गजल - मिथिला दैनिक

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रविवार, 17 जनवरी 2010

गजल

कहिओ सम कहिओ विषम
कहिओ बेसी कहिओ कम्म

होइत रहलै अकाल मृत्यु
कहिओ गोली कहिओ बम

खेलाइत रहलै देह पर
कहिओ देवी कहिओ जम

निकलैत रहल दिन-प्रतिदिन
कहिओ टका कहिओ दम्म

ठकि रहल अनचिन्हार के
कहिओ अहाँ कहिओ हम