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वेद-ए-मुकद्दस मे वेदक विषएमे अली सरदार जाफरी लिखै छथि- शुऊरे-इन्साँ के आफताबे-अजीम की अव्वलीं शुआएँ- मनुष्यक चेतनाक पहिल किरिण।

जेना तमिलमे संस्कृत शब्दक आ तुर्कीमे अरबी शब्दक बहिष्कारक आन्दोलन चलल तहिना फारसीमे (फारसक प्राचीन ग्रन्थ अवेस्ता आ वैदिक-संस्कृतक मध्य समानता द्रष्टव्य) सेहो अरबी शब्दक बहिष्कार आ तकरा स्थानपर आर्य भाषा-समूहक शब्दक ग्रहणक आन्दोलन चलल अछि। मैथिलीमे सेहो हिन्दी-उर्दू शब्दक बहुलतासँ प्रयोग भाषाक अस्तित्वपर संकट जेकाँ अछि, खास कऽ मिथिलाक्षरक मैथिल ब्राह्मण संप्रदाय द्वारा दाह-संस्कार कएलाक बाद।

आब उर्दू गजलपर आबी। १८९३ ई.मे हाली मुकद्दमा-ए-शेर-ओ-शायरी लिखलन्हि जे हुनकर काव्य-संग्रहक भूमिका छल। ओहि समए धरि उर्दू गजलक विषय आ रूप दुनू मृतप्राय छल से हाली विषय-परिवर्तनक आह्वान तँ केबे कएलन्हि संगहि काफिया आ रदीफक सरल स्वरूपक ओकालति कएलन्हि। ओ लिखै छथि जे एकाधे टा शेर आइ-काल्हि नीक रहैए आ शेष गजल फारसीक शब्द सभसँ भरि देल गेल शेरक संकलन भऽ जाइए जाहिसँ ओकर स्तरहीनतापर लोकक ध्यान नञि जाए। से उर्दू गजल धार्मिक कट्टरतापर व्यंग्यक क्षेत्रमे फारसी गजलसँ आगाँ बढ़ि गेल।


संगीत आ गजल गायन

ठाठ कल्याणक अन्तर्गत राग यमनमे त्रिताल १६ मात्रा (दू पाँतिक अनुष्टुप् – ३२ अक्षर) क एतए प्रयोग भऽ सकैए। ठाठ बिलावलक अन्तर्गत राग बिलावल एकताल १२ मात्राक होइत अछि, एतए गायत्री-२४ अक्षरक गजलक प्रयोग भऽ सकैए। कारण वार्णिक गणनाक उपरान्त रेघा कऽ गायककेँ कम गाबए पड़तन्हि आ शब्द/ अक्षरक अकाल नहि बुझना जाएत।

ई मात्र उदाहरण अछि आ से गायकक लेल मैथिली गजल लिखनिहारक लेल नहि।

मैथिलीमे एखन धरि जे गजल लिखल गेल अछि ओहिमे बहरक एकरूपताक कोनो विचार नहि राखल गेल अछि। ने से बहर-विचार फारसी काव्यशास्त्रक हिसाबसँ राखल गेल छै आ ने भारतीय काव्यशास्त्रक हिसाबसँ। आ ताहि कारणसँ मैथिली गजल सभकेँ “गजल सन कविता” मात्र कहि सकै छिऐ। ओना बहरक एकरूपता गजलकार लोकनि द्वारा गजल लिखलाक बाद एक गजलपर आध घण्टा लगेला मात्रसँ कएल जा सकैए।


गजल
सहस्राब्दीक हारि हमर आ जीत ओकर, नै जातिवादीक सोझाँ होएब लरताङर
भेष बदलि जातिपंथी जीति रहल कवि, ऐलुष नै फेर हम हएब लरताङर

एहि भू मार्गक अछि तँ गप्पे विचित्र सन, प्रकाश आएल अछि भेल अन्हार निवृत्त
मयूरपंखी पनिसोखा उगल छै एखने, इन्द्रक मेघकेँ सोंखि करब लरताङर

बनि बाल बुद्धि हम पुछने आइ छलहुँ, ई सत्य अहिंसाक पथ ई विजयक पथ
जीतल जाइए असत्यक रथ हुनकर, टनकाएब नै फेर होएब लरताङर

रस्ता चलैत छलहुँ दिन राति सदिखन, से भेल जाइत छारन नव रस्ता बनल
छी देखि रहल रस्ताक केंचुली भरिगर, गऽ जाइत आगाँ नहि होएब लरताङर

अबैए ओ सत्यक क्षण कोन विपदा बनि, अछि आएल दौगल ओ सुनझाएल अछि
पोखरिक जाइठपर भेल ठाढ़ छी हम, छछड़बाएब घर नै हैब लरताङर

छनगा पीबि शिव देखि रहल चारूकात, विषहन्त ओ घूमि रहल बनल बसात
तांडव ई अहाँक बुद्धि कहैए से त्रिकटु, तगबाए तकरा नै होएब लरताङर

हे भाइ ऐरावत अछि आइ झूमि रहल, कदैमे करैत ओ कदमताल विकराल
चरखा कत्तिनक टकुआ काटब देखल, नहि कदरियाएब खोभब लरताङर




गजल

बरसातिक ई राति बनल सुखराति हे कालि

करब षोडशोपचार आर दए बलि हे कालि


बाल बसन्त भैया बढ़थु बहिनक अछि आस

आस्तीक करैत भैया लेल सुधियो नहि हे कालि


लाल झिंगुर, लाल सिन्दुर, लाल अड़हुल फूल

ताहूसँ लाल देखल ई दृश्य-देश मिथि हे कालि


स्वप्नक सोझाँ सत्यक नै अछि आब कोनो मोल

पोखड़ि झाँखड़ि सगरि घूमि ई देखलि हे कालि



अमुआ फड़ए लदा लदी डारि लीबि-लीबि जाए

ओकर नम्रतामे कोनो अगुताइ सुनलि हे कालि



ऐरावत गजल सन कविता देखू देलनि ई

मैथिलीक गरिमा एहिठाँ देखू सदति हे कालि



गजल


जाइत-जाइत देखल ओ ठाढ़ आर मेघडम्बर सन छाती

भैयाक पीठ धोबिया पाट हुनकर मेघडम्बर सन छाती


पड़ल फेर अकाल करैत हाक्रोस छथि ओ ठाढ़ भेल कात

छाती धकधक उन्नत्त ठाढ़ि दुआर मेघडम्बर सन छाती


देखल ई चित्कार हम भऽ सोझाँ ठाढ़ देबै ओकरा हुतकारी

संकट प्रहारमे धैर्य अपरम्पार मेघडम्बर सन छाती


देखल हुनका आइ छन्हि मुँह क्लान्त मुदा नहि कोनो बात

कर्तव्यक बिच कोनो विश्राम डगर मेघडम्बर सन छाती


सुनू सुनू भाइ गप भेल असम्हार करू पुकार समधानि

भेल मानवक ई हाल करू दुत्कार मेघडम्बर सन छाती


ऐरावत देखल घुरचालि बनल हथियार ओ लेने जाल

छी तैयो ठाढ़ की हम क्षितिजक पार मेघडम्बर सन छाती



आब कनेक आर कठिनाह विषयपर आबी। पहिल खेपमे देल मात्रिक छन्द गणनापर आबी।

छन्दः शास्त्रमे प्रयुक्त ‘गुरु’ आ ‘लघु’ छंदक परिचय प्राप्त करू।

तेरह टा स्वर वर्णमे अ,इ,उ,ऋ,लृ ई पाँच ह्र्स्व आर आ,ई,ऊ,ऋ,ए.ऐ,ओ,औ, ई आठ दीर्घ स्वर अछि।

ई स्वर वर्ण जखन व्यंजन वर्णक संग जुड़ि जाइत अछि तँ ओकरासँ ‘गुणिताक्षर’ बनैत अछि।

क्+अ= क,

क्+आ=का ।

एक स्वर मात्रा आकि एक गुणिताक्षरकेँ एक ‘अक्षर’ कहल जाइत अछि। कोनो व्यंजन मात्रकेँ अक्षर नहि मानल जाइत अछि- जेना ‘अवाक्’ शब्दमे दू टा अक्षर अछि, अ, वा ।


१. सभटा ह्रस्व स्वर आ ह्रस्व युक्त गुणिताक्षर ‘लघु’ मानल जाइत अछि। एकरा ऊपर U लिखि एकर संकेत देल जाइत अछि।

२. सभटा दीर्घ स्वर आर दीर्घ स्वर युक्त गुणिताक्षर ‘गुरु’ मानल जाइत अछि, आ एकर संकेत अछि, ऊपरमे एकटा छोट -।

३. अनुस्वार किंवा विसर्गयुक्त सभ अक्षर गुरू मानल जाइत अछि।

४. कोनो अक्षरक बाद संयुक्ताक्षर किंवा व्यंजन मात्र रहलासँ ओहि अक्षरकेँ गुरु मानल जाइत अछि। जेना- अच्, सत्य। एहिमे अ आ स दुनू गुरु अछि।





आब किछु शब्दावली देखी।

अरकान :अरकान सामिल पूर्णाक्षर:
अरकान सामिल पूर्णाक्षर: फ–ऊ–लुन U।। फा–इ–लुन।U। मफा–ई–लुन U।।। मुस–तफ–इ–लुन ।।U। फा–इ–ला–तुन ।U।। मु–त–फा–इ–लुन UU।U। मफा–इ–ल–तुन U।UU। मफ–ऊ–ला–तु ।।।U
सभ पूर्णाक्षरी घटक मारते रास प्रकार।
१० पूर्णाक्षरी(सालिम) अराकानसँ १९ बहर आ से दू प्रकारक:
मुफरद बहर माने रुक्नक बेर-बेर प्रयोगसँ।सात सालिम(पूर्णाक्षरी)बहर, संगीत शब्दावलीमे एकरा शुद्ध कहि सकै छी।सभ पाँतीमे २-८ बेर दोहरा कऽ शेरमे ४-१६ रुक्नी बहर बनत। ४ रुक्नक बहर- मुरब्बा ६ रुक्नक बहर- मुसद्दस ८ रुक्नक बहर- मुसम्मन / मुफ़रद(विशुद्ध) आठ–रुक्न, छह रुक्न आ चारि–रुक्नक सालिम बहर
हजज :-आठ–रुक्न म फा ई लुन (U।।।) – चारि बेर/ छः–रुक्न म फा ई लुन (U।।।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न म फा ई लुन (U।।।) – दू बेर
रजज़ आठ–रुक्न मुस तफ इ लुन (।।U।) – चारि बेर/ छः–रुक्न मुस तफ इ लुन (।।U।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न मुस तफ इ लुन (।।U।) – दू बेर/
रमल आठ–रुक्न फा इ ला तुन (।U।।) – चारि बेर/ छः–रुक्न फा इ ला तुन (।U।।)– तीन बेर/ चारि–रुक्न फा इ ला तुन (।U।।)– दू बेर
वाफ़िर आठ–रुक्न म फा इ ल तुन (U।UU।) – चारि बेर/ छः–रुक्न म फा इ ल तुन (U।UU।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न म फा इ ल तुन (U।UU।)– दू बेर
कामिल आठ–रुक्न मु त फा इ लुन (UU।U।)– चारि बेर/ छः–रुक्न मु त फा इ लुन (UU।U।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न मु त फा इ लुन (UU।U।) – दू बेर
मुतकारिब आठ–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – चारि बेर/ छः–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – दू बेर
मुतदारिक आठ–रुक्न फा इ लुन (।U।) – चारि बेर/ छः–रुक्न फा इ लुन (।U।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न फा इ लुन (।U।) – दू बेर
एहि सभक मारते रास अपूर्णाक्षरी रूप सेहो।
मुरक्कब बहर: दू प्रकारक अरकानक बेर-बेर अएलासँ १२ सालिम बहर,संगीतक भाषामे मिश्रित। तीन तरहक- ४ रुक्नक बहर, ६ रुक्नक बहर, ८ रुक्नक बहर / मुरक्कब (मिश्रित) पूर्णाक्षरी (सालिम) बहर
१२ टा –तवील,मदीद,मुनसरेह,मुक्तज़ब,मज़ारे,मुजतस,ख़फीफ,बसीत,सरी–अ,जदीद, क़रीब, मुशाकिल
अरकान :मुज़ाहिफ अरकान अपूर्णाक्षर :
मुज़ाहिफ अरकान अपूर्णाक्षर :फ–इ–लुन UU। मफा–इ–लुन U।U। फ–इ–ला–लुन UU।। म–फा–ई–लु U।।U मुफ–त–इ–लुन ।UU। फ–ऊ–लु U।U मफ–ऊ–लु ।।U मफ–ऊ–लुन ।।। फै–लुन ।। फा । फ–अल् U। फ–उ–ल् U।U फा अ । U फा इ लुन । U । फ ऊ लुन U । ।

मुक्तजब (अपूर्णाक्षरी आठ रुक्न):फ ऊ लु U । U फै लुन U । फ ऊ लु U।U फै लुन। ।
मज़ारे (अपूर्णाक्षरी आठ रुक्न):मफ ऊ लु । । U फा इ ला तु । U । U म फा ई लु U । । U फा इ लुन। U । / फा इ ला न। U । U

मुजतस (अपूर्णाक्षरी आठ–रुक्न):म फा इ लुन U । U । फ इ ला तुन U U । । म फा इ लुन U । U । फै लुन। ।/ फ–इ–लुन UU।
ख़फीफ़ (अपूर्णाक्षरी छः रुक्न):फा इ ला तुन । U । । म फा इ लुन U । U । फै लुन। । / फ इ लुन U U ।

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  1. neek aalekh, agila bhagak intzar rahat.

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  2. bad neek nibandh, maithili gazal ke gati bhettai

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  3. Parmadarniya Gajendra Ji,
    Apnenk ee prastuti bahut utkrisht achhi karan je ekta gazal mein etek vishay vastu ke samavesh hoit chhaik ee jankari prayah sab ke nahi haoichh, bahut kichhu sikhay lel bhetal tain apnenke ehi prastuti hetu bahut-bahut dhanyavaad aa pher ehne kichhu nav chhejak intzaar rahat.

    Apnenk
    Manish Jha "Bauabhai"
    http://manishjha1.blogspot.com

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  4. gazal par maithili me prayah pahil shastriya vivechan

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  5. bahut ras tathya pharichchha bhel

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  6. Maithilik sandarbh me ehi rachnak vishes mahatva

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