सहरसा-थरबिटिया छोटी रेल लाईन, सांझ होइते एहि रुट सँ सफर नै करैत छथि महिला - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 22 अगस्त 2016

सहरसा-थरबिटिया छोटी रेल लाईन, सांझ होइते एहि रुट सँ सफर नै करैत छथि महिला

सहरसा। 22 अगस्त। देश म' बुलेट ट्रेन चलेबाक तैयारी भ' रहल अछि। ऐना मेँ कोसी केँ इलाका एखनहुँ आदिमयुग केँ तरह रेलक क्षेत्र मेँ छुक -छुक गाड़ी, रेल गाड़ी केँ तर्ज पर चली रहल अछि। सहरसा-थरबिटिया छोटी रेल लाईन कोसी क्षेत्र म' सिर्फ इये अवशेष के तौर पर बचल अछि। एहि रेल खंड मेँ ट्रेन सभक रफ्तार करीब 20 किमी प्रति घंटा रहैत अछि। एहि रेल खंड केँ ट्रेन म' नै कुनु रोशनी, नै पैन आर नै कुनु सुरक्षा केँ गारंटी रहैत अछि। इए कारण अछि कि सांझ केँ बाद एहि रेलखंड पर महिला सभ यात्रा करबा सँ बचैत छथि।

एहिरूट पर 40 किमी केँ सफर तय करबाक लेल अमूमन दुइ घंटा लागैत अछि। एहि रेल खंड मेँ चले बला पैसेंजर ट्रेन म' मात्र चार सँ पांच बोगी रहैत अछि। एहि सभ ट्रेन म' दिन मेँ अपने कहुंना सफर क' लेब, मुदा  अगर राति क' एहि रेल खंड मेँ सफर करबाक लेल सावधान रहे परत। कारण पूरा ट्रेन मेँ कुनू लाईट जरैत नै भेटत। किएक जे बोगी म' लागल  लाईट या तेँ बेकार व खराब भेटत या ट्रेन केँ स्पीडक कारण बैट्री पूरा तरहे  चार्ज नै भ' पाबैत छैक। जखनकि सच्चाई ई अछि कि ट्रेन केँ बोगी म' बैटरी रैहते नै अछि आर बोगी केँ स्थिति पूरा तरहे जर्जर रहैत अछि।

एहि रेल खंड पर अगर अपने परिवार के संग सफर क' रहल छी तेँ अपने केँ पूरा रास्ता सदिखन दुर्घटना घटबाक आशंका सँ भय व दहशत केँ माहौल मेँ रहे परत। पूरा बोगी अन्हार रहैत छैक। ट्रेन जगह-जगह अकारण रुकैत रहैत छैक। ट्रेन मेँ अवांछित तत्व केर जमावाड़ा लागल रहैत छैक। जाहि पर नहिये रेल प्रशासन केँ नियंत्रण रहैत अछि नहिये पुलिस के। रेल पुलिस सेहो अवांछित तत्व सभक समक्ष नि.सहाय देखार दैत अछि। दुइ चारि दिन पहिने सुपौल स्टेशन पर रति के करीब ग्यारह बजे सहरसा केँ लेल खुजाई बला पैसेंजर ट्रेन मेँ एक महिला व एक युवा के बीच मारपीट भेल लेकिन रेल पुलिस तमाशबीन बनल रहल। महिला व युवा केँ बीच पैसाक लेनदेन केँ कारण मारपीट भेल छल। ट्रेन म' यात्रा क रहल अमित सिंह कहला कि हम सब तीन चारि साथी छलौ। पहिने तेँ हम सब डरा गेलहुँ कि कहीं ओ सब हमरा सभक संग लूटपाट नै करैथ। ओ सब आपस मेँ झगरा करि गेट के लग बैसल रहला। रेल पुलिस हल्ला सुनि आयल जरूर मुदा चुपचाप रही वापस भ' गेल। सहरसा तक हमरा सभ के दम साधी केँ यात्रा करब मजबूरी बनल रहल।