आरक्षण मुक्त भारत - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 20 मई 2016

आरक्षण मुक्त भारत

          आज एक पोस्ट देख के बहुत दुःख हुआ की किस तरह आरक्षण हमारे देश को विकलांग करता जा रहा है और नेता इसके ऊपर राजनीती करने से बाज नही आ रहे।आरक्षण के कारन देश के बहुत सारे होनहार बच्चे ऐसे है जो अपनी शैक्षणिक योग्यता के होने के बावजूद भी एक अच्छी नौकरी से वंछित रह जाते है।
                 मित्रो इससे किसको नुकशान हो रहा है?क्या आप बता सकते है?मैं बताता हूँ इससे देश को नुकशान हो रहा है।और क्यों और कैसे हो रहा है वो भी मैं बताता हूँ आज कल जो सुर्ख़ियो में चल रहा है और शाबाशी हाशिल कर रही है क्या आपको पता है इनसे भी ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले बच्चे असफल हो गए है,इसका जीता जागता सबूत है अंकित श्रीवास्तव द्वारा किये गए एक पोस्ट।जिसमे लिखा है की मैं अंकित श्रीवास्तव मैंने भी UPSC का पेपर दिया था जिसमे मुझे UPSC Pre पेपर में 230.76 अंक प्राप्त हुए और टीना दाबी के 195.39 अंक और इसके बावजूद भी मैं असफल रहा और टीना सफल रही क्योंकि मैं सामान्य श्रेणी से था मुझे कोई आरक्षण नही मिला इसलिए।
देखा मित्रो अगर आज देश में आरक्षण नही होता तो आज हमारे देश को एक सही और योग्य व्यक्ति मिलता,और आरक्षण से आगे आए लोग कभी नज़र ही नही आते।दोस्तों मैं किसी पे ऊँगली नही उठा रहा ये मेरे दिल का दर्द है जो आज बयां कर रहा हूँ।
                मित्रो सच कहु तो कभी कभी मन करता है पढाई लिखाई छोर के सब्जी या फल बेचू और फालतू के झंझट से बाज आऊं क्योंकि क्या होगा इस पढाई का जिससे जो चाहो नही मिलेगा क्योंकि आरक्षण आपको जितने नही देगा।
           अगर किसी को मेरी बातो से ठेस पहुची हो तो छमा चाहूँगा क्योंकि मेरे शब्द किसी के ऊपर कटाक्ष नही है।