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कृष्णमोहन झा

जिलेबीक काँट जकाँ
हम अहाँक धानक लाबा सन तरबा मे गड़ि जायब
आ किछु दिन धरि बिसबिसायब

चतुर्थीक औंठी आ बरसाइतक मेहदी जकाँ
हम अहाँक विकल संसर्ग मे आयब
आ असंख्य सुग्गा बनि
अहाँक मोन मे उड़ियाएब

हम तँ फूलडालीक कनेर छी
अहाँक लौलसा मे भीजल देवता पर चढब
आ पराते
हजारो-हजार मौलायल फूलक संगे
नहि जानि कोन धार-पोखरि मे विलीन भ’ जायब!




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  1. भाइ अहाँक कविता तँ रटि कए सोचैत छी, सुग्गा बना लेलहुँ अहाँ हमरा, अहाँक कविता संग जे फोटो सेलेक्शन अछि सेहो बड्ड नीक रहैए।

    आ किछु दिन धरि बिसबिसायब
    अहाँक मोन मे उड़ियाएब
    नहि जानि कोन धार-पोखरि मे विलीन भ’ जायब!

    तीन पैराग्राफक ई नीन टा नूतन अंत, बड्ड नीक लागल ।

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  2. vivahak teen vidhik prateek ekta bis bisbait , ekta aakansha bani mon me uriyabait aa tesar vilin hoit, ee teenoo bimb bad nik.

    ehi blog par kahiyo ee nahi hoi ye je aabi aa kono nav rachna nahi padhbak lel bhetay, sabh rachna eke starak hoy se te sambhavo nahi chhaik, se krishnamohan ji ahan regular etay post karait rahi se aagrah,

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  3. bad nik bhai ji

    जिलेबीक काँट जकाँ
    हम अहाँक धानक लाबा सन तरबा मे गड़ि जायब
    आ किछु दिन धरि बिसबिसायब

    चतुर्थीक औंठी आ बरसाइतक मेहदी जकाँ
    हम अहाँक विकल संसर्ग मे आयब
    आ असंख्य सुग्गा बनि
    अहाँक मोन मे उड़ियाएब

    हम तँ फूलडालीक कनेर छी
    अहाँक लौलसा मे भीजल देवता पर चढब
    आ पराते
    हजारो-हजार मौलायल फूलक संगे
    नहि जानि कोन धार-पोखरि मे विलीन भ’ जायब

    sampoorna kavita vilakshana bani paral achhi

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  4. hamar ratuka duty saphal bhay gel ahank kavita padhi ke bhai krishnamohan ji,


    aab bin coffy pine ninn nahi aaeta, sphoorti aani delahu

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  5. mon aanandit kelahu, katek gaheer soch achhi ahank, hamra sabh ke te phuraite nahi achhi

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  6. bad nik kavita, hriday sparsh karay bala, mon me suga bani ghumray bala

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  7. नहि जानि कोन धार-पोखरि मे विलीन भ’ जायब!

    bhavnak ee uphan ahi ta me achhi krishnamohan ji

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  8. bad nik lagal, gun dhun kay rahal chhi je kon rahasya acchi ehi kavita me

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  9. ehi blog par ahank teen ta tin tarahak kavita padhlahu jahi me ekta common chiz chhal,

    utkrishtata

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  10. हम तँ फूलडालीक कनेर छी
    अहाँक लौलसा मे भीजल देवता पर चढब

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  11. भाइ अपनेक रचना पढ़ल, शुरुआत नीक मुदा बिच्चे मे कने -----
    जेना की-----------
    १) जे नेता धोती पहिरत सएह देशी होएत। हमरा बुझने असंभव। कोट- पैंट पहिरि कए सेहो देशक हित कएल जा सकैत छैक।

    आर सभ नीक
    धन्यवाद

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  12. उपरोक्त टिप्पणी " केदन पुछैइ"( मनीष झा बौआ भाइ) लेल कएल गेल अछि। असावधानी वश इ टिप्पणी कृष्ण मोहन झाक कविताक लेल भए गेल , जाहि लेल हम दूनू कवि एवं पाठक सँ क्षमा मगैत छी।

    ध्नवाद (आशीष अनचिनहार)

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  13. Bhai ji ahank kavita padhi sochni rog lagi gel achhi,

    bhavnatmak bana dait chhi hamro san lok ke ahan

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  14. अपने सभक आभारी छी।
    आशा अछि जे अहिना अपने सभक सहयोग
    भेटैत रहत।

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