बाढ़ि (बिहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 9 अगस्त 2016

बाढ़ि (बिहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम"

~ एंऽ रउ लोक सब कहैत छैइक जे कमलाजी मे बड्ड पानि एलहि अछि , से एहि बेर बाढ़ि एवय करतहि !

~ भगवान भल करहु जे बाढ़ि आबि जाय !

~ एंऽ रउ लोक सब डेरायल छहि आ तूं कहैत छहि जे भने आबहु ?

~ एह नहि बुझलहि कहाँदनि बाढ़ि अबय छय तऽ इस्कूल सब बंद भऽ जाइत छहि , सगरे पानि संऽ भरल रहैत छहि खूब हेलीकपट्टर सब मेघ मे उड़ैत रहैत छहि !

~ मूदा लोक सब बाढ़ि दहा - भसीया सेहो ने जाइत छहि ?

~ किआ केरा डंपोर के नाउ जे रहैत छहि से ? ओहि पर झूलबो त खूब करब आर त आर माछो खूब मारब ने !

~ हे ओ मांछ खयला संऽ लोक बेमारो भऽ जाइत छहि से बाबू कहैत छलखिन !

~ फूसियों कहैत हेथुन तोरा डरबय द्वारे !

~ अच्छ से बात छहि ! तखन चल ने बान्ह मे भूर क देबय तखन तऽ अपने बाढ़ि आबि जेतहु न रउ ?

~ नय नय ओ बड़का आदमी सब अपने क दय छय !


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