समीक्षा श्रृंखला-१६- सुभाष चन्द्र यादव- जगदीश प्रसाद मंडलक कथा संग्रह गामक जिनगीपर - मिथिला दैनिक

Breaking

सोमवार, 12 अप्रैल 2010

समीक्षा श्रृंखला-१६- सुभाष चन्द्र यादव- जगदीश प्रसाद मंडलक कथा संग्रह गामक जिनगीपर

मैथिली साहित्यमे जगदीश प्रसाद मंडलक पदार्पण किछु-किछु ओहिना भेल अछि जेना कहियो विवेकानन्द ठाकुरक भेल छल। जहिना विवेकानन्द ठाकुर अपन जीवनक उत्तरार्धमे बहुत बहुत आकस्मिक ढ़ंगे मैथिलीमे प्रगट भेलाह, तहिना जगदीश प्रसाद मंडल एकबैग अपन अनेक कथा आ उपन्यास लऽ कऽ उपस्थित भेल छथि। विवेकानन्द ठाकुरक काव्यमे पाठककेँ ग्रामीण परिवेशक जेहन टटका बिम्ब आ नव सुआद भेटल छलनि, जगदीश प्रसाद मंडलक कथामे ओहने टटका चित्र आ नव आस्वाद भेटतनि। दुनू रचनाकार मिथिलाक ग्राम्य-जीवन संस्कृतिसँ मोहाविष्ट छथि। दुनुक शैली वर्णनात्मक अछि।

लेकिन आगमन, विषयवस्तु, दृष्टि आ शैलीमे समानता होइतहु दुनूमे क्यो ने तँ ककरो अनुकरण कएने छथि ने एक दोसरासँ प्रभाव ग्रहण कएने छथि। दुनुक अपन स्वतंत्र लेखकीय व्यक्तित्व छनि।
ठेलाबला, रिक्शाबला, चूनवाली, इन्जीनीयर, डॉक्टर इत्यादि शीर्षकसँ लागत जेना जगदीश प्रसाद मंडल वर्ग संघर्षक कथाकार हेताह। लेकिन ओ जनवादी या प्रकृतिवादी कथाकार नहि छथि, जीवन-संघर्षक कथाकार छथि।

हुनक कथाक सन्दर्भमे जे सर्वाधिक उल्लेखनीय बात अछि से ई जे हुनक सभ कथामे औपन्यासिक विस्तार अछि। वर्तमान समएमे प्रचलित आ मान्य कथासँ हुनक कथा भिन्न अछि। हुनक कथा घटना बहुलता आ ऋजुसँ युक्त अछि।
जगदीश प्रसाद मंडल जीवनमे प्राप्य जिजीविषा, मानवीयता एवं आदर्शकेँ सुदृढ़ आ पुनर्प्रतिष्ठित करबाक उद्देश्यसँ अनुप्राणित छथि।