गजल - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 18 मई 2011

गजल

कोहबर के घाम महैंक उठल मौह सन
रुचलौं आहाँ राईत गुदगर रौह सन !

चतुर्थी अबैत बेस भेलौं समर्थ
पाकल यौवन भातिक लौह सन !

पाटिया बनल पट्काक अखारा
टसक्लौं ने आहाँ नबका चौह सन !

भोरे बिधकरी जे केलैन खखाश
चुप्पे मठेरलौं बतही पुतौह सन !

अहिबातलक पातिल सेहो मिंझा गेल
सांसक बिर्रो छल नागक फौंह सन !