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१.मैथिली हैकू आ २.ज्योतिरीश्वर/ विद्यापति/ चतुर चतुरभुज/ गोविन्ददास/ बद्रीनाथ झा शब्दावली

१.मैथिली हैकू

हैकू सौंदर्य आ भावक जापानी काव्य विधा अछि, आ जापानमे एकरा काव्य-विधाक रूप देलन्हि कवि मात्सुओ बासो १६४४-१६९४। एकर रचनाक लेल परम अनुभूति आवश्यक अछि। बाशो कहने छथि, जे जे क्यो जीवनमे ३ सँ ५ टा हैकूक रचना कएलन्हि से छथि हैकू कवि आ जे दस टा हैकूक रचना कएने छथि से छथि महाकवि। भारतमे पहिल बेर १९१९ ई. मे कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर जापानसँ घुरलाक बाद बाशोक दू टा हैकूक शाब्दिक अनुवाद कएले रहथि।



पुरनोपुकुर
व्यंगेरलाफ
जलेर शब्द



पचाएडालि
एकटा के

शरत्काल।

हैकूक लेल मैथिली भाषा आ भारतीय संस्कृत आश्रित लिपि व्यवस्था सर्वाधिक उपयुक्त्त अछि। तमिल छोड़ि शेष सभटा दक्षिण आ समस्त उत्तर-पश्चिमी आ पूर्वी भारतीय लिपि आ देवनागरी लिपि मे वैह स्वर आ कचटतप व्यञ्जन विधान अछि जाहिमे जे लिखल जाइत अछि सैह बाजल जाइत अछि। मुदा देवनागरीमे ह्रस्व 'इ' एकर अपवाद अछि, ई लिखल जाइत अछि पहिने, मुदा बाजल जाइत अछि बादमे। मुदा मैथिलीमे ई अपवाद सेहो नहि अछि- यथा 'अछि' ई बाजल जाइत अछि अ ह्र्स्व 'इ' छ वा अ इ छ। दोसर उदाहरण लिअ- राति- रा इ त। तँ सिद्ध भेल जे हैकूक लेल मैथिली सर्वोत्तम भाषा अछि। एकटा आर उदाहरण लिअ। सन्धि संस्कृतक विशेषता अछि? मुदा की इंग्लिशमे संधि नहि अछि? तँ ई की अछि- आइम गोइङ टूवार्ड्सदएन्ड। एकरा लिखल जाइत अछि- आइ एम गोइङ टूवार्ड्स द एन्ड। मुदा पाणिनि ध्वनि विज्ञानक आधार पर संधिक निअम बनओलन्हि, मुदा इंग्लिशमे लिखबा कालमे तँ संधिक पालन नहि होइत छैक , आइ एम केँ ओना आइम फोनेटिकली लिखल जाइत अछि, मुदा बजबा काल एकर प्रयोग होइत अछि। मैथिलीमे सेहो यथासंभव विभक्त्ति शब्दसँ सटा कए लिखल आऽ बाजल जाइत अछि।

जापानमे ईश्वरक आह्वान टनका/ वाका प्रार्थना ५ ७ ५ ७ ७ स्वरूपमे होइत छल जे बादमे ५ ७ ५ आऽ ७ ७ दू लेखक द्वारा लिखल जाए लागल आ नव स्वरूप प्राप्त कएलक आ एकरा रेन्गा कहल गेल। रेन्गाक दरबारी स्वरूप गांभीर्य ओढ़ने छल आ बिन गांभीर्य बला स्वरूप वणिकवर्गक लेल छल। बाशो वणिक वर्ग बला रेन्गा रचलन्हि। रेन्गाक आरम्भ होक्कुसँ होइत छल आ हैकाइ एकर कोनो आन पंक्त्तिकेँ कहल जा सकैत छल। मसाओका सिकी रेन्गाक अन्तक घोषणा कएलन्हि १९म शताब्दीक प्रारम्भमे जा कए आ होक्कु आ हैकाइ केर बदलामे हैकू पद्यक समन्वित रूप देलन्हि। मुदा बाशो प्रथमतः एकर स्वतंत्र स्वरूपक निर्धारण कए गेल छलाह।

हैकू निअम १.
हैकू १७ अक्षरमे लिखू, आ ई तीन पंक्त्तिमे लिखल जाइत अछि- ५ ७ आ ५ केर क्रममे। अक्षर गणना वार्णिक छन्दमे जेना कएल जाइत अछि तहिना करू।
'विदेह' http://www.videha.co.in/ अंक २ रचना लेखन स्तंभमे वार्णिक छन्दक वर्णन क्रममे हम लिखने रही जे संयुक्त्ताक्षरकेँ एक गानू आ हलन्तक/ बिकारीक/ इकार आकार आदिक गणना नहि करू। तकरा एतय
पुनः प्रस्तुत कए रहल छी।
साहित्यक दू विधा अछि गद्य आ पद्य।छन्दोबद्ध रचना पद्य कहबैत अछि-अन्यथा ओ गद्य थीक। छन्द माने भेल-एहन रचना जे आनन्द प्रदान करए।

छन्द दू प्रकारक अछि।मात्रिक आ वार्णिक। वेदमे वार्णिक छन्द अछि।

वार्णिक छन्दक परिचय लिअ। एहिमे अक्षर गणना मात्र होइत अछि। हलंतयुक्त अक्षरकेँ नहि गानल जाइत अछि। एकार उकार इत्यादि युक्त अक्षरकेँ ओहिना एक गानल जाइत अछि जेना संयुक्ताक्षरकेँ। संगहि अ सँ ह केँ सेहो एक गानल जाइत अछि।द्विमानक कोनो अक्षर नहि होइछ।मुख्य तीनटा बिन्दु यादि राखू-



1.हलंतयुक्त्त अक्षर-0

2.संयुक्त अक्षर-1

3.अक्षर अ सँ ह -1 प्रत्येक।



आब पहिल उदाहरण देखू

ई अरदराक मेघ नहि मानत रहत बरसि के=1+5+2+2+3+3+1=17 मात्रा



आब दोसर उदाहरण देखू

पश्चात्=2 मात्रा



आब तेसर उदाहरण देखू

आब=2 मात्रा



आब चारिम उदाहरण देखू

स्क्रिप्ट=2 मात्रा



मुख्य वैदिक छन्द सात अछि-गायत्री,उष्णिक् ,अनुष्टुप् ,बृहती,पङ् क्त्ति,त्रिष्टुप् आ जगती। शेष ओकर भेद अछि अतिछन्द आ विच्छन्द। छन्दकेँ अक्षरसँ चिन्हल जाइत अछि। यदि अक्षर पूरा नहि भेलतँ एक आकि दू अक्षर प्रत्येक पादमे बढ़ा लेल जाइत अछि।य आ

व केर संयुक्ताक्षरकेँ क्रमशः इ आ उ लगा कय अलग केल जाइत अछि।जेना-

वरेण्यम्=वरेणियम्

स्वः= सुवः

गुण आ वृद्धिकेँ अलग कयकेँ सेहो अक्षर पूर कय सकैत छी।

ए= अ + इ

ओ= अ + उ

ऐ= अ/आ + ए

औ= अ/आ + ओ



हैकू निअम २.

व्यंग्य हैकू पद्यक विषय नहि अछि, एकर विषय अछि ऋतु। जापानमे व्यंग्य आऽ मानव दुर्बलताक लेल प्रयुक्त विधाकेँ "सेर्न्यू" कहल जाइत अछि आ एहिमे किरेजी वा किगो केर व्यकरण विराम नहि होइत अछि।

टिप्पणी: "सेनर्यू"मे किरेजी नै होइ छै आ एकरामे प्रकृति, चान सँ आगाँ हास्य-व्यंग्य होइ छै। मुदा एकर फॉर्मेट सेहो हाइकू सन 5/7/5 सिलेबलक होइ छै। जापानी सिलेबल आ भारतीय वार्णिक छन्द मेल खाइ छै से 5/7/5 सिलेबल भेल 5/7/5 वर्ण / अक्षर। संस्कृतमे 17 सिलेबलक वार्णिक छन्द जइमे 17 वर्ण होइ छै, अछि- शिखरिणी, वंशपत्रपतितम, मन्दाक्रांता, हरिणी, हारिणी, नरदत्तकम्, कोकिलकम् आ भाराक्रांता। तैँ 17 सिलेबल लेल 17 वर्ण/ अक्षर लेलहुँ अछि, जे जापानी सिलेबल (ओंजी)क लग अछि। किरेजी माने ओहन शब्द जतएसँ दोसर विचार शुरू होइत अछि, किगो भेल ऋतुसँ सम्बन्धी शब्द। किरेजी जापानीमे पाँतीक मध्य वा अंतमे अबै छइ आ तेसर पाँतीक अंतमे सेहो जखन ई पाठककेँ प्रारम्भमे लऽ अनै छै। हाइकू जेना दू प्रकृतिक चित्रकेँ जोड़ैत अछि एकरा संग चित्र-अलंकरण विधा "हैगा" सेहो जुड़ल अछि। जापानमे ईश्वरक आह्वान टनका/ वाका प्रार्थना ५ ७ ५ ७ ७ स्वरूपमे होइत छल जे बादमे ५ ७ ५ आ ७ ७ दू लेखक द्वारा लिखल जाए लागल आ  नव स्वरूप प्राप्त कएलक आ एकरा रेन्गा कहल गेल। बादमे यएह कएक लेखकक सम्मिलित सहयोगी विधा रेन्कुक रूपमे स्थापित भेल। हैबूनमे वर्णनात्मक गद्यक संग हाइकू(5/7/5) वा टनका/वाका (5/7/5/7/7)मिश्रित रहै छै।
हैकू निअम ३.

प्रथम ५ वा दोसर ७ ध्वनिक बाद हैकू पद्यमे जापानमे किरेजी- व्याकरण विराम- देल जाइत अछि।


हैकू निअम ४.


जापानीमे लिंगक वचन भिन्नता नहि छैक। से मैथिलीमे सेहो वचनक समानता राखी सैह उचित होएत।


हैकू निअम ५.


जापानीमे एकहि पंक्त्तिमे ५ ७ ५ ध्वनि देल जाइत अछि। मुदा मैथिलीमे तीन ध्वनिखण्डक लेल ५ ७ ५ केर तीन पंक्त्तिक प्रयोग करू। मुदा पद्य पाठमे किरेजी विरामक ,जकरा लेल अर्द्धविरामक चेन्ह प्रयोग करू, अतिरिक्त्त एकहि श्वासमे पाठ उचित होएत।


हैकू निअम ६.

हैबुन एकटा यात्रा वृत्तांत अछि जाहिमे संक्षिप्त वर्णनात्मक गद्य आऽ हैकू पद्य रहैत अछि। बाशो जापानक बौद्ध भिक्षु आऽ हैकू कवि छलाह आऽ वैह हैबुनक प्रणेता छथि। जापानक यात्राक वर्णन ओऽ हैबुन द्वारा कएने छथि। पाँचटा अनुच्छेद आऽ एतबहि हैकू केर ऊपरका सीमा राखी तखने हैबुनक आत्मा रक्षित रहि सकैत अछि, नीचाँक सीमा ,१ अनुच्छेद १ हैकू केर, तँ रहबे करत। हैकू गद्य अनुच्छेदक अन्तमे ओकर चरमक रूपमे रहैत अछि।

हमर १२ टा हैकू आऽ तकर बाद एकटा हैबून


१.वास मौसमी,

मोजर लुबधल

पल्लव लुप्ता

२.घोड़न छत्ता,

रेतल खुरचन

मोँछक झक्का

३. कोइली पिक्की,

गिदरक निरैठ

राकश थान

४.दुपहरिया

भुतही गाछीक

सधने श्वास

५.सरही फल

कलमी आम-गाछी,

ओगरबाही

६.कोलपति आऽ

चोकरक टाल,

गछपक्कू टा

७.लग्गा तोड़ल

गोरल उसरगि

बाबाक सारा

८.तीतीक खेल

सतघरिया चालि

अशोक-बीया

९.कनसुपती,

ओइधक गेन्द आऽ

जूड़िशीतल

१०.मारा अबाड़

डकहीक मछैड़

ओड़हा जारि

११.कबइ सन्ना

चाली बोकरि माटि,

कठफोड़बा

१२.शाहीक-मौस,

काँटो ओकर नहि

बिधक लेल

हैबून १

सोझाँ झंझारपुरक रेलवे-सड़क पुल। १९८७ सन्। झझा देलक कमला-बलानक पानिक धार, बाढ़िक दृश्य। फेर अबैत छी छहर लग। हमरा सोझाँमे एकठामसँ पानि उगडुम होइत झझात बाहर अछि अबैत। फेर ओतएसँ पानिक धार काटए लगैत अछि माटि। बढ़ए लगैत अछि पानिक प्रवाह, अबैत अछि बाढ़ि। घुरि गाम दिशि अबैत छी। हेलीकॉप्टरसँ खसैत अछि सामग्री। जतए आयल जलक प्रवाह ओतए सामग्रीक खसेबा लए सुखाएल उबेड़ भूमिखण्ड अछि बड़ थोड़। ओतए अछि जन- सम्मर्द। हेलीकॉप्टर देखि भए जाइत अछि घोल। अपघातक अछि डर हेलीकॉप्टर नहि खसबैत अछि ओतए खाद्यान्न। बढ़ि जाइत अछि आगाँ। खसबैत अछि सामग्री जतए पानि बिनु पड़ैत छल दुर्भिक्ष, बाढ़िसँ भेल अछि पटौनी। कारण एतए नहि अछि अपघातक डर। आँखिसँ हम ई देखल। १९८७ ई.।

पएरे पार

केने कमला धार,

आइ विशाल
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श्रीमति ज्योति झा चौधरीक इंग्लिश हैकू मैथिली अनुवाद सहित।


(1)

Illusion of eye

Colourful appearance of

Rainbow in the sky

आँखिक भ्रम,

आभास वर्णमय

पनिसोखा द्यौ



(2)

Rainbow declares

Beginning of bright days and

End of rainy ones

पनिसोखाक,

शुभ्र दिन आबह

खिचाहनि जाऽ



(3)

Filled with smoky fog

The wood seems to be burning

Thou' it is winter

धुँआ कुहेस

जेना जड़ैत काठ,

अछि ई जाड़

(4)

The words sound so sweet

imitated by parrots

Like baby babbles

गुञ्ज मधुर

सुग्गाक अभिनय,

तोतराइत स्वर

(5)

The sky is bright

The wind has cleared the clouds

Some still needs force

अकाश श्वेत

वायु टारैत मेघ,

कनेक बल

(१ सँ ५ धरि इंग्लिश हैकू श्रीमति ज्योति झा चौधरीक छन्हि आऽ एकर मैथिली अनुवाद हमरा द्वारा कएल गेल अछि।)

जनकपुर, नेपालसँ श्री धर्मेन्द्र झा "हाइकू संग्रह" निकाललन्हि। नेपालमे मैथिलीमे हाइकू लिखनिहार अन्य कवि छथि श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि, श्री निमेष झा आदि।

२.आब ज्योतिरीश्वर/ विद्यापति/ चतुर चतुरभुज/ गोविन्ददास/ बद्रीनाथ झा शब्दावलीसँ अहाँक परिचय करबाऽ रहल छी, जाहिसँ अहाँक लेखन-कौशलमे वृद्धि होएत।

१.कविशेखर ज्योतिरीश्वर शब्दावली
('विदेह' http://www.videha.co.in/ अंक १६ मे रचना लेखन स्तंभमे ई-प्रकाशित। )

गोण्ठि- मलाह
कबार- तरकारी बेचनिहार
पटनिआ- मलाह
लबाल- लबरा
लौजिह- ललचाइत जीह बला
पेटकट- जकर पेट काटल छैक/ अनकर पेट कटैत अछि।
नाकट- नककट्टा
बएर- बदरीफल
बाबुर- बबूर
खुसा- शुष्क
चुसा- चोष्य
फरुही- मुरही/ लाबा
करहर- कुमुदक कन्द
मलैचा- मेरचाइ
सारुक- भेँटा (श्वेत कुमुदक) कन्द
बोबलि- घेचुलि –खाद्य कन्द
बाँसी- वंशी
हुलुक- हुडुक्का (वाद्य यंत्र)
जोहारि – प्रणाम
तोरह – तौलह
बराबह- फुटा कए राखह
खुटी- महिला द्वारा कानक ऊर्ध्वभागमे पहिरए जायबला खुट्टी
सिङ्कली- सिकड़ी
चुलि- चूड़ी
त्रिका- माँग टीका
खञ्जरीट- खंजन पक्षी
साँकर- चीनी, लालछड़ी
बिरनी- वेणी, जुट्टी
कम्बु- शंख
पञु- पद्म
राउत- सैनिक पदाधिकारी
राजशिष्ट- राजाक दरबारी
पुरपति- नगरक मुख्य
साधि- सेठ
गन्धवणिक- कस्तूरी आदि सुगन्धी बेचनिहार
बेलवार- सीमारक्षक
राजपुत्र- एकटा पदाधिकारी
द्वारिक- राजदरबारमे प्रवेशक अनुज्ञा देनिहार
पनिहार- द्वारपाल
अगहरा- अग्रहार पाबि काज कएनिहार
रौतपति/ राजपुत्रपति- रौत सभक प्रधान
सन्धिविग्रहिक- विदेशमंत्री
महामहत्तक- प्रतिरक्षामंत्री
प्रतिबलकरणाध्यक्ष- शत्रुसेनाक जासूसीक विभाग
स्थानान्तरिक- राजाक पर्यटनक व्यवस्था केनिहार अधिकारी
नैबन्धिक- दस्तावेज लिखनिहार
वार्तिक- गुप्तवार्ता संग्राहक, वार्तिक आऽ महावार्तिक पञ्जीमे उच्च पदवी
आक्षपटलिक- द्युतग्रुहक अधिकारी
खड्गग्राह- हाथमे खड्ग लेने राजाक रक्षक- खर्गा
प्रमत्त्वार- बताहेकेँ रोकएबला अधिकारी
बिश्वास- राजाक अंतरंग सहायक
अग्रजाणिक- राजाक प्रयाणमे आगा-आगा चलनिहार सुरक्षा-दल
गूढ़ पुरुष- गुप्तचर
प्रणिधि- गुप्तचर
वार्तिक- गुप्तचर
सूपकार- भनसीया
सूपकारपति- भनसिया-प्रधान
सम्बाहक- भनसियाक परिचारक
बलिष्ठ- शारीरिक बलबला अंगरक्षक, बैठा
श्रोत्रिय- वैदिक
आध्यायिक- अध्येता
मौहूर्तिक- ज्योतिषी
आम्नायिक- वैदिक वा तान्त्रिक, युद्धविषयक परामर्शदाता
चूड़ामणि- भविष्यकथनशास्त्र
पँचरुखी काँच- प्रिज्म
महथ- उच्च कोटिक सैनिक पद, महथा/ मेहता/ महतो
मुदहथ- जिनका हाथमे राजाक मोहर रहैत छल
महसाहनि- आपूर्ति अधिकारी
महसुआर- प्रधान भनसिआ
महल – महर, समृद्ध गोपाल, जेना नन्द महर
सेजवार- सय्यापाल
पनहरि- ताम्बूलवाह
राजवल्ल्भ- दरबारी
भण्डारी- भाण्डागारिक
कलबार- वणिक
चोरगाहा- चाँवर होकिनहार
सुखासन- आरामकुर्सी
चौपाड़ि बहरघर, दलान, पाठशाला
अँचरा- गमछा
समरहर- अंगमर्दन
विदान- व्यायाम-३६ प्रकारक
तमारु- तामाक लोटा
पनिगह- पानि फेकबाक पात्र
तमकुण्ड- तामाक गँहीर अढ़िया
अप्यायक- तृप्तिकारक
फेना- बरकाओल चीनीक मधुर
जेञोनार- भोज
स्वर्गदुर्लभ- पान
दण्डिया- डंटाक उपरका पासि
भृङ्गार- स्वर्णकलस
आरहल- आरम्भ कयल
किटाएल- क्रुद्ध
नियोगी- एक प्रकारक फकीर
बुसक- भूसाक
धुनि- घूड़
संकोच- छोट होयब
अपगत- अलक्षित
सम्भार- प्रसार
कौशिक- उल्लू
गोमायु- सियार
नओबति- प्रहरी-दल
चतुःसम- द्रव- भीतरका धरातल नीपबाक
माठ- खाजा-माठ
उनच- उलोँच, चद्दरि(ओछेबाक)
दर्द्दुर- बेङ
झिकरुआ- झीङुर
निविल- निविड़ घन
काकोल- कार-कौआ
कोल- सूगर
शिवा- गिदरनी
फेत्कार- भूकब
सार्थवाह- व्यापारी यात्रादल-हरवल्ल्भा
प्रसारी- संचारशून्य मेघ
अखलु- प्रतीत होइत अछि
अखउलि- पूर्वमे कहल
वारिभक्त- पानिमे राखल बासी भात
सौहित्य- तृप्तता
उपचय- वृद्धि
पाण्डुरता- श्वेत भेनाइ जेना शरदमे मेघ कारीसँ उज्जर भऽ जाइत अछि
प्रसन्नता- स्वच्छता
सफरी- पोठी माछ
तरङ्ग- चञ्चलता
शालि- दाना भरल झुकल धान
मरुआ- तुलसी जतिक पुष्पवृक्ष
विशेषकच्छेद- कपार गलपर कस्तूरीसँ चित्र बनायब
दर्शनविधि- दाँत आऽ ठोर रँगब
वसनविधि- वस्त्र रँगब
वर्णिकाविधि- चित्रलेखन
शेखरयोजन- खोपा बान्हब
पत्रभङ्गि- शरीरमे कस्तूरी लेपन
गन्धयुक्ति- अतर-फुलेल बनायब
पानककरनी- शरबत बनायब
पट्टिकावान- पटिआ बीनब
तर्कुकर्म- सीकी-शिल्प
आकरज्ञान- भूतत्त्वविज्ञान
अक्षरमुष्टिका- आँगुरक संकेतसँ अक्षर-भावक निर्देश
दोहदकरण- कृत्रिम उपचारसँ वृक्षकेँ दुर्भिक्षमे पुष्पित करब।
छलितयोग- एकप्रकारक योग
रसवाद- रसायनविज्ञान
दुकूल- घोघट-ओढ़नीक लेल प्रयुक्त वस्त्र
क्षौम- तीसीक सोनसँ बनल वस्त्र
कौशेय- कीटकोशसँ बनल तसर वस्त्र
कमरूबाल- कामरूप बला
बङ्गाल- वङ्गबला
गुञ्जर- गुर्जर
कठिबाल- काठियाबाड़बला
बरहथी- बारह हाथक
बैङ्गना- भट्टासन रंगबला
पञ्चहर- पाँच खण्डक महल
पञ्चसम- पञ्च सुगन्धिद्रव्यक चूर्ण
प्रदीपकलस- अहिबातक पातिल, कलसमे राखल मङ्गलदीप जे बसातसँ मिझाय नहि
षेमा- राजा आऽ सेनाक अस्थायी शिविर
वारिगह- हथिसार वा घोड़सार
एकचोइ/ दोचोइ- एक वा दू मुख्य स्तंभ बला तम्बू
मण्डबा- मड़बा
कपलघड़- कपड़ाक घर
बरागन- बेरागन, सोम-रवि आदि
चेष्टसार- द्यूतशाला
सहिआर- अम्पायर
खेलबार- द्यूतशालाक मालिक
दण्डसाह- दण्डसाक्षी
कात- काँति, हारि-जीत लेल राखल द्रव्य
उपनय- समीप आनब
भुजङ्ग- समदिया, चुगला
घल- झुण्ड
अगिरानि- अग्रगामी रक्षक दल
सेनगाह- सेनानायक
रजाएस- राजादेश
घोल- घोड़ा
पाएन- पएर रखबाक वलय
पलानि- जीन लगाए घोड़ाकेँ कसब
थलबार- घोड़सारमे रहि अश्वक पालन कएनिहार
पाग- मुरेठा
सरमोजा- माथमे पहिरबाक मोजा
गान्ती- गाँती
बाग- चाबुक
साङ्कल- कड़ी
डाम्भ- काँच नारिकेर
फरेन्द- फाँक
कोन्ते- बरछी
लउली- लाठी
जाठी- फड़ाठी
कोन्तिआ- बरछीबाला
धमसा- नगाड़ा
महुअरि- फूँकि कए बजयबाक एक वाद्य
अनायत- ववश, बहीर
षतबार- पहरादार
बाइति- वाद्यध्वनि
टाप- घोड़ाक खूरपात
मुहरव- मुखध्वनि
पलानि- कसि कय
करुअक- कयलक
सर्वांवसर- आम दरबार
वेकल्हेण्टे- डाँड़
पाट- रेशमी
धलि- धड़िया, कप्पा
पाझि- पक्षी
टोपर- टोप सन झपना
सइचान- बाज पक्षी
पितशाल- पीरा साँखु
सरल- धूप सरड़
सिम्बलि- सीमर
सिंसप- सीसी
सहोल- साहोड़
पाउलि- पाँड़रि
बंझि- बाँझि
गिरिछ- रिछ
गुआ- सुपारी
नरङ्ग- सन्तोला
नमेरु- रुद्राक्ष
बउर- बकुल, भालसरि
छोलङ्ग- छोहारा
जुड़- शीतल
एला- अड़ाँची
सुखमेला- छोटकी अड़ाँची
मधुकर- शतावरी
कम्पूर कदली- कर्पूरकदली
कपिञ्जल- तितीर
धारागृह- फुहारासँ युक्त स्नानगृह
स्थेय- भगनिहार नहि
परम्परीण- वंशपरम्परासँ चल अबैत
पुरुष- रक्षक, सिपाही
कार- कारी
काबर- चितकाबर
चलक- चरक, श्वेतवर्ण
गोल- गौर
कइल- कपिल
पाण्डर- पाण्डुर
शीकरविक्षेप- फुहारा छोड़ब
गण्डूष- कुड़रा
नाकजलबुद्बुद- नाकसँ जलमे हवा छोड़ि बुदबुद बनायब
पिण्ड- पीड़ी
पारी- बेढ़
साटि- खुट्टा
चुत- आम
पस्रवण- सोता
पहाल- गिरि
डोङ्कल- डोंगर
चुली- चोटी
कोइआर- कोविदार
सैम्ब- सीमर
सीसमु- सीसो
साङ्कु- साँखु
समि- शनि, सैनि
सहोल- साहोड़
पञोकठ- पद्मकाठ
सभर- साँभर, अष्टापद मृग
कुटुम्बिनी- खीरी
कठहरिआ- कठखोदी
पेच- उल्लू
स्रुच- काठक लाड़नि, दाबि
पञ्चामृत- दही, दूध, घृत, मधु, शर्करा
पञ्चकषाय- शरीरमे लगयबाक पाँच सुगन्धिद्रव्यक चूर्ण
चषाल- यूपक माथ परक थुमहा
उदूखल- उक्खरि
चमस- बाटी
संभृति- सामग्री
सप्तधान्य- जओ, गहुम, तिल, काउन, साम, चीन, नीवार
आषाढ़दण्ड- पलाशदण्ड
तरुत्वच- वल्कल
वृक्षी- मुनिक बैसबाक आसन
दारुपात्र- कठौत
करण्डक- छिट्टा, पथिआ
बह्आरि- बहुरिआ, पुतोहु
बिदान- दाओ, मुद्रा
उभरि- उछलि कए ऊपर आबि, कुश्तीक दाओ
अवधा- अधोमुख, कुश्तीक दाओ
विद्यावन्ति- नर्तकी
सोताक ककना- मङ्गल सूत्र
सिङ्कली- सिंकड़ी
शाख- शंखाचूड़ी
खुन्ती- खुट्टी- कानक उपरका भागमे पहिरल जाइछ
चूलि- चूड़ी
तृका- माँगटीका
दशञुधि- दसौन्ही- राजाकेँ कालक सूचना देनिहार, सम्प्रति भाट
समहथ- समहस्त, बाजा सभपर एकबेर हाथ दए संगीत निकालब
मण्डल- हाथ-पएरक चक्राकार संचार कए एक मुद्रासँ दोसर मुद्रामे पहुँचबाक क्रिया
अङ्गहार- अङ्गसभकेँ विलासपूर्वक उचित स्थानमे पहुँचाएब
भाल- भूजाबलाक चूल्हि
ओबारी- पातिल
शिवा- गिदड़नी
भीम- भयानक
उल्कामुख- एक जातिक गीदड़ जकड़ा मुहसँ धधरा बहराइत छैक
जन्ताक- जाँतक
चुञ्ची- स्तन
पसार- दोकान
पेचा- उल्लू पक्षी
षीषील- खिखीड़
नेउर- बीजी
अपर्यन्त- असीम
पाट- पट्टवस्त्र
कापल- कपड़ा
सकलात- गलैचा
दुसुखासन- सुखद शय्या
लचसूचिका- नओ सुइयापर बिनायल बिछाओन
परिकर-नायक- दलपति
वर्हि- कुश
समिध- जारनि
दृषद- पाथर
लाज- लाबा
इष्टाङ्गना- भावी पत्नी
सुरती- सूरतसँ आयल, सम्प्रति सुरती तमाकू
जातीफल- जायफल
सूक्ष्मेला- छोटकी अड़ाँची
गुलत्वक- दालिचीनी
पत्रक- तेजपात
पिर्प्पली- पीपरि
कटुकी ओ दुलाह- दुलार काँट, वनौषधि
मूल्य परिछेद- मूल्य पटाएब
निष्क्रय- विनिमय
कर्षक्रय- सोनाक मुद्रा कीनब
अङ्कपरिस्थिति- लेखा-जोखा
हरण-भरण- माल लेब-देब
व्यवच्छेद- फरिछोट
नष्टकाक- कार कौआ
सलभ- फतिंगा
ग्रहिल- लगारी
सद्विचक्षण- नीक विद्वान्
वपा- भीड़-स्तूपाकार भूमि
खोल- खाधि
हस्तकाण्ड- लग्गा
गुणकाण्ड- नपबाक लग्गा
वत्सदन्त- बाछाक दाँत सन
भल्ल नख- भालुक नखक सदृश
तृपर्व- तीन पोर बला
सप्तपर्व- सात पोरबला
आलीढ़- दहिना ठेहुनकेँ उठाय ओ बामा ठेहुनकेँ नीचाँ रोपि ठाढ़ भेल
प्रत्यालीढ़- आलीढ़क विपरीत
समपाद- दुनू ठेहुन एक सरल रेखापर रोपि ठाढ़ भेल
बिशाख- दुनू टाँग चिआरि ठाढ़ भेल
स्थानक- ठाढ़ होएबाक ढ़ंग
असन- भाला
गोकर्ण- छोट भाला
मुकुल- कलिकाकार तीर
डाण्ड- पतबार, पानि उपछबाक कठौत
चाड, चडक- नाओ सभक बेड़ा
जुज्झार- लड़ाकू, युद्ध-पदाति
गणक- गणितज्ञ
ताराविद् – तारा देखि दिशाक ज्ञान करओनिहार
गुणवृक्ष- मस्तूल
सेकपात्र- नाओसँ पानि उपछबाक कठौत
वोहित- जहाजक बेड़ा
बिआरी- रात्रिभोजन
चोरगाहि- चामरिग्राहिणी
पटा- छोट पीढ़ी
बधा- खुट्टी लगला उत्तर खराऊँ मुदा डोरी लगला उत्तर बधा
तमारु- ताम्रपत्र
बटइ- बटेर
तेरिआ- तीन खुट्टाक- दू बिआनक महीस
लेबारी- नार-पुआर
अधतेरह- तेरहसँ आध कम अर्थात् साढ़े बारह
अँचओलनि- हाथ-मुँह धोलनि
देवरूपा- एक प्रकारक चानी


२. विद्यापति शब्दावली

( ई शब्दावली 'विदेह' http://www.videha.co.in/ अंक १३ मे रचना लेखन स्तंभमे ई-प्रकाशित भेल छल। )


मृगमद = कस्तूरी
वासर = दिन
रैन = राति
लिधुर = रक्त
पुर नटी = नागर नटी
अवतरु = अवतरित होऊ
कनक भूधर = सुमेरु पर्वत
चन्द्रिका चय = चन्द्रिकाक समूह
निपातिनि = नाश करएबाली
भक्त भयापनोदन = भक्तक भए दूर करएबाली
दुरित हारिणि = विपत्तिक भार हरण करएबाली
दुर्गमारि = भयङ्कर शत्रु
विमर्द = विनष्ट
गाहिनी = विचरण करएबाली
सायक = वाण
सुकर = सुन्दर
पिसित = काँच मौस
पारणा = तृप्ति
रभसे = आनन्दित करएबाली
कृशानु = अग्नि
चुम्ब्यमान = चुम्बन करैत अछि
परिच्युति = नष्ट करैत अछि
आड़ = लाल
भागि = वक्र
गोए = नुका कए
सुधाए = अमृत
कुशेशय = शतपत्र कमल
अधबोली = असंपूर्ण वाक्य
खनेखन = क्षणे-क्षण
उचिक = चकित भावेँ
आरति = पीड़ा
अनानि = अज्ञानी
दन्द = झगड़ा
हेरैत = देखैत
मनसिज = कामदेव
गौरव = गुरुता
खीन = क्षीण
अओके = दोसराक
लहु = लघु
परगास = प्रकाश
सुरत विहार = काम-क्रीड़ा
नवरङ्ग = संतोला
सन्तापलि = कष्ट देनाइ
बाङ्क = वक्र
पसाह = प्रसाधन
भीति = भयसँ
तिष = तीक्ष्ण
सिझल = सिद्ध भेल
कोरि = बैर फल
ससन = वायु
धनि = नायिका
अम्बर = वस्त्र
रेह = रेखा
रङ्ग = आनन्द
अलका = लेप
मसि = सियाही
समरा = श्यामल
कचोरा = कटोरा
पहू = प्रभू
ससधर = चन्द्रमा
मनोभव = कामदेव
सउदामिनी = विद्युत
करिनि = हस्तिनी
वयन = मुख
परिमल = सुगन्धि
तनरुचि = शरीरक गोराइ
अरुझायल = ओझरा गेल
बिलास-कानन = प्रमद-वन
निविल = घनगर
विहि = विधि
निञ = निज
विद्रुम दले = मौसरीक पातमे
तिहुअन = त्रिभुवन
मल्ल = पहलबान
हाटक = सोना
थम्भ = स्तम्भ
चिकुर-निकर = केशपाश
विचरित = निअम विरुद्ध
कवरी = केशपाश
चामरि = चँवर गाय
सम्भसि = सम्भाषण
न जासि = नहि कएल जाऽ सकैछ
हुतासे = अग्नि
मो = हम
पीहलि = झाँपि देलक
पीहित = आच्छादित
कुहुकि = मायाविनी
जुड़ायब = शीतल करब
दहइ = जड़ायब
अवनत = नीचाँ झुकल
बारल = निवारण कएल
धाओल = दौगि पड़ल
पसाहिम = प्रसाधन
फुलग = रोमांच
बलाअ = वलय
पेखलि = देखल
बेढ़लि = लिपटल
थीर = स्थिर
पुछसि = पुछैत छह
परस = स्पर्श
झुरए = व्याकुल होइत अछि
अम्बुद = मेघ
धन्दा = संदेह
पुतलि = मूर्ति
इन्दु = चन्द्रमा
महि = पृथ्वी
माझ = मध्य
खिन = क्षीण
मधु = पुष्प रस
उपेखि = उपेक्षा करके
तरुअर = तरुवर
लेख = उल्लेख
परिहरि = छोड़कर
तोरिए = तोहर
पाछिलि = पाछाँक
सनि = सदृश
अछलिहुँ = हम छलहुँ
छाजत = शोभित होएत
घोसिनी – ग्वालिन
बथु = वस्तु
अरतल = अनुरक्त
रव = हल्ला
राहि = राधा
तापिनि = ज्वाला
बयने = वाणी
धरनि = पृथ्वी
इथि = एकर
जोतिअ = ज्योतिष
मुरछइ = मूर्च्छा
आइति = अधीनता
महते = महावतसँ
नव = झुकैत अछि
एहो = ई
बटमारी = रस्तामे लुटनाइ
तुलाएल = बढ़ाओल
पसार = दोकान
पढ़ओंक = बोहनी
कुंगयाँ = गमार (कुगामक)
आजि = लगा देब
आग = अङ्ग
गोए = नुका कए
इन्दुमुखी = चन्द्रमुखी
तहु = ताहि परसँ
परिहरिहह = त्यागि देब
सारी = सारिका
सेचान = बाज
भामि-भामि = भ्रमण कए
विरडा = विडाल
सुरते = काम-क्रीड़ा
काहिअ अवधारि = विश्वासपूर्वक कहैत अछि
अन्तर नारी = नारीक हृदय
रोखए = रोष
गंजए = गंजन
रंजए = प्रसन्न
साह = ओऽ
तरासे = भए
परुष = कठिन
सोस = शुष्क
चेतन = समर्थ
आथि = अछि
सारी = संग
दूषलि = दुःख
निमाल = निर्माल्य
अंसुक = वस्त्र
वाँलभु = वल्लभ
नठल = नष्ट
परबोध = प्रबोध
पांगुर = पैरक आंगुर
खिति = क्षिति
गीभ = ग्रीवा
अनुसए = पश्चाताप
अनुरञ्जब = हम सम्हारि सकब
विरमाने = विराम-स्थल
एहो पय = इस पर भी
जार = जलाकर
नखत = नक्षत्र
जुगुतिहि = तर्कसँ
दोहाए = शपथ
रङ्ग = अनुराग
गरुअ = गुरुतर
पिसुन = चुगलखोर
अरुझओहल = ओझरायल
कञोनकँ = ककर ऊपर
बारि = बचा कए
फुलधालि = फूल धारण कए
कैतवे = छलसँ
अह = दिन
सपजत = सपरज
वथु = वस्तु
मोन्ति = मोती
धम्मिल = केशपाश
धोएल = स्थापित कएल
अङ्गिरि = अंगीकार करब
पुनिमाँ = पूर्णिमा
विभिनावए = अलग कए सकैत अछि
आनन = मुख
तिमिशरि = अंधकारक बैरी
चालक = प्रेरक
बम = उगलि रहल
भीभ = भआवोन
ओल = अन्त
कवल = ग्रास
सरूप = सत्य
निसिअर = निशाचर
भुअङ्गम = भुजङ्गम
उजोर = प्रकाश
झाप = डुबनाइ
मेंदुर = घन
मुदिर = मेघ
पाउस = पावस
निसा = निशा
निबिल = निविड़
निचोल = साड़ी
जामिक = प्रहरी
थैरेज = स्थैर्य
थोइआ = स्थापयित्वा
रञनि = रात्रि
सिरहि = शोभामे
असिलाइ = म्लान भऽ गेलाइ
वालँभू = स्वामी
मुसए = चोरि करबाक लेल
छैलरि = छलियाक
अरथित = याचनासँ
जड़ाइअ = ठण्डा करू
विरत रस = जकर स्वाद खतम भए गेल
अचेतन = मूर्ख
कके = किएक
लाघव = अनादर
चिटि-गुड़े = गुड़-चीटी
चुपड़लि = ब्याज
लओले लोथे = बहन्ना करलो उपरान्त
झाल = शुष्क
दरनि = दरारि
असेखि = अशेष
असहति = असहनशील
तत्न = तन्त्र
भाझहि = मध्य
खीनी = क्षीण
झपावह = ढ़कैत होए
परिरम्भि = आलिङ्गन कए
फुजलि = खुजि गेल
घोषसि = घोषणा
नखर = नख
पाँच पाँच गुन दस गुन चौगुन आठ दुगुन = ५*५*१०*४*८*२=१६०००
नखर = नख
छाँद = शोभा
हिया = हृदय
सदय = सहाय
कानुक = कृष्णाक
निरसाओल = नीरस कएल
सखिता = साक्षित कएल
करवाल = तलवार
काँढ़ = निकलैत अछि
कार = कारी
उजागरि = उज्जर
परिपन्तिहि = प्रतिपक्षीकेँ
पयगन्ड = प्रौढ़
मधुमखिका = मधुमक्षिका
उधारल = उद्धार कएल
लागर = युक्त
पुरहर = विवाह अवसर पर मांगलिक कलश
मन्दाकिनी = गङ्गाजल
केसु = किंशुक
विथुरलहु = पसारि देल
भिति = दीवारि
पौञनाल = कमलनाल
रात = लाल
ऐपन = अरिपन
हथोदक = हस्तोदक
विधु = रस्ताक ठकान
कनए-केआ = चम्पा+केरा = कनक+कदली
जैतुक = दहेज
डिठि = दृष्टि
तुलइलिहुँ = शीघ्रतासँ
अनुबन्ध = लगओनाइ
बोल छड़ = मिथ्यावादी
मज्जि = मज्जन कए
विथरओ = पसरि जाय
पाड़रि = गुलाब = पाटली
भोपति = हमरा लेल
वाउलि = पगली
विधुन्तुद = राहु
सेरी = शरणार्थी
परभृतक = कोकिल
मतेँ = मन्त्र
कि रहसि बोरि = की हास्यमे बाजि रहल छी
बालहि तोरि = अहाँक प्रेमिकाकेँ
भर बादर = मेघसँ भरल
झम्पि = रहि-रहि जोरसँ
सघने खर = तीव्र आऽ घन खर
डाहुकि = जोरसँ
थेघा = टेक कए
पख = पक्ष
पिआञे = प्रियतम
पङ्का = लेप
तथुहु = ओहिमे सेहो
दर = अपूर्व
अपद = बिना कारणक
साती = तीव्र वेदना
अवथाञे = अवस्था
पसाइल = पसारल
रासे = रोष
बालभु = वल्लभ
आएत = अधीन
सपूने = सम्पूर्ण
दिगन्तर = दूर देशमे
अरुझाए = ओझरल
आधिन = अधीन
पललि = भेल
खेञोब = क्षमा
जल आजुरि = जलाञ्जलि
सुसेरा = सुन्दर आश्रय
गोए = नुका कए
सम्भ्रम = अतर्कित
कराडहार = कड़ुआर (तकड़ा पकड़ि यमुना पार करब)
लहु-लहु आखरे = लघु-लघु अक्षर
तामरस = कमल
घनसार = कर्पूर
वेपथु = कम्प
मसृण = चिक्कन
सुदति = सुन्दर दाँतबाली
सुति = श्रुति
जति = जतेक
घमिअ = फूँकल जाइत अछि
आनइति = परवशता
दीब = शपथ
बड़इ = बहुत
देव देयासिनि = झाड़-फूँक करए बाली स्त्री
जटिला = कर्कशा
फुकरि = चिकरि
बहुरि = पुत्रवधू
अङ्गा = चिन्ह
बेसर = नाकक आभूषण
यन्त्रिया = वीणा बजाबए बला
यन्त्र = वीणा
फोटा = ठीका
समत = सम्मत
मौलि = मस्तकमे
मुसरेँ = मूसल
जेमाओव = भोजन
नवइते = उतरैत
पडिचाँ = पटिआ
माड़व = मड़बा
उगारल = घेरिकए पकड़ब
आँजल = अंजन
डाढ़ल = दग्ध कएल
गौह = खोह/ गुफा
बिलुविअ = बाँटल जाए
मउल = मुकुट
डाढ़ति = जरि जायत
श्मश्रु = दाढ़ी (मुँह बला खए बला नहि)
अधँगँ = अर्धाङ्ग
गरुअ = अधिक
अभरन = पहिरबाक वस्त्र
बड़ाव = प्रशंसा
तौँ = तथापि
निसाकर = चन्द्रमा
सरिस = सदृश
तांतल = उत्तप्त
सैकत = बालू
हब = होएत
निधुवन = संभोग
आरा = आन
कहाओसि = कहबैत छथि
राजमराल = राजहंस
सारङ्ग = हाथी
सारङ्गवदन = गणेश

३.रसमय कवि चतुर चतुरभुज शब्दावली
(ई शब्दावली 'विदेह' http://www.videha.co.in/ अंक १६ मे रचना लेखन स्तंभमे ई-प्रकाशित भेल छल।)

रसमय कवि चतुर चतुरभुज- विद्यापति कालीन कवि। मात्र १७ टा पद्य उपलब्ध, मुदा ई १७ टा पद हिनकर कीर्तिकेँ अक्षय रखबाक लेल पर्याप्त अछि।
विहि- विधाता
सञानि- युवती
तनु- वयश, देह
आँतर- अन्तर, भीतर
गोए- नुकाएब
वेकत- व्यक्त
गेहा- ठाम
परि- प्रकारे
विरहानल- विरहक आगि
काँती- कान्ति
धमित- धिपाओल
निरूपए- निरीक्षण
परिहर- उपेक्षा
अचिरहिँ- अल्पकालहि
वामे- प्रतिकूल
निअ- निज, अपन
मलयज- चानन
सयानि- विरह विदग्धा नायिका
धनि- धन्या-नायिका
हेरसि- निहारैत
हरषि- हर्षित भए
परिहरि- मेटाय
नखत- तरेगण
मधुरि-दल- उभय-ओष्ठ
मनसिज- कामदेव
अवनत- नीचाँ झुकनाइ
हुतासन- ज्वाला

४. गोविन्ददास शब्दावली

( ई शब्दावली 'विदेह' http://www.videha.co.in/ अंक १७ मे रचना लेखन स्तंभमे ई-प्रकाशित भेल छल। )
गोविन्ददास (१५७०-१६४०) शब्दावली (साभार-गोविन्ददास-भजनावली, सम्पादक गोविन्द झा)

अंगुलिवलय- औँठी
अंचल- आँचर;कोर
अकरुण- निर्दय
अकाज- विघटन
अगुसरि- आगाँ बढ़ि
अछोरब- त्यागब
अतनु- कामदेव
अतसी- तीसी
अनंग- कामदेव
अनत- अन्यत्र
अनल- आगि
अनुखन- हरदम
अनुगत- सेवक
अनुबन्ध- संगति
अनुसय- पश्चात्ताप
अनुसरब- पाछु चलब
अन्तराय- विघ्न
अपरूप- अपूर्व
अबगाह- पैसब
अवतंस- मनटीका
अवधान- होस
अवनत- झुकल
अवश- विवश, बाध्य
अविरत- लगातार
अविरल- घनगर
अविराम- निरन्तर
अबुध- बकलेल
अभागि- अभाग्य
अभिसार- प्रेमीसँ मिलए जाएब
अमरतरु- कल्पवृक्ष
अमिअ- अमृत
अम्बर- आकाश, वस्त्र
अरविन्द- कमल
अरुणिम- लाल, ललाओन
अरुण-लाल
अलक- लट
तिलक- पसाहिन
अलखित- अलक्षित, अनचोक
अलस- अलसाएल, शिथिल
अलि- भ्रमर
असार- आसार, वर्षा
अहनिस- दिनराति
अहेर- आखेटक, शिकारी
आकुर- ओझराएल; घबराएल
आगर- आकर, भंडार, खजाना
आतप- रौद
आनआन- अन्योन्य, परस्पर
आनन- मुख, चेहरा
आमोद- सौरभ
आरकत- आरत, आलता
आरति- आर्ति, आतुरता
आसोआस- आश्वास
इन्द्रफाँस- एक प्रकारक बन्धन
इन्दु- चन्द्रमा
इषदवलोकन- अझकहि देखब
उजागरि- जागरण
उजोल- प्रकाश
उतपत- उत्तप्त, धीपल
उतरोल- कोलाहल
उर- हृदय, छाती, स्तन
उरु- जाँघ
उरोज- स्तन
उलसित- उल्लसित
ऊजर- उज्जवल
कंज- कमल
कंटक- काँट
कटाख- कटाक्ष, कनखी
कनकाचल- सोनाक पर्वत
कनय- कनक, सोन
कपाट- केबाड़
कबरी- खोपा
कमान- धनुष
कम्बु- शंख
करहाथ- सूढ़, हाथ
करतल- तरहत्थी
करतँह- करैत छथि
करयुग- जोड़ल हाथ
कल- शान्ति; मधुर (ध्वनि)
कलप- कल्प
कलप तरु- पारिजात
कलरव- घोल
कलहंस- एक पक्षी
कलावती- रसिक रमणी
कल्पतरु- पारिजात
कहतहँ- कहैत छथि
कांचन- सोनाक
कातर- दीन
कान- कृष्ण; कार्ण
कानन- वन
काँबलि- साँगि
कामिनि- रमणी
कालिन्दी- यमुना नदी
कालिय- एक नाग जकरा कृष्ण नथलनि
काहिनी- कथा
किंकिर- चाकर, सेवक
किंकिणि- घुघरू
किसलय- नब पात, पल्लव
कुंकुम- सौन्दर्य प्रसाधनक लाल लेप वा चूर्ण
कंटक- काँट
कुंचित- संकुचल
कुंजर- हाथी
कुच- स्तन
कुन्दल- लट
कुन्दल- खराजल, सोधल
कुवलय- नील कमल
कुमुद- श्वेत कमल, भेँट
कुमुदिनि- श्वेत कमलक लता
कुसुम- फूल
कुसुमबान कामदेव
कुसुमसर- कामदेव
कुसुमसायक- कामदेव
कुहू- अमावस्या
कुल- तीर
केलि- काम-विलास
केसरि- सिंह
कोक- एक पक्षी, चकबा
खचित- खोँसल
खर- तेज, तीक्ष्ण
खरतर- तीक्ष्णतर
गंड- गाल; हाथीक मस्तक
गगन- आकाश
गज- हाथी
गजमोति- ओ मोति जे हाथीक मस्तिष्कमे रहैछ
गणक- जोतखी
गरगर- गद् गद, विह्वल
गरब- घमंड
गरल- विष
गरुअ- भारी
गलित- नमड़ल
गहन- नव
गहीन- गँहीर
गात- देह
गाहनी- प्रवेश कएनिहारि
गिम- ग्रीवा, गरदनि
गुनगाम- गुणग्राम, गुणावली
गुनि- बिचारि, सोचि
गुहक- ओझा-गुनी
गेह- घर
गैरिक- गेरु
गोए –छिपाए
गोचर- बाध
ग्रीम-ग्रीवा, गरदनि
धन- प्रबल,तेज ;अविरल, लगलग, लगले लागल
घनरस- जल; गाढ़ रस
घनसार- कर्पूर
घाघर- झाँप
घामकिरन- सूर्य
घुमाएब- सूतब
घूम- निद्रा
घोर- विकट
घोस- गोप
चकोर- एक पक्षी
चतुरानन- ब्रह्मा
चन्द्रक- मयूरक पाँखि
चरमाचल- अस्ताचल
चलतँह- चलैत अछि
चाँचर- चञ्चल
चारु- सुन्दर
चाह- निहारनाइ, अवलोकन
चाहनी- अवलोकन
चाहब- निहारब
चिबुक- दाढ़ी
चिर- दीर्घकाल
चीतपुतरि- चित्रमे लिखल मूर्ति
चूड़- शिखर, जूड़ा
चूड़क- पुरुषक खोपा
चेतन- चैतन्य, होस
चोआ- धूमनक तेल जे सुगन्धित होइत अछि
छन्द- गति, प्रवृत्ति, इच्छा; शोभा
छाँद- शोभा
जघन- जाँघ
जदुपति- कृष्ण
जर- ज्वर, सन्ताप
जलजात- कमल
जसु- जकर
जानु- ठेहुन
जाबक- आरत, आलता
जाम- याम, पहर
जामिनि- राति
जामुन- यमुना
जूथ- दल
जूथि- जूही फूल
जोर- युगल, जोड़ा
जौबति- युवती
झंक- दीन वचन, दुःख
झंझर- झटक, वृष्टि
झपान- खटुली
झष- माछ
झामर- श्यामल, कारी
झिल्ली- एक कीड़ा
झूर- विखिन्न
टलमल- अस्थिर
ठान- स्थान
डमक- डम्फा
डम्बर- आटोप
ढरढर- निरन्तर (प्रवाह)
ढलमल- डगमग
तटिनी- नदी
तड़ितलता- बिजुलोका
तन्त्री- वीणा
तपन- सूर्य
तमाल- एकवृक्ष
तरंगिनी- नदी
तरल- द्रुत
तरुकोर- गाछक स्तंभ
तरुन- टटका; युवा
तरुणी- युवती
ताटंक- तड़का, कानक एक गहना
ताड़- एक गहना
तापनि- यमुना
ताम्बूल- पान
तार- तारा
तिआस- पिपासा
तिमित- स्थिर
तिमित- अन्धकार
तिरिवध- नारीक हत्याक पाप
तिलतिल- छन-छन
तुंग- ऊँच
तमुल- तेज (ध्वनि)
तुषदह- भूसाक आगि
तुहिनकर- चन्द्रमा
तूण- तरकस
तोरित- तुरन्त, शीघ्र
त्रिवलि- नारीक पेटपरक सिकुड़न
त्रिभंग- नाचक एक मुद्रा
दन्ती- हाथी
दन्द- द्वन्द, भिड़न्त; झगड़ा; चिन्ता
दरस- दर्शन
दलितांजन- एक प्रकारक अंजन
दसन- दाँत
दसबान- दस बेर गलाए शुद्ध कएल सोन
दहन- आगि
दादुर- बेङ
दाम- डोरी
दामिनि- बिजुली
दारिद- दरिद्र
दारुन- भयानक
दिगम्बर- नाङट; शिव
दिठि- दृष्टि, नजरि
दिनमणि- सूर्य
दीगभरम- दिग् भ्रम
दीघ- दीर्घ, पैघ
दुरगह- दुर्धारणा, भ्रान्ति
दुरदिन- अधलाह दिन; वर्षाबाला दिन।
दुलह- दुर्लभ
दैव- जोतखी
दोषाकर- चन्द्रमा; अनेक दोषबाला (व्यक्ति)
द्विजराज- चन्द्रमा
धनि- धन्य; सजनी, नारीक शिष्ट सम्बोधन
छन्द- चिन्ता
धबल- उज्जर
धवलिम- उज्जर
धरनि- धरणी, पृथ्वी
धराधर- पर्वत
धाब- दौड़नाइ
धूसर- भुल रंग
नखपद- नखसँ स्तनपर कएल चिन्ह
नखर- नह
नखरंजनि- नहरनी
नखरेख- नखच्छद
नन्दन- पुत्र
नवल- नूतन
नबेलि- नवीना
नभ- आकाश
नयान- नयन, आँखि
नलिनी- कमल-लता
नागदमन- कालियनागकेँ नथनिहार (कृष्ण)
नागर- रसिक (पुरुष)
नाह- नाथ, पति
निअ- निज, अपन
निअर- निकट
निकर- समूह, बहुत्वसूचक
निकरुन- निष्करुण, निर्दय
निकुंज- लतावृक्षसँ घैरल स्थान
निकेतन- घर
निगमन- निमग्न, डूबल
निचोर- चोली
निछोरि- छीन (लेब)
निज- अपन
नितम्बिनि- पुष्ट नितम्ब वाली सुन्दरी
निदान- दुरवस्था, दुखद स्थिति
निधुवन- रति, सम्भोग
निनाद- ध्वनि
निविड़- घनगर, गहन
निभृत- छिपल
निमिष- छन
निरखब- निहारब
निरुपम- अनुपम, अपूर्व
निसान- ध्वनि
निसित- पिजाओल, तेज
नीति- नित्य
नीप- कदम्ब
नीवी- जारबन्द
नीलिम- नील रंगक
नीर- पानि
नीरद- मेघ
नीलमणि- नीलम
पउरब- हेलिकेँ पार करब
पखान- पाषाण, पाथर
पखावज- एक बाजा
पतनि- चादर
पद- पाएर
पदतल- तरबा
पदुमनि- कमललता; उत्कृष्ट,नायिका
पन- पण, पारिश्रमिक
पवार- प्रवाल, मूँगा
पय- पाएर
पयान- प्रयाण, प्रस्थान
पयोधर- मेघ;स्तन
परजंक- पर्यंक, पलंग
परतेक- प्रत्यक्ष
परबोधब- बौँसब
परमाद- प्रमाद, चूक
परमान- प्रमाण; साक्षी
परस- स्पर्श
परसंग- चर्चा
परिबादसि- आरोपह
परिमल- सौरभ
परिरम्भ- आलिंगन
परिहार- त्याग
पहु- प्रभू, स्वामी
पात- जयपत्र, डिक्री
पादुक- खड़ाओँ
पानि- हाथ
पिक- कोइली
पीछ- मयूरक पाँखि
पीन- पुष्ट
पुनफल- पुण्य़क सुपरिणाम
पुलक- रोमांच
पुलकायित- रोमांचित
पुलकित- रोमांचित
फटिक- स्फटिक, एक प्रकारक पाथर
फनिमनि- ओ मणि जे नागक फेँच मे उत्पन्न कहल जाइछ।
फागु- अबीर
फुलधनु- कामदेव
फुलसर- कामदेव
फूर- सत्य; मन मे आएब
फोइ- खोलिकेँ
बंजुल- एक लता
बकुल- एक फूल, भालसरी
बजर- वज्र
बदरिकोर- बैरक गाछक जड़ि
बदि- बूझिकेँ
बन्धुक- मधुरी
वयन- वचन, बोल
वलय- कगना, माठा, औँठी
बलाकिनी- बकक पाँती
वलित- वेष्टित
वल्लरि- लता
वसन- वस्त्र, परिधान
बहुवल्लभ- बहुत नारीसँ प्रेम कएनिहार
बाए- वायु
बात- हवा
वाद- झगड़ा
बादर- मेघ
बानि- वाणी
वारि- जल
वासित- सुरभित
विकच- विकसित, फुलाएल
विगलित- खसल, नमड़ल
बिछेद- वियोग
बिजन- बीअनि, पंखा
वितान- चनबा
बिथार- विस्तार
बिदग्ध- रसिक
विधु- चन्द्रमा
विधुन्तुद- राहु
विपथ- कुमार्ग
विपाक- कुफल
विपिन- वन
विलुलित- लटकल, डोलैत
विलोकन- नजरि
विशिख- बाण
विषम- विकट, दुखद
विहंग- पक्षी
बिहि- विधाता
बीजन- बीअनि, पंखा
बीजुरि- बिजलोका
बेणि- जूटी
बेल- तट
बेलि- बेर
बेश- सिङार, प्रसाधन
भंग- भंगिमा
भनतँह- कहैत छथि
भव- संसार
भमइ- भ्रमण करैछ
भाबिनि- कामिनी, भद्र महिलाक सम्बोधन
भाल- ललाट
भास- शोभा पाएब
भीतपुतरि- भित्तिमे बनाओल मूर्ति
भुज- बाँहि
भुजंग- साप
भुजमास- पाँज
भूरि- बहुत
भूषित- अलंकृत
भोर- भ्रान्ति; सुधिहीन
मंजुल- सुन्दर
मगन- मग्न, डूबल
मणि- बीचमे छेदबाला रत्न
मणिमन्त्र- जड़ी-बूटी आ झाड़फूक
मत- मत्त, आकुल
मधु- वसन्त
मधुकर- भ्रमर
मधुप- भ्रमर
मधुपुर- मथुरा
मधुरिपु- कृष्ण, मधूसूदन
मधुरिम- मधुर, मनोरम
मनमथ- कामदेव; मनकेँ मथनिहार
मनसिज- कामदेव
मनोभव- कामदेव
मन्थर- मन्द
मन्दिर- घर, निवासगृह
मरकत- एक रत्न
मरजाद- सीमा
मरम- हृदय, अन्तर्मन
मराल- हंस
मलयज- चन्दन
मल्लि- बेली फूल
मसृण- चिक्कन, कोमल
महि- पृथ्वी
महितल- धरती
महिपंक- कादो
मही- धरती
माधवि- एक फूल
मान- नारीक स्वाभिमान
मानि- मान्य
मानिनि- मानवती
मारग- मार्ग, बाट
मालति- एक फूल
मिछहि- फुसिए
मिहिरजा- यमुना
मीन- माछ
मुकुटमणि- श्रेष्ठ
मुकुर- दर्पण
मुकुलित- कोँढिआएल, संकुचित
मुखर- अधिक बजनिहार
मुदिर- मेघ
मुगुधि- मोहित, अल्पमति
मुन्दरी- मुद्रिका, औँठी
मृगयति- जोहब
मृदु- कोमल
मेह- मेघ
मोतिम- मोतिक बनल
मौलि- शिखर, सिर
रंग- केलिविलास
रंगिनि- विलासिनी
रजनीकर- चन्द्रमा
रणित- झमझम ध्वनि
रत- प्रेमासक्त
रति- सम्भोग; कामदेवक स्त्री
रव- शब्द
रबाब- एक बाजा
रभस- हठकेलि
रसना- जीह; मेखला
रसनारोचन- उत्कृष्ट रसक कारणेँ रुचिकर
रसबति- रसिक (रमणी)
रसायन- रसक भंडार; सुखद प्रभावबाला
रसाल- रसयुक्त, रसिक
राइ- राधिका
राग- आसक्ति, प्रेम
रातुल- लाल
राव- ध्वनि
राही- राधिका
रितुपति- वसन्त
रुचि- अनुराग
रुचिर- प्रिय, आनन्ददायक
रेणु- धूरा, गरदा
रेह- रेखा
रोचन- रुचिकर, प्रिय
रोमाबलि- नारीक नाभिलगक रोइआँ
रोष- तामस
ललित- सुन्दर
लाज- लाबा; लज्जा, संकोच
लाबनि- लावण्य
लालस- लालच लोभ
लोचन- आँखि
लोल- चंचल
संकेत- इशारा, इंगित
संघात- ढेर
संघाति- मेल
संवरु- समेटक
सचकित- विस्मित
सजल- नोराएल, भीजल
सति- सत्य
सन्धान- निशाना
सफरी- पोठी माछ
समागम- संगम
समाधि- ध्यान लगाएब
समीर- वायु
सयान- सज्ञान- बुधिआर
सरबस- सर्वस्व
सरम- श्रान्ति
सरसिज- कमल
सरूप- सत्य
सरोरुह- कमल
ससधर- चन्द्रमा
साखि- साक्षी, प्रत्यक्षद्रष्टा
साति- शास्ति, सजाए, कुपरिणाम
साद- शब्द, साध, मनोरथ
साध- मनोरथ, कामन
सामर- शामल, श्यामवर्ण
सारि- मएना
सारी- मएना
शिखंड- मयूरक पाँखि
शिखंडक- मयूरक पाँखि
शिखिचचन्द्रक- मयूरक पाँखि
सिरिस- सिरीष वृक्ष
सिसिर- शिशिर ऋतु
सुधाकर- चन्द्रमा
सुधीर- स्थिर, गम्भीर
सुरतरु- पारिजात वृक्ष
सुरपति- इन्द्र
सीकर- फुहार, जलकण
शेखर- शीर्ष स्थान
सेल- शल्य, आन्तरिक वेदना
सोहन- शोभन, सुरूप
सोहागि- सौभाग्य
स्रवन- कान
श्रमजल- धाम
श्रील- श्रीयुत
श्रुति- कान
हरि- सिंह, कृष्ण
हाम- हम
हिअ- हृदय, उर
हिमकर- चन्द्रमा
हुतास- अग्नि
हेम- सोन
हेमन्त- पाँचम ऋतु, अगहन-पूस

५.बद्रीनाथ झा शब्दावली
(ई शब्दावली 'विदेह' http://www.videha.co.in/ अंक १७ मे रचना लेखन स्तंभमे ई-प्रकाशित भेल छल।)

मिलिन- मधुमक्खी, भौरा
रसाल- आमक गाछ, कुसियार
अतन्द्र- सावधान, जागरूक
खद्योत- भगजोगनी
दुर्वार- कठिन
यति- प्रतिबंध, जतेक बेर
अचलसेतु- अदृष्टलेख
विपिन- जंगल
तरणि- नाओ
अवाम- दहिन
गरुड़केतु- विष्णु
बौड़ि- उन्मत्त
तुषार- शीतल
ब्रह्मर्षिसुत- कश्यप
वारुणी- पश्चिम दिशा
कश्यप- मुनि ओ मद्यप
प्रतीची- पश्चिम दिशा
कुलाय- खोंता
साँझ- समाधि वा समुच्चय
जीव-अभिदान- नाम
कमान- धनुष
विधु- चन्द्रमा
हय- थोड़ा
नमि- नमस्कार
नीराजन- प्रातःकालक आरती
मानर- मृदङ
काहल- वाद्यविशेष
चतुविध- आङ्गिक, वाचिक, सात्विक, आहार्य
उड़ुगण- तारा
दैवज्ञ- ज्योतिषी
पाटल- लाल
पाटल- व्याप्त भेल
अविद्या- अज्ञान
अधित्यका- पर्वतक ऊपरक देश
कुशण्डिका- वेदिसम्मार्जनादि
मेधा- धारणावती बुद्धि
सम्भार- सामग्री
कज्जल- कारी (काजर)
भूयसी- एक प्रकारक दक्षिणा
दीठि- दृष्टि
नृपदार- रानी
परिचार- परिचर्या
फुलहरा- कोढ़िलाक झाड़
राजीव- कमल
मुदवारि- आनन्दक नोर
तृष- तृष्णा
पाञ्चजन्य- शङ्ख
जगत्ताताक- विष्णु
प्रत्यभिवादन- प्रतिप्रणाम
जूटिका- शिखा
गोए- नुकाए
गुरु-सन्तोख- दक्षिणाद्रव्य
अवसित- पूर्ण
श्रुतिवेध- कर्णवेध
प्रभाक- प्रतिभा
गुरु-शुद्धि- बृहस्पतिक शुद्धि
औड़ि- आग्रहविशेष
शिविका- पालकी
पूर्वाङ्ग-कृत्य- मातृकापूजादि
अदम्भ- निश्छल
वैजयन्त- इन्द्रक कोठा
कौशेय वसन- पाटक वस्त्र
भक्ष्य चतुर्विध- भक्ष्य-भात आदि भोज्य लाबाआदि, लेह्य चटनी आदि, चोस्य आमाअदि
नीवार- ओइरी
अनुताप- पश्चाताप
बद्धकर- कृपण
विमति- विरक्ति
वैमत्य- मतभेद
प्रसाद- प्रसन्नता
अनुरोध- रोच
आर्य- श्रेष्ठ
जाचल- परीक्षित
सुभगप्रक्रिय- सुयश सुव्यवहार
अचलेश- भूपति
बिहान- प्रभात
पट्टपटसार- उत्तम पाटक वस्त्र
विभूतिवत- ऐश्वर्य
एकतान- एकाग्र
वनी- वानप्रस्थ
और्ध्वदैहिक- परलोकोपकारक श्राद्ध
भोज-ओज- कृपणता
चञ्चरीक- भ्रमर
सोहल- शोभित भेल
छान- कलङ्क
अदक्षिण- प्रतिकूल
इन्दीवर- नील कमल
कीर- सूगा
अकानल- सूगा
अकानल- सुनल
पोषक-द्वेषक- पोसनिहार (कौआक) द्वेषी
श्मश्रु- दाढ़ी-मोछ
शैवाल-लतिका- सेमारक लत्ती
कुण्डलित- लपेटल
कर्णिकार- कनैल
ग्रीवा- गरदनि
इन्द्रायुध- वज्र
तमाल-साल- साँखु
शम्पा- विद्युल्लता
सहकार- आम
वकुलमुकुल- भालसरीक कली
पखान- पाथर
दमनक- दोनाफूल
अंसयुगल- दुहूस्कन्ध
अश्मसार- लोह
मणिबन्ध- पहुँचा
अबलासव- विरोध
दुहिण- ब्रह्मा
जम्भरिपु- इन्द्र
ऊरु- जाँघ
आरत- विरोध
नीरज- जलमे अनुत्पन्न, धुलि रहित, विरोध
इलातनय- पुरुरवा
सुरवैद्ययुगल- दुहू अश्विनीकुमार
क्षितिहरिहम- पृथ्वीन्द्र
परपुष्ट- कोयल, कोकिल, पसान्तरमे परिपुष्टा वैश्या
मधुप- भ्रमर, मद्यप
आतङ्करङ्क- निर्भय
काव्यक- शुकक
मधुभरि- बसन्तपर्यन्त
सुरभिमग- कामधेनुक मार्ग
अनीति- अतिवृष्ट्यादिरहित
शिक्षालोक- प्रकाश
तास्रव- उच्चध्वनि
जनपद- अपन देश
साभिनिवेश- आग्रहपूर्वक
धारणा-ध्याण- अष्टाङ्गयोगक छठम ओ सातम अङ्ग
प्रकृति- स्वभाव, प्रजा
पीयूष-यूष- अमृतसार
मार्तण्ड- सूर्य
सत्वक- सत्वगुण
सौम्य- बुधग्रह
वाक्पति- बृहस्पति
रवि-कल्प- सूर्य-सदृश
याचना-परायण- याचक
अभियोगी- अभियोग कएनिहार
कैरवामोद- कुमुदक सौरभ, शत्रुक आनन्द
अनुदार- स्त्रीसँ अनुगत
पुत्रेष्टिक- पुत्रोत्पादक यज्ञ
एकावली- मोतीक माला
मत्सरिता- अन्यशुभद्वेष
लालनसुहिता- लालने तृप्त वा अनुकूल
परिणाह- वृद्धि
प्रमत्त- असावधान वा उन्मत्त
बालवशामे- नवीन हथिनी
आविल- पङ्किल
अर्धचन्द्र- चन्द्रक ओ गड़हत्था
शिखिकलाप- मयूरक पिच्छ, विषम
बलाहक- मेघ
सरणी- आकाश
जड़भाव- शैत्य वा जलत्व
मेचक- नील
द्विरद- हाथी
धम्मिल्ल- केशपाश
विलक्ष- लज्जित
पथिक-चक्र- चक्रबाक ओ समुदाय
काली- कारीरङ्ग
तारा- आँखिक पुतड़ी
काली- प्रथमा महाविद्या
तारा- द्वितीया
चतुश्रुति- श्रुतिवेद, पढ़निहार ब्रह्मा
श्रुति- कान, सुनब
विश्रुति- सिद्धि
छीजक- नष्ट होएबाक
कलकण्ठी- कोकिला
तप्त-तपनीय- सोना, स्वर्ण
चिवुक- दाढ़ी
परिस्फुर- चञ्चल
लेखा- गणना
जूझल- लड़ल
महायति- अतिविस्तीर्ण
आहित- स्थापित
स्तूप- माटिक ढेरी
लिकुचक- बड़हड़क
श्रीफल-मद- विल्वफलक गर्व
गर्त- खत्ता
कुलाल- कुम्हार
नाभिभव- ब्रह्मा
शारदा- अदृश्या सरस्वती नदी (अलखरूप शारदा)
त्रिदिवस सारिणी- गङ्गा
वली- उदररेखा (तीनिवली)
बली- बलवान
पाटच्चर- चोर
केहरि- सिंह
नितम्बक- पर्वतक मध्य भागक
विधिओजक- प्रतापक
कृष-नीच- नीचाँदिसिसँ क्रमहि पातर (जङ्घा-क्रम-कृष-नीच)
वेत्र-दण्ड- सोनाक अधिकार दण्ड
हंसक- नुपूर
दश-शशधर- नखरूप-दशचन्द्रक
लाजें बीतल- संकुचित भेल
अनृत-दूषण-कृपाणी- मिथ्यादोषक छुरी जेकाँ नाशक
कथाऽवशेष- अवशिष्ट वक्तव्य
हर्ष-नृत्त- गात्रविक्षेप
सभीक- भीत
सागर-परिपन्थी- सागरक प्रतिस्पर्धा कएनिहार
सम्पुटित- सङ्कुचित
विगेय- निन्दनीय
विजीहीर्षा- विहारक इच्छा
दलतर- पातक नीचाँ
अतिसुकवि- ऊह- सुकवि तर्कक अगोचर
कुवलय-रम्भा-समान- पृथ्वी-मण्डलक रम्भा सदृश
देवाङ्गनीय- देवाङ्गना-सम्बन्धी
रास- मण्डलाकार नृत्य
श्यामा- प्रियङ्गु
व्यामोहक- सम्मोहक
काल- यमराज
सारग्ङ- हरिण
कृतयुग- सत्ययुग
रण-एकतान- युद्धमे सर्वदा विजय पओनिहार
नृपति-पताकिनीक- राजसेनाक
विकटप्रतीक- दारुणाकार
पुण्डरीक- बाघ
दिनेन्दु-दीन- दिनक चन्द्र सदृश मलिन
सर्वसहाक- पृथ्वीक
लीन- प्रलयमे प्राप्त
विलीन- विलाएल
गोए- राखि
तदनुसार- पाछाँ
विदग्धताक- रसिकताक
गरुअ- पैघ
भूरमाक- भूतल लक्ष्मीक
शर्म- सुख
दलितपांशु- निष्पाप वा निर्दोष
भवितव्यवश्य- भाग्याधीन
अननुरूप- प्रतिकूल
प्रणिधानलीन- ध्यानमग्न
द्विजदत्त- सिद्धब्राह्मणसँ देल
दत्त-प्रदत्त- दत्तत्रेयसँ देल
उदेष- अन्वेषण
स्वरति- स्वविषयक प्रेम
धैर्य-कदर्य- अधीर
चरमदशाक- मृत्युक
अवगाह- आलोड़न
ओज- तेज
यशस्य- यशोजनक
अलेश- निश्छल
विजिगीषा- विजयक इच्छा
पुटपाक- दुइ सरबाक सम्पुटमे वस्तुकेँ मूनि पक
हयग्रीव- राक्षस जेकरा विष्णु मारल
अनन्त- अन्त-रहित
व्यपाय- परिपूर्ण
भङ्ग- पराजय
सङ्गर- युद्ध
तनु- कोमल
आश्रित-दुर्ग- दुर्गोपासक
दुर्ग- दैत्यसँ सेवित दुर्गम
सर्वसहा- पृथ्वी, तितिक्षा, सभ सहनिहारि पृथ्वी
मनु- मन्त्र
शिव- कल्याणकारक
कूर्च- ह्रीँ
शिखिजाया- स्वाहा
आखर- ह्रीँ गौरि! रुद्रदयिते! योगेश्वरी। हूँ फट स्वाहा
अन्वर्थाख्य- यथार्थनामा
सिद्धि- सिद्धिकेँ प्राप्त, सम्पन्न
ब्राह्मण-भोज-पञ्चाङ्ग पुरश्चरण (तर्पण मार्जन ब्राह्मण भोज नृसोम)
वैन्य- राजा पृथु
फलक- ढाल
शिशुमार- सोँस
धन-शाद- पाँक
क्षेपणी- करुआर
पटमण्डप- तम्बू
यादस्स्वन- जलजन्तुक शब्द
पूत- पवित्र
द्विरदकाँ- हाथीकेँ
दानजल- मदजल
मन-अवसाद- दुःख
भव्य- शुभ, सुन्दर
आयुधराजि- चञ्चला, विद्युत
चैत्य- प्रसिद्ध गृह
दुर्ग- किला
सुचतुष्पश- चौबट्टी
अहम्पूविका- हम पहिने तँ हम पहिने एहि स्पर्धासँ दौगब
पवि- वज्र
अर्थ- प्रयोजन
प्रभूत- बहुत
लाघव- शीघ्रता
दनुज-तनुज- शरीरमे उत्पन्न
अर्भ- नेना
सुरसरणी- आकाश
शारिका- मएना
मेकल- नर्मदा नदीक उत्पादक पर्वत
परिपाटी- परम्परा
उत्कोच- घूस
वितान- विस्तार
प्रकोष्ठ- पहुँचा
अङ्गुरीय- अङ्गुठी
केतन- ध्वजा
निर्मम- ममताहीन
उदिखर- उदित
दीधिति- चन्द्रकिरण
दक्षिण- अनेकमे समानानुरागी ओ दहिन
मत्सरी- द्वेषी
विनिपातोन्मुख- अवनति दिस प्रवृत्त
मधु-सञ्जेँ- नामसँ
नृपदारक- राजकन्या
प्रमोद-निबन्धन- कारण
वन्दी- कैदी
पुरुषार्थ चतुष्ट्य- धर्म, धन, काम ओ मोक्ष
दीधिति-माली- सूर्य
नरनाथ- परिकर
औरस-सुत- अपनासँ धर्मपत्नीमे उत्पन्न पुत्र
चक्रधर- नारायण
ईषत्कर- सुकर
कुलिशायुधसँ- इन्द्रसँ
प्रमा-सालित- यथार्थज्ञानसँ स्फीत
उक्ति-प्रगल्भ- बजबामे प्रौढ़
शमन- यमराज
विधेय- कर्तव्य
दुर्विपाक- अधलाह फल
सङ्कल्प-कल्पना- मानस कर्मक रचना
स्तम्भित- जड़ीभूत
सकल-करण-परिवारक- इन्द्रिय वर्गक
भव-झरिणी- संसार नदी
शशिकान्त- चन्द्रकान्त मणि
रजनिकर- रुचिएँ- कान्तिएँ
निष्कपट- रुचिएँ-प्रीतिएँ
द्रुत- शीघ्र
विद्रुत- पघिलल
मानसिक- व्यतिक्रमहुक-मानस-व्यभिचारहुक
उन्मिषित- बढ़ल
प्रकृतिस्थ- चैतन्य-युक्त
कालासुर- कालकेतु राक्षस
अमान- अपरिमित
अमानव- अलौकिक
कुरङ्गित- हरिण जेकाँ उछलैत
विक्रम- विलक्षण वा विगत छैक क्रम जाहिमे
पञ्चानन- सिंह
आरभटी- आडम्बरपूर्ण चेष्टा
दुरभिसन्धि- दुराशय
कान्दिशीक- भयसँ पढ़ैनिहार
अनाथ- विधवा
धृष्ट- प्रौढ़
निकृष्ट- नीच, छोट
उपरोधन- धैरव
अनारम्भ- आरम्भ नहि करब
भानुमान- सूर्य
कृकलाश- गिरगिट
सन्नाह- युद्धक उद्योग
मधु-मधुरिमार्ह- द्राक्षासदृश-मधुर सम मधुर, दाखसन
सर्वज्ञम्मन्य- अपनाकेँ सर्वज्ञ माननिहार
वीरमानी- अपनाकेँ वीर माननिहार
नृशंस- क्रूर (वातक)
अपलापपरा- लाथ करबामे तत्पर
प्राथमिक- पहिलेबेरुक
प्रकार- दिवारक
अज- बत्तू
कुरङ्ग- हरिण
गवय- गो सदृश नीलगाय
शार्दूल- बाघ
साम्हर- हरिणसन जन्तु
भूतनाथ- महादेव
प्रमथराजि- गणसमूह
शृङ्गी- शृङ्गवाला
जटी- जटाधारी
वारणरद- हाथीकसन दाँतबाला
पुच्छी- नाङ्गरि
कृत्तिपटी- बाघक चाम पहिरनिहार
चत्वर- चट्टान
भीरुभीमा- भीरुक भयङ्कर
पटल- पटि गेल
जन्य- युद्ध
राजन्य- क्षत्रिय
भिन्दिपाल- ढेलमासु सन गुल्ली फेंकबाक अस्त्र
तोमर- मन्थन दण्डसन अस्त्र
कृपाण- तरुआरि
परशु- फरुसा
असि धेनु- खाँड़, छूड़ा
भुशुण्डी- अग्निप्रधान अस्त्र
परिध- हथौड़ी
दनुजभुवन- पाताल
जलद-छाया- मेघक छाहरि,तत्सदृश अस्थिर
मृत्युशक्ति-उत्क्रान्तिदा- मृत्युकेँ ’उत्क्रान्तिदा’ नामक शक्ति छन्हि जाहिसँ जीवोत्क्रमण करैत छथि
वृन्दारक-वृन्दक- देवसमूहक
निजचमू- सेना
पताल- अतल, वितल, सुतल,तलातल,महातल, रसातल,पाताल
सन्देश- संवाद (समाद)
त्रिदिवहुँ- स्वर्गहुँ
प्रत्यूष- प्रातः काल
दानव-भोगिनी- राजाक सामान्य स्त्री
अभ्यास- योगाभ्यास
क्लेश- अविद्या-स्मिता-राग-द्वेष ओ अभिनिवेश
जनि- जन्म
भोगभू- भोगस्थान वा भूमि
भुजगभुवन- पाताल
नाक- स्वर्ग
सहस्रार- शिर स्थित सहस्रदल- कमलाकार चक्र
निर्मन्तु- निरपराध (निर्दोष)
फेरि- घुमाए
फेरि- पुनि
अन्तराय- विघ्न
याचकपटलीकल्प- याचकसमूहजेकाँ
रहस्योद्भेदसँ- गुप्तप्रीतिक प्रकाशसँ
लोकपति- नरेश
मध्यमलोक- मर्त्यभुवन
अधोभुवन- पाताल
नररिक्त- मनुष्यसँ रहित
तूर्ण- शीघ्र
उद्देश- उच्चारण
उपेन्द्र- वामन भगवान्
कन्याक- शुक्रक पुत्री देवयानीक
अर्थना- याचना
सपरिकर- परिवार परिजन सहित
पुरुषसूक्त- “ओँ सहस्रशीर्षा” इत्यादि सोड़ह ऋचा
दुइ- नारायण ओ तुर्वसु (निज दुइ बापक परिचय)
प्रतिग्रह- दान लेब
लाजहोम- लज्जाक हवन
लाजहोममे- लावासँ हवनमे
प्रणयकोपक- मानक
अपसारण-गति- हटएबाक उपाय
परमाणु- सूर्यक प्रभामे दृश्य रेणुक छठम भाग
द्वयणुक- दू परमाणु
पूगीफल- सुपारी
व्यङ्गयवचन- व्यङ्ग्यार्थ-बोधक वचन
दिवसचतुष्टय- चारि
गानचातुरी-विवरण- प्रकाशन
कान-सुधारस-वितरण- दान
चारिमशुचि- चारुतासँ भूषित
पाँकल- पाँकमे लागल
निमीलित- सङ्कुचित
कीलित- बद्ध (पीड़ित)
मदन-रुजा- रोग
निर्वांप- शान्ति करब
समाजित- पूजित
उद्भेद- विकास
चलदल- पीपड़
मन्मथ-घर्षण- प्रगल्भता
कल्पकल्प- कल्पसदृश
आशा-दिशा
विदग्ध- विकल, रसिक
सुरतवितान- क्रीड़ा-कलाप
वितानल- विस्तीर्ण कएल
संभोग- शृंगारक पूर्वाङ्ग वा केलि
विप्रलम्भ- शृङ्गारक उत्तराङ्ग वा विरह
अवसित- समाप्त
विधुर- विरहित (दीपक-विधु-विधुर)
अनवम- निर्दोष
विरस- निःस्पृह (विमुख)
पञ्चयज्ञ-ब्रह्मयज्ञ(वेद अध्ययन-अध्यापन),पितृयज्ञ (पितरक तर्पण ओ नित्यश्राद्ध),देवयज्ञ(हवन),भूतयज्ञ(वैश्वदेववलि), नृपज्ञ (अतिथि-सत्कार)
पर्व- पाबनि
आन्तरिक- अन्तःकरण
मञ्जूषा- पेटी
भूमिनेता- पृथ्वीपति
जरती- बृद्धा
वैजयन्त- इन्द्राणीसँ भूषित इन्द्रप्रासादक
पति-परिचार- स्वामीक सेवा
मन्त्र- विचार
कान्त- प्रिय
श्लाधापरायण- प्रशंसामे तत्पर
धव- धावा
मधुपा- मद्यपायिनी
भूरि- बहुत
सर्वसहासमेत- सभ (दुःखकेँ) सहनिहारि पृथ्वी सहित
कासर- महिसा
हिण्डोर- मचकी
शैलूष-कुहना- नटक माया

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