुखी सम्प्पन छैन ,
सब काज सं निश्चित भ क मरला हा !
हा से त सब अर्थे सं महादेव के कृपा सन भरल पुरल छैथ,....... लेकिन काज राज ढंग सं करता की नहीं तखन ने ..........भगवान् कोनो कमी नहीं देने छैन .........जवार त खुआब्क चाही ........हा त से कियाक नई .......!

चल चल देरी भ रहल अछि ..........फेर एबाको अछि ..........पूजा पाठ करबाक अछि ......!

राम नाम सत्य है ............!

हरी बोल ....हरी बोल .......!
कथी के अतेक हल्ला भ रहल छई यऊ छोटका बाबू ........- भौजी फलना बाबु के स्वर्वास भ गेलैन !

ठीक छई आन्हा चली जाऊ कठियारी ....... भैया के पठआ दियुं कने अंगना भोर सं भुखले प्यासल बैसल छैथ ....दालान पर !

.................................................................. !

एजोरियो रईत में टोर्च लक ई के आबी रहल अछि बुर्लेल आदमी होऊ
तखने मुह पर टोर्च मार्लकैन .........काका ......एकाद्सा - दुआद्सा के नोत हँकार दैत छि ......पुरख्क दफ्फा ..!

आहा ...फलना बाबु ...औ औ बैसू .....!

नै काका बड़ काज आछि एखन ...!

हाँ आन्ह्के त एखन कजाक अंगना अछि बौआ , ........बहिन सब एलहा की नई ?
हाँ सब आबी गेल ......काका छोटकी पुछई छल आन्ह्के बारे में .........जे काका जिब्ते छथिन ने ..........!


हह हहह हा.. हा.. हाँ हाँ ओकरा त होइते हेतई , बच्चा में बड़ मारने रहिये ने ......!

बरकी बहिन के त नन्किरबो छ ने एकटा ......
हाँ ५ सालक छई नन्किरबा ..........!
भगवान् देह समांग दोउ बढ़िया .......बड़ निक ! ठीक छई चली छि काका .!

भोजक दिन -

क्या गो तरकारी छई होऊ भाई .........?
सात गो तरकारी छाई काका ......!
कोण-कोण ?
.........आलू- कोबी , भाटा -अदौरी , कदीमा , सज्मैन, साग , बड़ ,आ बड़ी ,

आह बहुत निक .......सबेर सकाळ बिझो भ जीते त ठीक रहितई ..बेसी राईत में नै ठीक होई छई ...धिया पुता सब उन्घा लागे छई ..........हाँ -

जाने....... कनेक देख क आब त कत तक काज आगा बढ्ल्या .......!

तखने.दूर सं..........!

फलना बाबु छि यऊ ....बिझो करबैत छि .!
हाँ हाँ .........ठीक छई ........!

है बिझो भेलई ....बिझो भेलई....!
है छौरी सब हल्ला नई कर ....!
बाबा ......भर्तुआ सुईत रहल ...!
है जो ने उठा दही ने सांझे सा हल्ला केने छलिया भोज खाब भोज खाब .....जो जल्दी लोटा ल क आग ..!
दू गो लोटा ल लिहां.......
हाँ...!

यो एगो ओउर पात दिय ई फाटल अछि ......
है छौरी ....पात खेबा की भात .....!
जा दियोऊ बच्चा छई है ले बोउवा ...दोसर पात !


है भात उठब ने ......! म तोरी गप की करैत छ उम्हर एखन धैर पतों नई परसाला ....!

दाइल लेब दाइल ..! डालना.... डालना....!


पैन ओ एगोटा त उठा ला कम सं कम ....की सब तरकारिये परसबा!..हरे करिया ..एम्हर आ ..चल पैन उठा ले तू .!
है हम पैन नै उठाब .......!
है बह्निचो पैन पिएला सन धर्म हेतो .......उठा न !

.....................

.............
है क़ात भ का हाथ धोए जाई जाऊ - है ई के धिया-पुता अछि ........है बिचई में रास्ता पर पैन हरबे छा
...लोक पिछैर का खस्ते एकने चंडाल कही के ...!

बहुत नीक .........छल काका भोज ,
जय जय भ गेलै ..!
होऊ एतबो नै कैरतई त नाक -कान कटब के छली की ...एतेक सम्पैत कत क रखते ....समाज में रह के छई की नई ....!

हाँ सेहो छिये........देखियो आब कालिह की होया ....सुन में आला जे जवार भ रहल अछि पांच गाम नोतात.!
आह करबाके चाहि .. अहि सं नाम होईत छई ....अपने नाम हेतई ने कोनो हमर थोरे ने हाँ .......गामक नाम सेहो हेतई कने !


भोजक २-४ दिन पश्चात ...........!

हाउ फलना बाबु के रईत तबियत ख़राब भ गेली की ....!

हल्ला सुनालिये काका आई भोर में ........ओहो लटकले छैथ ..........पाकल आम छैथ
....... आब जे दिन जीबैत छैथ से दिन !

हाँ .........हमरो जेबाक छाला बंबई लेकिन ई हल्ला सुनालिये
त रुईक गेलहुं !
दू चईर दिन और रूइक जाई छि .......कही ओहो ने ...आब कतबो छैथ त दियादे छैथ ने .....चली जायब त बद्नामिये हयात .....!

तहिदुआरे रुकिए जाई ...............!
(नविन ठाकुर )

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