रुबाइ- आशीष अनचिन्हार - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 11 अप्रैल 2011

रुबाइ- आशीष अनचिन्हार

चाम जँ अहाँक चाम सँ भीरि जेतै


बूझू मरलो मुरदा जीबि जेतै

इ प्रेमक आगि बड्ड कड़गर आगि

बूझू पाकलो बाँस लीबि जेतै