कविता - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 17 जून 2014

कविता

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डारि + पात= की हेतै
लोक – लोक= की हेतै
जानवर x मनुख=की हेतै
सुख / दुख=की हेतै
हँसी < हँसी=की हेतै
नोर > आँखि=की हेतै