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जी तोरि करू प्रयाश सब कियो,सफलता केर करू जुनी आस,
चित मन - तन एकाग्र बना कासब कियो करू निरंतर प्रयाश,
मेहनत करू भरपूर सब कियो, धयान लगा इश्वर केर पास,
दिन दुनिया बदलबे करतै, आयत सफलता अहूँ के पास,
जी तोरि..................
प्रागतिक राह बर कठिन होइत छैक, देखब परत अदम्य सहाश,
डेग - डेग पर सभ बाधक बनत, कांट सन नज़ैर आयत घाश
मन में राखी बिश्वास अटूट, छुबा के करू चाँद केर प्रयाश,
जी तोरि..................
मानब तन ज अहाँ पेलौ, दुःख स लराई में रखु बिश्वास,
जीवन में ज संघर्ष नही हो त कोना करब सफलता केर आश,
बिन संघर्शे कहियो नही चिखब सफलता सन मधु केर मिठाश,
जी तोरि................
कर्तब्यबान निष्टाबान banik सब कियो karu निरंतर प्रयाश
maan badhau mithila के sause, kahal jayat ekro सफलता केर प्रयाश,
ललित अहाँ chhi mithila केर gaurab, अहाँ पर अच्छी mithila केर आश,

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  1. hi.. just dropping by here... have a nice day! http://kantahanan.blogspot.com/

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  2. बिन संघर्शे कहियो नही चिखब सफलता सन मधु केर मिठाश,
    जी तोरि...


    Ekdam saty bat achhi Lalitji....
    Ahina Mithila aa Maithili ke lel likhait rahu...

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  3. ललितजी हम अहाँक सभ रचना पढलो अहाँक लेखनिक एक अलगे अंदाज अछि ! अहिना माँ जननी, माँ मिथिलाक लेल लिखैत रहू ....


    हमर शुभ - कामना अछि ....
    अमरकांत झा

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