आइबे रहल ऐच्छ फगुआ याऊ - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 23 फ़रवरी 2008

आइबे रहल ऐच्छ फगुआ याऊ


गेल जाड़ मांस के कंपकंपी,
कूदू फान्दू बउवा येऊ,
मादक हवा कही रहल ऐच्छ,
आइबे रहल आइछ फगुवा यौ ॥

रंग-अबीर सं चमकत अंगना,
बल्जोरी के जोर चालत,
दू गिलास भांग के बाद,
बीस ता मल्पूआ यौ॥

नाक-भों जे कियो चढायब,
या की रंग पैइन सं घब्रायब,
जे करतेई बेसी लतपत,
रंग सं भ जीते थौवा यौ..

गोर्की भौजी, छोटका बउवा,
पहिरू पूर्ण अंगा, पुरना नुवा,
रंग-अबीर पोलिस सं,
सब गोते लागब कौवा यौ॥

बड नीक ई पाबैइन आइछ,
सबके मोंन के भाबैईत ऐच्छ,
एके रंग मैं सब रंगेतय ,
के धनीक, के बिल्तौवा यौ॥

फगुवा के यह मज़ा त छाई ,
तैयारी के ने आवश्यकता छाई,
रंग पैइन दुनु छाई सस्ता,
नई खर्चा हित दहौउअया यौ॥
फगुवा के तैयारी करू...