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मुम्बई। 22 फरवरी। वर्त्तमान समयमे फेसबुक व वाट्सएप पर मिथिला-मैथिलीसँ संबंधित अनावश्यक तथा अर्नगल बहस देखि अत्यन्त वेदना होइत अछि, एहि हेतु किछु विचार व्यक्त करबाक इच्छा भऽ रहल अछि। कोनो प्रकारक सामाजिक संगठनकें समुचित, व्यवस्थित तथा मर्यादित रूपसँ संचालित करबाक हेतु प्रथमतः अहं भावकें त्याग करब अनिवार्य हयब आवश्यक अछि एवम् श्रेष्ठ चिंतनकें प्राथमिकता दैत ओहि प्रकल्पकें अग्रसारित करबाक लक्ष्य निर्धारित करैत समाजोपयोगी सेवा सिद्धिक प्रति समर्पित हेबाक चाही । सामाजिक संगठनक सार्वभौमिक स्वरूपकें व्यक्तिगत द्वेष व मतभिन्नताके विलग रखबाक प्रयाससँ  संगठन निरंतर विकासक पथकें प्रशस्त करबामे सक्षम होइत अछि।

मैथिली आन्दोलनक इतिहास रहलैक अछि जे व्यापक दृष्टिकोणसँ संकल्पित कार्ययोजना एहि लेल सफल नहि भऽ पबैत अछि हेतुए जे अनावश्यक उपरौंझसँ विकासपरक परिचर्चा शून्यवत् भऽ जाइत अछि तथा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा प्रभावी भऽ, व्यापक विचारधाराकें तथा कार्यक्रमक रूपरेखाकें पाछाँ छोड़ि दैत अछि । फलतः संस्था व्यक्तिक अहंसँ जन्म लैतहिं मृत्युसज्जा पर अंतिम साँस गिनबाक हेतु विवश भऽ जाइत अछि।

विनम्रतापूर्वक निवेदन करब जे प्रवासी मैथिलक विश्वासकें सम्मान प्रदान करी संगहि मनोमालिन्यकें बिसरि आ अनावश्यक विवादसँ स्वयंकें तथा संस्थाकें बचेबाक विनम्र प्रयास करी जाहिसँ समाजक मध्य संस्थाक विश्वसनीयता बनल रहय। 

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