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यात्रा@प्रभात राय भट्ट
by Prabhat Ray Bhatt Uyfm on Saturday, May 7, 2011 at 8:56pm

यात्रा@प्रभात राय भट्ट




मरलोउपरांत रहैय ओ आत्मा जीवंत,

जिनकर यात्रा होइत अछि अनन्त,

अनबरत चलैत रहू लक्ष्यक डगर पैर,

मिलय नए मंजिलक ठेगाना जाधैर,




पाछू कखनो घुईर नए ताकू,

डेग पैर डेग बढ़ाऊ आगू,

पाथैर कंकर पैर चल परत,

कांट क चुभन सहपरत,




भसकैय संगी सेहो साथ नएदिए,

एसगर जिनगी क यात्रामें चल पड़य,

रही रही मोनमें उठ्य जोर टिस,

जुनी कियो नए ताकत अहाँदिस,




भसकैय अपनों सम्बन्ध पराया,

साथ छोइड सकैय स्वस्थ काया,

मुदा टूटे नए अटल विस्वास,

एक दिन बुझत मोनक प्यास,




भेटत अहांके अपन मंजिलके ठेगाना,

जिनगी अनंत यात्रा छै बुझत जमाना,

मरलोउपरांत रहैय ओ आत्मा जिवंत,

जिनकर यात्रा होइत अछि अनन्त,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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