बुड़िबक (बीहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 5 नवंबर 2016

बुड़िबक (बीहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम"

~ एम्हर सुनह हउ बचा
~ हं कक्का ! कि भेल कहु ?

~ हउ तोरा सबदिन गामहि मे देखैत छियह ?
~ हम गामहि मे रहिते छी त किआक ने देखबय ?

~ मुदा तूं एखन करैत कि छऽ एतय !
~ से तऽ अहाँ'क सोंजहि मे छी , देखिए रहल छी डालना परसि रहल छी ( भोज मे ) सें !

~ नय - नय हमर कहक भाव छल जे तों एखन धड़ि गाम मे कि करैत छहक ?
~ बहुत रास काज समाजिक संऽ लऽ  परिवारिक काज धड़ि !

~ ओह ! हमर कहवाक इ तात्पर्य जे पढ़वो - लिखवो करैत छहक कि ? ओन्हिए
~ हं ! पी०एचडी० कऽ रहल छियै एखन !

~ अच्छऽ ! मैट्रिक मे कोन डिविजन संऽ पास केने छलह ?
~ थर्ड डिविजन कक्का !

~ आब कहऽ जाँउ मैट्रिक नीक डिविजन संऽ पास केने रहितऽ त एखन धरि कतहु नोकरी लागल रहितऽ ! इ पी०एचडी० करवाक कोन काज छलह से कहऽ ? जे बुड़िबक होइत अछि से सब करय य इ सब कि बुझलहक कि ने ?
~ जखन बुड़िबक छी तऽ बूझबय कोना ?


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