हरियर गाछ जेना मुर्झायल ह्रदय बिकल भ जेना बौआयल - मिथिला दैनिक

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रविवार, 15 नवंबर 2009

हरियर गाछ जेना मुर्झायल ह्रदय बिकल भ जेना बौआयल

हरियर गाछ जेना मुर्झायल ह्रदय बिकल भ जेना बौआयल
१)नव पल्वित भ रहल छल मन भीतर स चहैक रहल छल तन
इ सोची सोएच नाची रहल छलौ अपना के धन्य कहैत छलौह
मुदा एके टा सब्द ग्रहण लगायल बसल घर के ओ जरायल
हरियर गाछ जेना ..................................................
२)सोचालाऊ चलब प्रेमक गारी पर पवित्र प्रेम के ओही सबारी पर
करैत रही हम प्रेम जिनका स ओहो करैत छलीह हमरा स
हंसी - हंसी कहैथ छलीह ओ प्रितक बाट जिनगी भरी नहीं छोरब साथ
नहीं जानी कोना देबा आगि लगाओल अपन आगि में हमर प्रेम जरयाल
हरियर गाछ जेना ............................................................
३)कोना भ गेलीह ओ एहन निठोहर जेना हरयाल राखल धरोहर
प्रितक आई भ रहल अछि हर गुज - गुज जग भरी पसरल अन्हार
नहीं मुहं घुमा अहाँ जाऊ आई एक बेर करू अपन मुहं स हमर बराई
बोली सुनक लेल अछि मों ललायल शरीर त्यजन के लेल अहि प्राण औनायल
हरियर गाछ जेना ................................................................
४)कर जोरी बिनती करैत छि हम अहांक रूप में नजिर आबे छि हम
अपना ह्रदय के रखाब नुका क ओहिमे हमरा अहाँ बसा क
जित जायब दुनिया के जंग देखैत दुनिया भ जायत दंग
अहांक सुन्दरता देख क चंदो लाजयल रही ख़ुशी जिनगी भरी इ कही रहल अछि अभागल
हरियर गाछ जेना ..................................................................................