नव गीत - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 26 अप्रैल 2014

नव गीत




प्रीतक रीत
बिसरल छी

हारि केखनो नै मानब
नोर केखनो नै गानब
हँसी मुदा बिला रहल
जीतक रीत
बिसरल छी

ठोरपर नोर एलै
दुआरिपर भोर एलै
मुदा साँझक बाट जोहैत
मीतक प्रीत
बिसरल छी

पाबनि सभटा बीतल अछि
समय आगिसँ भीजल अछि
जरैत जीव कहि रहल मुदा
गीतक रीत
बिसरल छी