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दिल्ली मे मैथिली पठन-पाठन केँ मान्यता
     शिक्षारूपी तपस्याक फल 'अनुशासन' होइत छैक। अनुशासनक सर्वोत्तम आ प्राकृतिक शिक्षा मातृभाषा मे सर्वोत्कृष्ट होइत छैक। भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक तथा अनुसंधान परिषद् द्वारा जाहि शिक्षा पद्धति सँ विद्यालय मे पठन-पाठन कैल जाइछ ताहि मे सर्वप्रथम 'भाषा' ज्ञान अबैत छैक, क्रमश: गणित, विज्ञान, समाजिक शिक्षा, कला (ललितकला, संगीत, गायन, नृत्य, आदि) शिक्षा, स्वास्थ्य आ शारीरिक शिक्षा प्रारंभिक अवस्था केर विषय-वस्तु होइत छैक।
दिल्ली विद्यापति सेवा संघ केर प्रयास दिल्ली शिक्षा बोर्ड, दिल्ली विधानसभा, भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक तथा अनुसंधान परिषद् सहित सम्बन्धित जनसमुदाय तथा जनप्रतिनिधि सबहक संग 'भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक न्याय' पेबाक लेल आइ दिल्ली क्षेत्र मे रहि रहल लाखों मैथिल (मैथिलीभाषी) लेल विद्यालय मे मैथिली विषय पढेबाक माँग पूरा करौलनि। कोनो माँग केँ पूरा करबाक लेल बहुत रास आधार सेहो पूरा करय पडैत छैक। जेना, मैथिली मे पढाई केकरा लेल.... कतय... कतेक संख्या... संवैधानिक आधार कि.... भाषा-विज्ञान तथा शिक्षण-प्रशिक्षण विषय सामग्री बनेनिहार विज्ञ टोलीक निर्णय कि.... विभिन्न समय मे विधायिका केर एहि दिशा मे कि कहब भेल, कि कहियो न्यायपालिका द्वारा कोनो रूलिंग देल गेल, इत्यादि। हम जानबाक प्रयास केलहुँ जे उपरोक्त संस्थान अखिल भारतीय मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति केर सुनिश्चित अगुवाई, मार्गदर्शन आ सहयोग सँ कोना-कोना एतेक पैघ माँग केँ पूरा करौलनि, एहि संवादक संग किछु रास फोटो-कपी दऽ रहल छी जाहि सँ पाठककेँ सेहो हमरहि दृष्टि सँ समस्त आधार आ विज्ञ जानकारी ग्रहण करबाक पूरा अवसर भेटय।
संछिप्त मे, भारतीय गणराज्य जतय संविधान केर शासन अछि, ओ एहि लेल सर्वथा न्याय दैत अछि अनुच्छेद ३५०ए मे, सबकेँ मातृभाषा मे शिक्षा पेबाक अधिकार अछि। यैह आधार पर बिहार जतय मूल मिथिला अछि ताहि मे मैथिली माध्यम सँ मैथिलीभाषीकेँ पठन-पाठन लेल इन्तजाम करबाक कानूनी संघर्ष डा. जयकान्त मिश्र द्वारा उच्च आ सर्वोच्च न्यायालय सब ठाम जीतल गेल, तथापि बिहार सरकार आइ धरि कोनो खास व्यवस्थापन नहि मिला सकल अछि, बस कय रहल छी आ करबाक अछि कहैत मात्र अन्ठबैत जा रहल अछि। तहिना भिन्न-भिन्न समय मे भाषा-विज्ञान तथा विषय-वस्तु निर्माण समिति द्वारा सेहो मातृभाषा केर शिक्षा माध्यम सर्वोत्तम रहल कहल गेल अछि। भारतक अन्य-अन्य राज्य मे सेहो जे कियो मातृभाषी अपन मातृभाषाक माध्यम सँ अपन धिया-पुता केँ शिक्षा लेल विद्यालय केर व्यवस्था करौने छथि वा विद्यार्थीक संख्या अनुरूप शिक्षक केर इन्तजाम करौने छथि। एहि मामिला मे मैथिल भारतीय संविधानक मान्यता प्राप्त भाषा रहितो अपन स्वयंकेर पछता बुद्धि केर कारण पछुआयल छथि। हालहि २००३ मे संविधानक आठम अनुसूची मे एकरा सम्मानित केलाक बाद चारूकात सुरफुरी जरुर छैक मुदा जे गुदगुदी हेबाक चाही से जेना अधमरू बनि गेल छैक।
मैथिली मे पठन-पाठन हेतु पाठ्य-सामग्रीक विकास दोसर चुनौतीपूर्ण कार्य छैक। जँ हिन्दी पुस्तक केँ अनुवाद करैत मैथिली पढेबैक तऽ भाषाक ज्ञान हेतैक, मुदा मिथिला आ मैथिल अस्मिताक जानकारी केर सर्वथा अभावे रहि जेतैक जाहि सँ अपन आत्मसम्मान बढेबाक मातृभाषाक योगदान वला नीति विफल रहि जेतैक। अत: जरुरत एहि बातक छैक जे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक प्रतिनिधि अनुप चौधरी तथा मनोज झा द्वारा पटना मे अनशन केलाक उपरान्त राज्य शिक्षा निदेशालय जाहि बातक समझौता केलकैक तेकर पाछू संघर्ष बढबैत पटना मे सेहो मैथिली केँ स्थापित करैत पाठ्य-सामग्री विकास कैल जाय। दिल्ली मे एहि माँग केँ पूरा होइते बनारस, नागपुर, मुंबई, चेन्नइ, पंजाब, राजस्थान, कलकत्ता, आसाम सहित समस्त देश मे मैथिली केँ स्थापित कैल जा सकतैक। तहिना केन्द्रिय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा सेहो मैथिली विषय केँ मान्यता देबाक कार्य शीघ्र हेतैक। ई मानल बात छैक, जखनहि अपन भाषा, अपन भेष, अपन मूल्य, अपन सिद्धान्त सँ लोक परिचित होइत अछि तखनहि ओकर आत्मसम्मान सेहो अभिवृद्धि पबैत छैक।
दिल्ली विद्यापति सेवा संघ केँ एतेक पैघ सफलता लेल धन्यवाद देनाय प्रत्येक मैथिलक फर्ज बुझा रहल अछि। अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति आ दिल्ली भरि मे पंजीकृत सैकडों संघ-संस्था संग सहकार्य करैत आगामी सर्वे मे प्रत्येक मैथिलीभाषी परिवार द्वारा अपन बाल-बालिका केँ मैथिली विषय पढेबाक लेल अनुरोध पत्र उत्तरी दिल्ली नगर निगम केर हरेक विद्यालय मे जमा हेबाक चाही। एहि सँ लाखों लोक हेतु रोजगार सेहो बढतैक। लेखक, विचारक, टंकक, मुद्रक, छापा, शिक्षक, आदि केर बड पैघ वैकेन्सी (रोजगार सूचना) निकलतैक। मैथिली रजनी-सजनी केर भाषा सँ रोजी-रोटीक भाषा बनतैक, ई मिथिलावासी लेल बड पैघ कल्याणक विषय होयत।
जय मैथिली! जय मिथिला!!

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