इच्छा (बीहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 5 नवंबर 2016

इच्छा (बीहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम"

प्रकाश बाबू सदिखन धिया - पूता सब संऽ कहैत रहैत छलखिन ! बाउ दिया - बाती अावय वला छैइक ओहि मे अहाँ सब पटक्का - छूर्छूरी नहि पोरब आ नहि हमरा अनवा लेल बाध्य करब ! परंच बाल मन इ बात कतय मानय बला अछि ? जखने कोनो दोसर धिया - पूता सब के दिया बाती'क लेल पटक्का - छूर्छूरी पोरबाक गप सूनैत छल कि ओहो सब बाबू संऽ आग्रह शुरु कय दैइत छल ! मुदा प्रकाश बाबू अपन ओहय पूरने बात पर प्रकाश देनाय प्रारंभ कऽ दैइत छलथि आ आब कनेक कऽ बच्चा सब के डरबऽ सेहो लगलथि फटक्का छूर्छूरी सब मे विसैला पदार्थ सबहक मिश्रण रहैत छैइक जेे फोरैत अछि ओ सब बिमार पड़ि जाइत अछि ! कतेक के तऽ आँखि आ कान सेहो खराब भऽ जाइत छैइक ! तांय ओहि सबहक अल्ल - बल्ल बस्तूक सेहन्ता नहि करि ! अहाँ सब लेल हम जे सब संऽ नीक मधूर हेतैक से आनि देव ओ खायब ! कि करत ओ बाल बोध हारि - थाकि मानिए गेल छल मधूर पर !

आय दिया बाती'क सांझ सबतरि चकमक - चकमक कुनो बच्चा गेंन बना के खेलैत अछि कियो बम फटक्का कियो रंग बिरंगी इजोत छोड़ि रहल छय जत्र - तत्र एकदम प्रकाश पसरि रहल छैइक परंच प्रकाश बाबू के अंतर आत्मा मे अंधकार पसरि रहल छैन्ह ! सब बच्चा दिया बाती के आनंद लैत छल आ हिनक नेना ओकरा सब के निहारि रहल छल एक टक  ! हिनकर अंतर आत्मा कलपि रहल छल आखिर एखन बाल-मन हमरा प्रति कि सोचैत होयत ओह इ हमरहि गलती थिक !

नहि - - - धिया - पूता के एतेक नहि परतारवाक चाहि ! जिनगी मे इ दिन सदिखन नहि अबैत छैइक अपन नेनपन आँखिक सोंझा झलकऽ लगैत छैन्ह ! आब हमरा कहाँ इच्छा होइत अछि ! कम स कम एकर सबहक इच्छा पर प्रतिबंध नहि हेवाक चाहि नेनो सबहक इच्छा के पूर्ति हेवाक चाहि ! खैैर जे भेलय से भेलय एहि मे एकर सबहक इच्छा पूर्ति नहि कय सकलहु परंच छठि मे रंग - विरंगक फूलझरी नेना सब के झहरायब आ इच्छा के पूर्ति करब !

    वी०सी०झा"बमबम"
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