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मनोज झा मुक्ति
देश पूर्णतया भ्रष्‍टाचारक दलदलमे जकड़ागेल अछि । नेपालकलेल भ्रष्‍टाचार कोनो नयाँ बात नहिं अछि
, मुदा जन आन्‍दोलन दूक बाद देशमे भ्रष्‍टाचारक बाढ़िए जकाँ आबिगेल अछि । भ्रष्‍टाचारक एहि बाढ़िमे कर्मचारीसब मालामाल भऽ रहल अछि । ओना व्‍यापारी, पत्रकार, नेता आ देशक प्रायः निकाय एहि सँ अछुत नहिं रहल अछि, जेकरा जतऽ भेटैत अछि ओतहि लुटऽमे लागल अछि । भ्रष्‍टाचारक एहि बाढ़िमे बहुत मुश्‍किलसँ एकाध गोटे इमान्‍दार मनुख्‍ख भेटत, जकरा आजुक भ्रष्‍टाचारक माहौलमे बुड़िबकके संज्ञा भेटैत अछि ।

मधेश आन्‍दोलनकबाद मधेशमे जौं सभसँ बेसी फाइदा भेटल अछि त मधेशी कर्मचारीके । मधेशीक नामपर ओसब ब्रम्‍हलुट मचौने अछि । मधेश आन्‍दोलन आ तकराबादसँ दिनदुगुन्‍ना आ राति चौगुन्‍नाक हिंसावसँ खुजल शसस्‍त्र समूहक डरसँ मधेशक कार्यालयमे रहल अधिकांश पहाड़ी मूलक कर्मचारी अपन अपन सरुवा कराबिलेलक आ मधेशक कार्यालय सबमे स्‍थानिय मधेशी मूलक कर्मचारीके भ्रष्‍टाचारक नदि समुद्रमे परिणत भऽगेल । मधेशक कार्यालय सबहक हालति एतेक नाजुक भऽगेल अछि कि कर्मचारी खुलेआम घुस माँगिरहल अछि आ केओ किछु कहऽ नहि सकैया । कोनो जनता जौं किछु कहओ त कोनो ने कोनो दलक नेता आ ओहि कर्मचारीक अपन जातिपातिक लोक लाठी उठालैत अछि, जे भ्रष्‍टाचारक खेतीमे मलजलक काज कऽ रहल अछि । किछु जनता त घुस द कऽ आओर एकरा बढावा दऽ रहल अछि जल्‍दी जल्‍दी काज करेबाकलेल/अनैतिक काज करेबाकलेल, त अधिकांश जनता घुस देबाकलेल बाध्‍य भऽगेल अछि ।

भ्रष्‍टाचार कतेक चरम सीमापर पहुँच गेल अछि आ कोना खुलेआम भऽ रहल अछि तकर एकगोट उदाहरण महोत्तरी जिल्‍लाक जलेश्‍वर स्‍थित मालपोत कार्यालयक रवैयासँ देखल जाऽसकैय ।

मधेशमे रहल महोत्तरी जिल्‍लाक मालपोत कार्यालय सेहो मधेश आन्‍दोलनकवाद मधेशी कर्मचारीद्वारा खुलेआम लुटारहल अछि । मधेश आन्‍दोलन पश्‍चात महोत्तरीक मालपोत कार्यालय कामचलाउ रुपमे एकटा सुव्‍बाके सहारे चलि रहल अछि, ओहिना जेना राम भरोसे हिन्‍दू होटल । अखन महोत्तरी मालपोतक हाकिम बनल छथि मधेशीक नामपर मधेशीके लुटनिहार, कानूनी ज्ञानसँ अनभिज्ञ, कहुनाक सुव्‍बा बनल लाल देव राय । जे जनता पाइ नहि दैत अछि तकरा एतेक ने नियम कानून देखवऽ लगैत छथिन्‍ह जे जनता परेशान भऽजाइत अछि । कहबी जे छैक बन्‍दूक पकड़ा देलापर हवल्‍दार बनि जाइत छै सैह बातक प्रत्‍यक्ष उदाहरण बनल छथि लाल देव राय । मधेशीक नामपर हाकिम बनल कानूनक अक्षर नईं जनने आ पैघ कानुञ्‍चीके दावा कएनिहार लाल देव रायके कानूनी सल्‍लाहकार बनल अछि महोत्तरी मालपोतक खरिदार.......।

महोत्तरी जिल्‍ला मालपोतमे घुसक वर्णन करैत गा.वि.स. हाथीलेटके युवा पिताम्‍वर महतो कहलनि,‘हम काज कराबऽ मालपोतमे गेलहु त काज एकदिनमे नहिं भेल । दोसर दिन जहन ११/१२ बजे गेलहुँ त काज भेलाकवाद कार्यालयक खरिदार पदमे कार्यरत कर्मचारी सुशील ठाकुर भोरे भेलाक नाते नीकेसँ बोहनी करेबाक लेल कहलथि । एक्‍कहिटा सुशिल ठाकुर नहिं प्राय ः सब कर्मचारिक इहे रबैया ओतऽ देखवामे आओत ।

पंक्‍तिकार स्‍वयं एकटा काज लऽ कऽ एभिन्‍यूज महोत्तरी सम्‍वाददाता कमलेश मण्‍डलक संग महोत्तरीक मालपोतमे पहुँचल छल, एकटा कागज लेवाक छल हमरा सबके । जहन कागज भेटिगेल त ओतहिके कर्मचारी तेजनारायण झा अखनधरि बोहनी नहि भेल बात कहैत पाई मांगि बैसलाह । एतवे नहिं प्रायः सब टेबुलपर बिना बोहनी आ दक्षिणा देने कोनहुँ काज नहिं भऽ सकैय । कर्मचारीसब एनाकऽ पाइ मंगैत अछि जेना हूनक बाबु/बाबा पूँजी फँसाबिकऽ कोनो व्‍यापार/व्‍यवसाय कऽदेने होय । किछु कर्मचारी त हे एतवा कममे घाटा लागि जेतैक सन बात कहऽमे सेहो पाछा नई हटैत अछि । ई सऽब किछु जनितो सरकारी संयन्‍त्र मौन अछि, किया त ओहो भ्रष्‍टाचारमे लिप्‍त अछि ।

जखन एहि घुसक सन्‍दर्भमे कार्यालयक प्रमुख बनल सुव्‍वा लाल देव राय सँ पुछलगेल त ओ कहलथि ई घुसक बात सर्वथा मिथ्‍या अछि, अखनधरि केओ सिकायत नहिं केलक अछि । हम अपने सँ भरिदिनमे २ बेर निचा सँ उपर अनुगमन करैत छी । जौं घुस लैत देखि लेलियैक त हम अवश्‍य कारवाही करबैक । हूनका जहन हमसब अपनासबसँ माँगल बात कहलियैन त कहलथि,‘आहाँके तखने ने कहबाक चाही, अखन किया कहैत छी ।

जलेश्‍वर स्‍थित महोत्तरी मालपोतक प्राँगणमे एकगोट पागलसन भेषमे टहलैत मनुख्‍खके देखवैत एकगोट लेखनदास नामनई लिखवाक शर्तपर कहलथि जे काल्‍हि सातबजे रातिमे एहि पागलके जमिन हाकिमके पाइ खुवाबिकऽ दोसरगोटे अपना नामपर लिखबा लेलकैक । ओ ई कहलथि जे लाल देव जी ठीके कहलथि जे हम २ बेर अपने नीचा उपर जाकऽ निरीक्षण करैत छी । ओ दूइए बेर नहि ५/७ वेर नीचा सँ उपर सभ रुममे चक्‍कर लगवैत रहैत छथि जे साँझमे कोनो कर्मचारी ई नहि कहए जे हमरा आई कमे पाई भेल । ओ ई देखवालेल जाइत रहैत छथि जे ककरा टेवुलपर कतेक पाई झरि रहल अछि । कतौ हमरासँ बेइमानी त नहि भऽ रहल अछि ?

मधेशक कार्यालयसबमे मधेशी कर्मचारीके खुलेआम भ्रष्‍टाचार रोकबाकलेल केओ तैयार नहि अछि । जे एक/दू गोटा एकर विरोध करैत अछि तकर काज नहिं भऽ सकैय । कानून निरीह बनल अछि, जौं आक्रोशित किछु युवा अधैर्य भऽकऽ ओहन कर्मचारीके पिटैत अछि त सम्‍पूर्ण कार्यालयक कर्मचारी लगायत देशव्‍यापी रुपमे कर्मचारी सबहक आन्‍दोलन शुरु भऽ जाइत अछि । कर्मचारी जाहि जातिक अछि ओ जातिक व्‍यक्‍ति/सँघ संस्‍था/नेता ओकरा पक्ष लऽ कऽ बाजब/नारा जुलुश करबाक शुरु कऽ दैत अछि ।

घुसक खेती कतेक बढ़ल अछि एकर अन्‍दाजा एकटा खरिदार/मुखिया/सुव्‍वा सनसन कर्मचारीके आलिशान महल देखिकऽ लगाओल जाऽसकैय । जहन कि मात्र नोकरीक भरोसे इमान्‍दारिताक पाईसँ अपना सम्‍पूर्ण जीवनक कमाईसँ एकटा अधिकृत या फस्‍टक्‍लाश अफिसर नीक दूतल्‍ला घर अपना तलवसँ नहि बनावऽ सकैय । मुदा बाजत के ? आब देखबाक ई अछि जे के नेपाल मायक कोन बेटा आगा बढैत अछि भ्रष्‍टाचार आ भ्रष्‍टाचारीके समाप्‍तीक रास्‍तापर....।

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