उम्र बाधक नञिजँ जीवनमे उत्साह बनल हो - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

उम्र बाधक नञिजँ जीवनमे उत्साह बनल हो

मुम्बई। 24 मार्च।[राज कुमार झा] उत्साह जीवनक संजीवनी सदृश होइछ। जीवनक यात्राकें व्यवस्थित बनेवाक हेतु दृढ़ संकल्प शक्ति आ चेतनाक जागरणसँ विकासक भव्य मार्ग स्वतः प्रशस्त होइत छैक, एहि हेतु उत्साहित संकल्प शक्तिक दृढ़ताकें विश्वासपूर्वक समाहित करबाक क्षमताकें संबर्द्धित करब आवश्यक। उम्रक प्रभाव शारिरीक शक्तिकें दुर्बल तऽ बना सकैत अछि, परन्तु मानसिक चिंतन एवं श्रेष्ठ कार्यक प्रति गहन प्रतिबद्धतामे बाधा कखनौ नञि बनि सकैत अछि। एहि लेल मानसिक रुपसँ सतत् जागृत रहबाक आवश्यकता अपेक्षित अछि । जँ हमरालोकनि उत्साह एवं उमंगकें समाहित करबाक संकल्पसँ संकल्पित होई, स्वतः ऊर्जा रुपी शक्तिक संचार संचरित होमय लगैत अछि जाहिसँ कार्य सम्पादनक प्रक्रिया केर परिणाम सुखद होइत अछि।

हमर मान्यता अछि जे कार्यक प्रति उत्साह एवं समर्पणकें व्यक्तिक उम्रसँ तुलना नञि कयल जेबाक चाही। उम्रकें बढ़लासँ शारीरिक शक्तिमे कमजोरी अवश्य अबैत अछि परन्तु अनेकों प्रकारक कार्य सम्पादनसँ स्वयंकें आत्मसंतुष्टिक अनुभव एवं जीवनमे सुख-शान्तिक भावसँ संतुष्टिक अनुभूति आंतरिक उत्साहकें बर्द्धित करैत अछि।

वर्त्तमान समयमे हजारों एवं लाखों व्यक्ति सेवानिवृत भऽ आर्थिक दृष्टि एवं शारिरीक रुपें स्वस्थ आ मजबुत छथि । एहि प्रकारक व्यक्ति क योगदानसँ समाज क उत्थान एवं सुधार संभव भऽ सकैत अछि। शिक्षा संस्थान, समाजसेवी संस्थान एवं सामाजिक उत्थानसँ जुड़ल अनेकों कार्यक्रमकें मार्गनिर्देशनक माध्यमें वरिष्ठ व्यक्तिक योगदानकें सेवा हेतु समाज लाभान्वित भऽ सकैत अछि।

अतः आवश्यकता अछि उम्रक अनुभव समाजकें पथ-प्रदर्शक केर भूमिकामे स्वीकार करैत, श्रेष्ठ समाजक निर्माणमे सहभागिताकें सम्मानपूर्वक स्वीकार करी। एहि कार्य हेतु वस्तुतः उम्र बाधक नहि भऽ सकैत अछि जँ जीवनमे उत्साहक समायोजन दृढ़ हो। इत्यलम्।