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मुंबई। 27 सितम्बर। [जितमोहन झा (जितू)] ओना त' माता के मुख्य रूप सँ 51 शक्तिपीठ मानल जायत अछि। मुदा देवी भागवत पुराण म' 108, कालिकापुराण म' 26, शिवचरित्र म' 51, दुर्गा सप्तशती आओर  तंत्रचूड़ामणि म' शक्तिपीठ सभक संख्या 52 बताओल गेल अछि। मुदा  संख्या सभक एहि मकड़जाल सँ यदि अपने बाहर निकलब त' पाएब कि सभ शक्तिपीठक स्थापना के बारे म' जे कथा बताओल जायत अछि ओ एकहि अछि।

हिन्दू धर्म पुराण सभक मुताविक जता - जता माँ सती के देहक टुकड़ा, वस्त्र वा आभूषण गिरल, ओता - ओता शक्तिपीठ अस्तित्व म' आयल, जे अत्यंत पावन तीर्थ कहलायल। ई तीर्थ पूरा भारतीय उपमहाद्वीप पर पसरल अछि। 

अपने क' बता दी  51 शक्तिपीठ म' भारत-विभाजन के बाद 5 शक्तिपीठ भारत म' कम भ' गेल आओर एखुनका भारत म' सिर्फ 42 शक्तिपीठ बचल अछि। 1 शक्तिपीठ पाकिस्तान म' चल गेल आओर 4 बांग्लादेश म' चल गेल। शेष 4 शक्तिपीठ म' 1 श्रीलंका, 1 तिब्बत आओर 2 नेपाल म' अछि।  

या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
नम: तस्ये नम: तस्ये नम: तस्ये नमो नम:||


शक्तिपीठ सभक सन्दर्भ म' पौराणिक कथा :- कहल जायत अछि कि प्रजापति दक्ष केर पुत्री बनी माता जगदम्बिका सती केर रूप म' जन्म लेलनि आओर बाद म' भगवान शिव सँ बिआह केलनि। दक्ष अप्पन जमाई शिव क' सदिखन निरादर भाव सँ देखैत रहथिन।

एक बेरक गप अछि, दक्ष प्रजापति कनखल (हरिद्वार) म' 'बृहस्पति सर्व' नामक यज्ञ केर आयोजन केलनि। ओहि यज्ञ म' ओ ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र समेत आन देवी-देवता सभके आमंत्रित केलनि, मुदा अप्पन बेटी - जमाई क' आमंत्रित नहि केलनि। सती बिन बजौना ओहि यज्ञ म' शामिल होयबाक लेल चल देली। 
यज्ञ-स्थल पहुंचबा पर सती अप्पन पिता दक्ष सँ शंकर जी क' आमंत्रित नहि करबाक कारण पुछलि आओर पिता स' उग्र विरोध प्रकट केलीह। एहि  पर दक्ष प्रजापति भगवान शंकर के बारे म' हुनका अपशब्द कहलनि। सती अप्पन पति के एहि अपमान क' बर्दास्त नहि क' पेलीह आओर यज्ञ-अग्नि कुंड म' कूदिके अप्पन प्राण त्यैग देलीह। 
भगवान शंकर क' जखन एहि दुर्घटना केर पता चलल त' क्रोध सँ हुनकर तेसर आँखि खुइज गेलनि। भगवान शंकर केर आदेश पर हुनकर गण सभक उग्र कोप सँ भयभीत सभ देवता आओर ऋषिगण यज्ञस्थल सँ परा गेलथि। 
भगवान शंकर यज्ञकुंड स' सती के पार्थिव देह क' निकैल अप्पन कन्हा  पर उठा तांडव नृत्य करे लागलथि। जाहिसँ पूरा सृष्टि म' हाहाकार मैच  गेल। पृथ्वी समेत तीनो लोक क' व्याकुल देख आओर देवता सभक अनुनय-विनय पर भगवान विष्णु सुदर्शन चक्र सँ सती के देह क' खण्ड - खण्ड करि धरती पर गिरा देलनि। 

जखन - जखन शिव नृत्य मुद्रा म' अप्पन पेर पटकैत रहथिन, भगवान विष्णु अप्पन चक्र सँ सती के देहक कुनू अंग काटी ओहिक टुकड़ा क' पृथ्वी पर गिरा दैत रहथिन। एहि प्रकारे जता - जता सती के देहक टुकड़ा, धारण कायल वस्त्र वा आभूषण गिरल, ओता - ओता शक्तिपीठ केर निर्माण भेल।  एहि तरहे कुल 51 स्थान पर माता केर शक्तिपीठ अस्तित्व म' आयल।

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