गजल- आशीष अनचिन्हार - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 22 अप्रैल 2009

गजल- आशीष अनचिन्हार

गजल
गप्प जखन बिआहक चलल हेतैक

गरीबक बेटी बड्ड कानल हेतैक
गोली लागल देह दसो दिशा मे
कुशलक खोंइछ कत्तौ बान्हल हेतैक
डेग-डेग पर निद्रा देवीक प्रसार
केना कहू केओ जागल हेतैक
सड़ि गेलैक एहि पोखरिक पानि
जुग-जुगान्तर सँ नहि उराहल हेतैक
विश्वास करु समान कम नहि देत
बाटे मे बाट भजारल हेतैक