मिथिला विकास या अप्पन विकास - मिथिला दैनिक

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रविवार, 3 अप्रैल 2016

मिथिला विकास या अप्पन विकास

समस्त मिथलांचल वासी को मेरा प्रणाम,
      आज समस्त मिथलांचल के बुद्दिजीवियों के लिए कुछ कहना चाहता हूँ,कृपया इसे ध्यान से और गौर से पढ़े।
      आप सभी लोगो ने सुना होगा की बहुत सारे लोग मिथलांचल को एक करने के लिए और मिथिलांचल का विकास करने के लिए संस्था चला रहे है।लेकिन क्या आपको पता है आज पुरे भारत देश में जितनी संस्था मिथिला,मैथिल,मिथलांचल,मैथिलि के नाम से है उतनी संस्थान किसी और की नही होगी।
      दोस्तों ये जितनी भी संस्था है उसमे से 95% का उद्देश्य मिथिला निर्माण या मिथिला विकास है,इन संस्थानों में कुछ लोग क्या 85% से ज्यादा लोग अपने फायदे के लिए चला रहे है।लोग संस्थान ऐसे खोल लेते है जैसे की कोई कंपनी खोल रहे हो।
      दोस्तों आज इस में से कुछ संस्थान लोगो से पैसे लेकर विद्यापति जी के नाम पर समारोह कर लेते है और अपनी अपनी जेबे भर लेते है।
      दोस्तों मेरी बाते किसी को ठेस पहुचाने के लिए नही बल्कि एक सलाह है की अगर इन संस्थानों का मकसद एक है तो ये सब एक साथ काम क्यों नही करते?अगर देश में या किसी राज्य में कोई प्रोग्राम या कोई आंदोलन करते है तो सब को एक साथ आना चाहिए और अगर एक संस्थान वाले कोई आंदोलन करते है तो उनका साथ दूसरे संस्थान वालो को भी देना चाहिए जिससे उनकी मजबूती और बढ़ेगी।
       जैसे को कुछ दिन पहले मिथिला राज्य निर्माण के नाम से अनसन किया गया अगर उसमे बाकि के जो मिथिला राज्य निर्माण वाले संस्थान है उसमे वो भी सरीक होते तो इनकी और मजबूती बढ़ जाती,और साथ में मनोबल भी बढ़ जाता।
       आशा करता हूँ की आप लोगो को मेरी बाते समझ में आ गयी होंगी और किसी को मेरी बातो से ठेस पहुची हो तो छमा चाहता हूँ।
धन्यवाद।