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किसानक कहानी

एकटा किसान ओर किसानक कनियाँ छलै। किसानक शादी केर बहुत दिन बीतल लेकिन किसानक कनियाँ केर बाल-बच्चा नहि होबैत छलाह। दुनू गोटे ई बात लक बड परेशान रहैत छलाह। बहुत मन्नत माँगेक केर बाद किसानक कनियाँ केर एकटा बेटा भेल जकर नाम सौरभ राखलक। जे कुछ दिनक बाद बीमार पडल, ओर फेरो बाद में मरि गेल। ई बात सँ किसान ओर किसानक कनियाँ बड दुःखी रहै छलै। एक दिनक बात अछि एकटा साधु-महात्मा किसानक घर आएल ओर किसानक कनियाँक केर कहलक जे अहाँ चिंता नहि करू अहाँक चारिटा बेटा होएत, लेकिन ओकर सभक नाम अहाँक बिगाडि के राखय पडैत अगर अहाँ ऎना नहि करब तँ अहाँ केर बेटा फेर नहि बचत। ई गप्प पर किसान कहलक बाबा अहाँ जे कहलो हम दुनू गोटे वैह करब हम अपन बेटा केर नाम बिगाडि केर राखब। सँ साधु बाबा ठीके कहलक छलै जे अहाँ केर चारिटा बेटा हैत। किसानक कनियाँक एक-एक करि चारिटा बेटा भेल जकर नाम किसान ओर किसानक कनियाँ दुनू गोटे मिलकेर नाम राखलक। पहिल केर नाम छलै- ‘टुटल’, दोसेर केर नाम छलै- ‘सडल’, तेसिर केर नाम छलै- ‘फाटल’ ओर चारिम केर नाम छलै- ‘पंक्चर’। किसानक चारो बेटा जब पैघ भेल तँ किसान ओर किसानक कनियाँ बड चिंता होबे लागल जे एकर सभक बियाह कोना हैत। कुछ दिनक बाद एकटा लडकी बला किसानक घर पर आयल तँ किसान कँ लागल जे आब हमर बेटा सभक बियाह भ जाएत। से किसान अपन पहिल बेटा केर आवाज लगेलक ‘टुटल’ कुर्सी लाबु। ई बात सुनि केर लडकी बला कहलक नहि नहि हमरा सभ नहि बैठब तँ किसान कहलक एना कोना हैत अहाँ सभ मिठाई खाय लिअ ओर अपन दोसेर बेटा केर आवाज देलक ‘सडल’ मिठाई लाबु तँ लडकी बला कहलक हमरा सभक चीनीक बीमारी छलै सँ हमरा सभ मिठाई नहि खायब। तँ लडकी बला कहलक जे आबि हमरा सभ घर लेल जायब से हमरा सब के बिदा करू। किसान कहलक पहिले हम अहाँ सभक बिदाई करब तबने किसान अपन तेसिर बेटा केर आवाज देलक ‘फाटल’ धोती लाबु तँ लड्की बला के भेल ई हमरा फाटल धोती बिदाई करत से लडकी बला कहलक नहि नहिफेर आयब नहि वैह दिन बिदाई करब आय हमरा सभके बिदा करू। तँ किसान अपन चारिम बेटा जे कि सबसे छोट छलै ओकरा आवाज देलक ‘पंक्चर’ गाडी निकालु ओर हिनका सभ केर छोडि आबु। तँ लडकी बला के भेल जे ई हमरा पंक्चर गाडी में बिदा करत। सँ लडकी बला ओतए सँ भागि गेल। किसान अपन माथा पर हाथ धरि कए कहैत छलै जे आब हमर बेटा सँ बियाह के करत।

आशिष चौधरी गाम – चरैया,
जिला – अररिया।

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