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सहरसा। 25 अगस्त। [राहुल बनगाँव ] मिथिलाक सुप्रसिद्ध गाम, विद्वान् आ कुशल जनशक्तिक मूल भूमि बनगाँव, सहरसा जिला केँ कृष्ण जन्मोत्स्व लगभग 1700 ई. सँ निरंतर मनाओल जायत अछि। कहियो गामक एकमात्र ब्राह्मण परिवार (मूल सरिसवे) द्वारा एहि जन्मोत्स्व केँ शुरूआत कायल गेल छल जकरा बाद मेँ बाबाजी (लक्ष्मीनाथ गोसाईं) केँ सुझाव - निर्देशानुसार समूचा गाम मिलिजुलि कय मनाबय लागल। तहिया सँ कृष्णाष्टमी एहि गामक समस्त जनमानसक मुख्य पूजाक रूप मे स्थापित होएबाक किंवदन्ति जगजाहिर अछि।

बनगाँव केँ आसपड़ोसक गाम सँ सेहो विशाल संख्या मे ग्रामीण सब एहि ठामक कृष्णाष्टमी देखय लेल अबैत छथि। ई मेला 3 दिन धरि चलैत अछि। एहि अवसर पर सांस्कृतिक नृत्य, नाटक आदिक आयोजन सेहो कैल जायत अछि। तहिना एहि अवसर पर बाबाजीक मनपसन्द खेल कबड्डीक आयोजन सेहो कैल जायत अछि, जाहि मेँ गामक लोक सामूहिक रूप सँ भाग लैत छैथ।

हर बरख कृष्णाष्टमीक सुअवसर पर भगवान् श्रीकृष्ण समेत दर्जनों भरी भगवान् केँ नव मूर्ति बनाय विध - विधानपूर्वक पूजा - अर्चना कैल जायत अछि। बिसर्जन उपरान्त एहि ठाम कीर्तन आरंभ होइत अछि जे अनंत पूजा धरि चलैत अछि।

कैल्ह बुद्धवार दिन 24 अगस्त केँ बनगाँव बाबाजी कुटी म' आयोजित तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी मेलाक उद्घाटन संत खयाली ख़ाँ केँ बंगला पर मुख्य अतिथि छातापुर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू एवं पूर्व विधायक सहरसा आ बनगाँव केँ दुनु पंचायतक प्रतिनधि द्वारा फीता काटी  कायल गेल। बाद मेँ उपस्थित गणमान्य लोकनि अप्पन वक्तव्य मेँ कहला कि बनगाँव साधु - संतक  नगरी थीक जतय संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं समान महासंत निवास केलनि। सभ गोटा युवा पीढी म' नशाक बढैत प्रचलन पर दु:ख प्रकट करैत अपील केलनि जे नशा मुक्त समाज बनाउ आ गामक ऐतिहासिक महिमा केँ बरकरार राखू। बाबा लक्ष्मीनाथ गोसाईं द्वारा बनगाँव केँ कृष्ण जन्माष्टमी मेलाक सामूहिक रुपे शुरूआत कैल गेल छल। ओ लोक सब सँ मेला मे आपसी भाइचारा आ सौहार्द्रता बनेने रहबाक लेल सेहो आग्रह केलनि आ युवा वर्ग सँ सही मार्ग पर अग्रसर होयबाक संकल्प दियौलनि।

जन्माष्टमीक शुभ अवसरपर बनगाँव नगरी भक्तिमय वातावरण मे आकंठ डूबल अछि। भगवान् श्री कृष्ण केर अवतार भाद्रपद केर कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथिक मध्यरात्रिकाल म' अत्याचारी कंस केँ विनाश करबाक लेल भेल छलन्हि। भगवान् स्वयं एहि पृथ्वी पर आजुक दिवस अवतरित भेलाह ताहि कारण आइ कृष्ण जन्माष्टमीक रूप म' मनाओल जाइत अछि। भगवान् कान्हाक मोहक छवि आर रासलीला देखबाक लेल दूर-दूर सँ लोक सब बनगाँव पहुंच रहल छथि। 

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