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भ्रष्टाचार अँहिक खूरक प्रतापे
दुराचार अँहिक खूरक प्रतापे


लोक पढ़ैए जान अरोपि कए
मुदा बेकार अँहिक खूरक प्रतापे


जनबल- धनबल आरो बल-बल
सरकार अँहिक खूरक प्रतापे


इद्धुत-विद्धुत सभटा फेल करबै की
अन्हार अँहिक खूरक प्रतापे


हाथ मिलाउ गरा लगाउ तैओ सभ
अनचिन्हार अँहिक खूरक प्रतापे

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  1. प्रयास निके अछि...मुदा इ रचना के ग़ज़लक संज्ञा देबि उचित नै!

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  2. वत्स जी,
    ई कविता छै या जे भी छै, मुदा ग़ज़ल नै छै। ग़ज़लक अपन शास्त्र होय चै, अपन व्याकरण, अपन छंद होय छै...

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  3. हम गौतम जीक गप्प सँ पू्र्ण सहमत छी जे गजलक शास्त्र होइत छैक, व्याकरण आ छंद होइत छैक। मुदा कोन शास्त्र, व्याकरण आ छंद छैक से गौतम जी खुलि कए नहि कहि रहल छथि। मैथिली मे बड़का विडंबना छैक जे कोनो गप्प के त लोक काटि दैत छैक मुदा ओ तर्क पर आधारित नहि रहैत छैक। हम गौतम जी सँ ई आशा करैत छी जे ओ हमरा लोकनि के एही ब्लागक माध्यमे गजलक शास्त्र, व्याकरण एवं छंदक जानकारी देताह । कम सँ कम एहि बहन्ने मैथिली गजलक स्वरूप त निर्धारित हेतैक। उत्तरक आशा मे बाट जोहैत-----------------

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  4. हम मैथिल छि...मैथिली जनै छि...मैथिली बजै छि, मुदा लिखबा म तनिक कष्ट हो ऐछि। हम अपने ग़ज़लक छात्र छि आ ग़ज़ल कहब सीख रहैल छि....कनिक-मनिक पहिचान बनल अछि से कि किछ ग़ज़ल सब हिंदी के पत्रिका सब म छपि गेल....हमरा मुन त बड भ रहल ऐछ कि गज़ल छंद आ शास्त्र आ व्याकरण स जुड़ल जानकारी जतबा हम जनि छि तकरा साझा करु....कोशिश करब निकट भविष्य म....

    आशिष जी स विनति कि हमर बात के अन्यथा नै लेता....

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