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हमर भैआ के छोटकी सारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि------


मारए हमरा कनखी-मटकी
हमरो मोन जे केखन ने पटकी
दिअै ओकर जनम के तारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि-----


हमरो मोन अछि लुसकल-फुसकल
सटिऐ जा कए घुसकल-घुसकल
करी ओकरा सँ हम अड़ारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि------


रुप ओकर छै सोन्हगर सन
देह ओकर छै पनिगर सन
रहए सदिखन आँचर ससारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि-----


हुनका देहि कए होइए सेहन्ता
हुनके सन जे भेटए कन्ता
तखन खतम हेतै इ जुआरि
तोड़ैए खुब्बे बफारि॰॰॰॰

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  1. हमरो मोन अछि लुसकल-फुसकल
    सटिऐ जा कए घुसकल-घुसकल
    करी ओकरा सँ हम अड़ारि
    तोड़ैए खुब्बे बफारि------

    रुप ओकर छै सोन्हगर सन
    देह ओकर छै पनिगर सन
    रहए सदिखन आँचर ससारि
    तोड़ैए खुब्बे बफारि-----
    ई विषय पर अइ से बेसी सुंदर कविता आई तक हम नई पढ़्ने छलौं। बड़ नीक लागल। अहांक हृदय से आभार।

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