गीत - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 26 अप्रैल 2010

गीत


हमर भैआ के छोटकी सारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि------


मारए हमरा कनखी-मटकी
हमरो मोन जे केखन ने पटकी
दिअै ओकर जनम के तारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि-----


हमरो मोन अछि लुसकल-फुसकल
सटिऐ जा कए घुसकल-घुसकल
करी ओकरा सँ हम अड़ारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि------


रुप ओकर छै सोन्हगर सन
देह ओकर छै पनिगर सन
रहए सदिखन आँचर ससारि
तोड़ैए खुब्बे बफारि-----


हुनका देहि कए होइए सेहन्ता
हुनके सन जे भेटए कन्ता
तखन खतम हेतै इ जुआरि
तोड़ैए खुब्बे बफारि॰॰॰॰