दू गोट कविता- ब्रज मोहन झा "सोनी” बनौटा - नेपाल - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

दू गोट कविता- ब्रज मोहन झा "सोनी” बनौटा - नेपाल

1.हम
ब्रज मोहन झा ”सोनी”
हम पत्रकार छि,
कुडा के ढेर पऽ पडल,
बिन तारऽक सितार छि ।

हम कथाकार आ
गित गजलकार छि
आगुमे डा. होइतो अर्थऽक बिमार छि

बन्‍द आ हडतालमे
अर्जुनऽक ढाल घटोतकच बनल
नेताके हथियार छि ।

हम गामघरऽक अकला
घरऽक फुटल तसला
मसोमातऽक भतार हम
नाटकऽक अचार छि ।

कियक त हम यूवा
पैघ बेरोजगार छि ।
कियक त हम यूवा
पैघ बेरोजगार छि ।



2.उदासी
ब्रज मोहन झा ”सोनी”
डेग डेग पऽ गाम सहरमे
सगरो नोर भोकासी अछी,
नोर बहा लोक सुती रहल
तँय हमरो छायल उदासी अछी ।

ओइ दिन ओकरा घर चोर गेलै,
कयलौ हल्‍ला होशीयारी लेल,
डरे चोरबऽक हनलक गब्‍दी ,
तँय हमरो छायल उदासी अछी ।

चोरबो पिटलक दोसरो डटलक
कानुनमे हमरा फँासी अछी ।
घुस खाऽ जज छोडी देलक,
तँय हमरो छायल उदासी अछी ।

चुप रहने संरक्षण भेटत
बाजब बडका बदनामी अछी ।
ई बात हमर गुरुजन कहलक,
तँय हमरो छायल उदासी अछी ।

आइ फेर देखलीयै सेन्‍ह पडैत,
”सोनी” सोनाके गाछी अछी ।
ई देखी सब केव भेल प्रशन्‍न,
तँय हमरो छायल उदासी अछी ।

तँय हमरो छायल उदासी अछी ।

ब्रज मोहन झा ”सोनी”
,बनौटा – ५ (महोत्तरी)