नीम नेबो (बिहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 25 जुलाई 2016

नीम नेबो (बिहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम"

~ हेऽ हेऽ हेऽ
~ कि भेलहु गऽइ

~ तार जकाँ भऽ गेलय ! भगवान एकरा बुद्धि कहिया देथिन से नहि कहि ?
~ कि भऽ गेलउ जे तूँ एना माँथा पर हाथ दऽ देलहि ?

~ कि होयत ? एँऽ रउ तोरा एतेक खयवा'क लेल अतराहित भेल जाइत छलहु ?
~ तऽ कि एखन नहि खयवाक चाहि कि ? हम प्रसाद देखलिए तऽ मुँह मऽ दऽ देलिए ! एहि मऽ कि गलती कऽ देलिए से कह ?

~ हरउ खैयवा'क लेल ने खीर - घौरजौर बनेलिए कि फेकय लेल ? मुदा पहिने तोरा नीम - नेबो लेवा'क चाही ने ?
~ नेबो तऽ ठीक छय मुदा नीम हमरा नय अरघैत अछि ! ओना जे नीम - नेबो नहि लेतय तऽ कि भय जेतैक ?

~ एहन गप लोक नहि बजैत अछि ! नीम सऽ बिषहारा'क दाँत तीत होइत छैन्ह आ नेबो संऽ दाँत कोथ !
~ खेबय हम आ दाँत हुनकर कोना कोथ हेतनि !

~ एहन लोक मानैत एलहि अछि ! अपन सबहक परंपरा छैइक तांय हमहु सब मानैत छी !
~ बेस तखन ला खाऽ लैत छी !
धन्य इ परंपरा

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