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नढियाँ – खढियाँक कहानी

एकटा छलै नढिय़ाँ, एकटा छलै खढियाँ। दुनू गोटे में बड नीक दोस्ती छलै। दुनू गोटेक खाना संगेक में बने छलै। दुनू सभ दिन नीक-नुकून खाएक छलै। एक दिन दुनूक ईच्छा भेल जे आए खीर खायल जाए। सँ दुनू मिलकेर खीर सामग्री आनलक ओर दुनू मिलकर खीर बनोलक खीर बनलाक बाद नढियाँ कहलक जे आबि खीर परोसु तँ खढियाँ छलै बड तेज से खढियाँ कहलक जे हम दुनू गोटे बड नीक सँ खीर बनोले छलौ से दुनू गोटे चलु नहायक लेल नहायक बाद दुनू गोटे मिलकर खीर खायब नढियाँ कहलक ठीके कहै छलै। चलु नहायक बाद खीर खायब सँ दुनू गोटे गेल नहायक लेल पोखेर गेल। दुनू गोटे पानी केर अंदर गेल तँ खढियाँ पानी केर अंदरे-अंदर अपन घर पँहुच केर सभटा खीर खाय लेलक ओर वैह खीरक बर्त्तन में पैखाना करि देलक। ओर उ बर्त्तनक ढक्कन वैह ना राखि देलक जैहना पहिले सँ राखल छलै। फेर पानी केर अंदरे-अंदर पोखरि के अंदर पँहुचि गेल जतै नढियाँ पहिले सँ नहाय रहल रहै। फेर खढियाँ कहलक चलु आब खायक लेल। फेर दुनू गोटे घर पँहुचल तँ खढियाँ कहलक नढियाँ सँ अहाँ खीर परोसु बड जोर सँ भुख लागल अछि। नढियाँ गेल बर्त्तनक ढक्कन जैहना हटैलक तँ नढियाँ केर होंशि उडि गेल ओर ओकरा बड जोरक गुस्सा आएल सँ नढियाँ कहलक खढियाँ सँ ऎना कोना भेल, ऎना के कयलक। वैह दिन सँ नढियाँ – खढियाँक दोस्ती टुट गेल जे आइ धरि तक नहि जुटल अछि।

आशिष चौधरी गाम – चरैया, जिला -= अररिया।

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