- मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 17 मई 2013


किछु गद्य कविता


नेता, कुकुर आ साहित्यकार तीनू बान्हल अछि खुट्टामे। नेता भ्रष्टाचारक खुट्टामे, कुकुर अपन चालिकेँ खुट्टामे आ साहित्यकार नेता आ कुकुर दूनूक खुट्टामे।


शङ्का

शङ्का चारि प्रकारक होइत छै,
आशंका
लघु शङ्का
दीर्घ शङ्का
अस्तित्व शङ्का

अहाँ कोन शङ्कासँ ग्रस्त छी ??????

संबंध

नेता हो तँ अफजल जकाँ जे संसदकेँ नीक लगैए। अभिनेता हो तँ संसद जकाँ जे वास्तविकताकेँ नुकबैए।

वाद

भूख की होइत छैक। यथार्थ की कल्पना ? अथवा एकरा एना कहिऔ जे भूखकेँ कोन वादमे बन्हबै ?

यथार्थवाद
तदर्थवाद
अभिव्यंजनावाद
नवचेतनावाद
वा की ??????????????.......