सम्बन्ध - श्यामल सुमन - जमशेदपुर - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

सम्बन्ध - श्यामल सुमन - जमशेदपुर

सम्बन्ध


साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।

वेदना हम ह्रदय के सुनाबैत छी॥



कहू माताक आँचर मे की सुख भेटल।

चढ़ते कोरा जेना सब हमर दुःख मेटल।

आय ममता उपेक्षित कियै रति-दिन,

सोचि कोठी मे मुंह कय नुकाबैत छी।

साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।

वेदना हम ह्रदय के सुनाबैत छी॥



खूब बचपन मे खेललहुं बहिन-भाय संग।

प्रेम साँ भीज जाय छल हरएक अंग-अंग।

कोना सम्बन्ध शोणित कय टूटल एखन,

एक दोसर के शोणित बहाबैत छी।

साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।

वेदना हम ह्रदय के सुनाबैत छी॥



दूर अप्पन कियै अछि पड़ोसी लगीच।

कटत जिनगी सुमन के बगीचे के बीच।

बात घर घर के छी इ सोचब ध्यान साँ,

स्वयं दर्पण स्वयं के देखाबैत छी।

साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।

वेदना हम ह्रदय के सुनाबैत छी॥




श्यामल सुमन, प्रशासनिक पदाधिकारी टाटा स्टील, जमशेदपुर - झारखण्ड,