गजल - मिथिला दैनिक

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रविवार, 5 सितंबर 2010

गजल

सोना भेटत सस्ता मँहग बड्ड चाउर देखब एक दिन
लोक एहिना लूटत हबाउर देखब एक दिन

अहाँ संग हमरा देखि सदिखन
लोक जरत आ बनत छाउर देखब एक दिन

विधान सभा लोक सभा शोक सभा
भूखल जनता दैत रहत धमाउर देखब एक दिन

हुनकर धोधिए देखि मेटा गेल भूख हमर
एहिना अँहू सभ करब चराउर देखब एक दिन

नोरक खिच्चरि दर्दक तिलबा कष्टक चुड़लाइ
एहिना हएत अनचिन्हार जड़ाउर देखब एक दिन