मधुबनी/ मिथिला/ मैथिल चित्रकलाक निरर्थक विवाद : डॉ. कैलाश कुमार मिश्र - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 11 दिसंबर 2017

मधुबनी/ मिथिला/ मैथिल चित्रकलाक निरर्थक विवाद : डॉ. कैलाश कुमार मिश्र

मधुबनी। 11 दिसम्बर। हमरा लोकनि व्यर्थक विवादमे बड्ड मोन लगेने रहैत छी। बहुत विवाद एहन होइत अछि जकर कुनो जरूरत नहि। समस्याक समाधान दिस ताकब अधिक उचित। एहने एक विवाद अछि मिथिला चित्रकलाक नामकरण। कतेक लोकक सोचब छनि जे मधुबनी नाम देनाई उचित नहि।

हमर विचार किछु आरो अछि। बंगाल मे एक पेंटिंग छैक जकरा "कालीघाट" पेंटिंग कहल जाइत छैक। ओना त ई पेंटिंग अंग्रेजक भारत मे एलाक बाद ओकरे कॉपीक प्रथासँ समस्त बंगाल मे शुरू भेलैक मुदा काली मंदिर लग भक्त सभ ओकरा किनैत छलैक त ओहि मे बहुत तरहक प्रयोग करैत ओकर बिक्रीक प्रथा प्रारम्भ भेलैक। ताहिं एकर नाम "कालीघाट" पेंटिंग भ' गेलैक। 

दोसर उदाहरण कोल्हापुरी चप्पलक अछि। ई चप्पल कोल्हापुर जिला त कोन कहैत अछि, महाराष्ट्र प्रदेश तक मे नहि बनैत अछि। जतय ई बनैत अछि ओ जगह आव कर्नाटक मे छैक। लेकिन तांहि सँ एहि पर कोनो प्रभाव नहि पड़ैत छैक।

तहिना ई सत्य छैक जे मिथिला पेंटिंग कोहबर घर लिखब, रँगब, ढोरब, ठाँव, अरिपन आदिक रूप मे कनि मनि स्थानीय अन्तरक सँग समस्त मिथिला क्षेत्र मे लोक कला अथवा अनुष्ठानिक कलाक रूप मे महिला वर्ग द्वारा बनाएल जाइत रहल अछि। अंग मे लोक एकरा मंजुसा कहैत छथि। ओतय केर लिखना मे कनिक छोरगर धरगर स्वरूप होइत छैक मुदा बिम्ब, आ विधान लगभग एकहि रंग। कायस्थ सभ कनि कछनी दिस अधिक त हरिजन सभ चहटगर रंगक बिम्बक प्रयोग करैत छथि। 

अहिमे किछु पुरुख आबि अनेरे एकर व्यकारण आ गणित निर्धारणक काज करबाक चेष्टा करैत छथि जकरा प्रतिपादित करबा लेल परम्परागत सँ आधुनिक विद्वान सभ लागल रहैत छथि। कथा आ सिद्धान्त गढ़ैत रहैत छथि। 

आब बात मधुबनी/ मिथिला चित्रकलाक नाम पर विवाद जे चलि रहल अछि ताहि पर करी।

अजुका जे मिथिला चित्रकारिक स्वरूप देखैत छी ओ पूर्णरूपेण आधुनिक आ व्यवसायिक कला अछि। एहि मे एक शैली के क्षद्म रूप मानि लोक अपन सोच आ कल्पनाशीलताक हिसाबे या ग्राहकक माँगक हिसाबे प्रयोग करैत रहैत अछि। बाजारू कलाक रूप मे एकर प्रारम्भ रोजगार देबाक उद्देश्य सँ सर्वप्रथम मधुबनी सँ भेल तांहि ई मधुबनी चित्रकलाक नाम सँ विख्यात भ' गेल। एहि सँ कलाक स्वरूप अथवा अखिल मिथिला क्षेत्रक चरित्र पर कोनो अंतर नहि पड़ैत अछि। ई समस्त मिथिलाक कला थिक। अगर एकर नाम पटना, राँची अथवा दिल्ली चित्रकला रहैत त गलत छलैक। कारण ई क्षेत्र सब मिथिला सँ बाहर अछि। मधुबनी त' मिथिलाक एक क्षेत्र अछि। एकरा एना परिभषित कएल जा सकैत अछि :"चित्रकारीक एहेन लोक कला जे ओना त मधुबनी, अर्थात मिथिलाक एक जिलाक नाम सँ विख्यात अछि मुदा समस्त मिथिला आ दुनियाक कोनो क्षेत्र मे रहय बला मैथिल समुदाय द्वरा बनेबै बला कला अछि"।

अगर नामकरण पर जाइ त मिथिला चित्रकला सेहो दोषपुर्ण नाम अछि। कारण भारतक मिथिला, नेपालक तराई के लोकक अतिरिक्त मैथिल सभ जे सैकड़ों साल सँ छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश आदि जगह मे रहि रहल छथि सेहो एहि कला के बनबैत छथि, एकरा शाश्वत रखने छथि। ताहि हिसाबे एकर नाम #मैथिलचित्रकला हेबाक चाही। 

मुदा ई सब निरर्थक आ समय जियान करयबला बात थिक। एहि विवाद सँ ऊपर उठैत एकर विकास आ कला सँ जुड़ल लोकक कल्याण पर सोचनाई जरूरी।