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२१ वीं शताब्दी में गीत क्षेत्र में एकटा नवीन आयाम मुद्रित एल्वम गीत संग्रह "बाँकी अछि हमर दुधक कर्ज" ई कहव छन्हि माय मिथिलाभुमिक! तें हे मैथिल लोकनि अथवा हे मधेशी समाज आइ काल्हुक २१ वीं शताब्दी में सब वर्ग या जाति अपन - अपन अधिकारक रक्षाक आर अधिकारक प्राप्तिक हेतु एकता बद्ध आ निडर भs कs अहर्निश प्रयत्नशील अछि, अतः हमहूँ आहाँ एकजुट आ निर्भीक भs अधिकार प्राप्तिक हेतु तत्पर होई से आग्रह गीतक माध्यम सँ करबद्ध प्रार्थना कs रहल छि....


भरल नोर में...

केहन सपना हम मीता देखलों भोर में
माय मिथिला जगाबथि भरल नोर में
कहथि रने वने घूमी अपन अधिकार लेल
छें तूँ सुतल छुब्ध छी तोहर बिचार लेल

कनिको बातपर हमरा तूं करै विचार
की सुतलासँ ककरो भेटलै अछि अधिकार
जोरि एक एक हाथ बनवै जो लाखों हाथ
कर हिम्मत तूं पुत्र छियों हम तोहर साथ

अछि तोरापर बाँकी हमर दुधक कर्ज
करै एहिबेर तूं पुरा सबटा अपन फर्ज
लौटेदे हमर आब अपन स्वाभिमान
पुत्र तूं छै महान तोहर कर्म छो महान

हम जल्दिये अपने सबहक बिच "बाँकी अछि हमर दुधक कर्जक" बाँकी गीत लs कें हाजिर हेब...


विनीत ठाकुर
माता: शान्ति देवी, पिता: ब्रह्मदेव ठाकुर, जन्म तिथि: ०१.०३.१९७६, शिक्षा: बी.एड, सेवा: शिक्षक, स्थायी पता: मिथिलेश्वर मौवाही - ६, धनुषा, नेपाल.. इ-मेल: binitthakur@yahoo.co.in

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