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मैथिलीक समानान्तर रंगमंचक जन्मदाता: सभसँ बेसी मैथिली नाटकक निर्देशन: राजरोगसँ दूर: जातीय रंगमंचक विरुद्ध बेचन ठाकुर जीक संघर्ष (मुन्नाजी आ अजित आजादक सोझाँमे मलंगिया जीक भड़ैत प्रकाश झा जकरा लेल कहै छथि- भरि दिन केश काटैत रहै छल- पाठकक लेल ई सूचना जे जातिवादी रंगमंचसँ जुड़ल लोक केश काटनाइकेँ खराप बुझै छथि, संगहि ईहो सूचना जे बेचन ठाकुर सैम पित्रोदा (जे भारतमे टेक्नोलोजी मिशनक प्रारम्भ केलन्हि) सन बरही जातिक छथि, जातिवादी रंगमंचकर्मी लोकनि हुनकर गौँआ अंतिकाक सहायक सम्पादक श्रीधरमसँ कन्फर्म कऽ सकै छथि): हिनका नामसँ कतेको रेकॉर्ड दर्ज अछि, जेना संस्कृतक बाद पहिल बेर मैथिलीमे भरत नाट्यशास्त्रक रंगमंचक संकल्पनाक अनुसार नाटक, मात्र महिला नाट्यकर्मीक माध्यमसँ ६-६ घण्टासँ ऊपरक नाटकक मंचन (जखनकि जातिवादी नाट्यकर्मी अदहा घण्टा- ४५ मिनटक नाटकक निष्पादन लेल महिला रंगकर्मीक लेल बौखैत रहै छथि, कारण हिनकर सभक बलगोविना प्रवृत्तिक कारण आ कुकुरचालिक कारण बहुत रास महिला मैथिली नाटकसँ दूर भागि गेलीह। मुदा सभ कान्तिदर्शीकेँ जातिवादिताक कोप, गारि गंजन सुनऽ पड़ै छै, मुदा बेचन ठाकुर एक्केटा छथि...हमरा सभ नाट्यकर्मी, रंगमंचकर्मी, नाटककारकेँ हुनकर मैथिली समानान्तर रंगमंच, जे २५-३० सालसँ अनवरत चलि रहल अछि, पर गर्व अछि। मिथिलाक समाज जँ जातिवादी रंगमंचक बावजूद नै टूटल अछि तँ तकर कारण अछि बेचन ठाकुर जीक मैथिली समानान्तर रंगमंच... आ से मलंगिया जीक काल्हि जन्मल भड़ैत सभकेँ नै बुझल छन्हि, मुदा मलंगिया केँ बुझल छन्हि जे हुनकासँ बेशी संख्यात्मक आ गुणात्मक नाटक/ एकांकी बेचन जीक लिखल छन्हि आ ओइ बेचन ठाकुर आ गुणनाथ झाक एकांकी मैथिली एकांकी संग्रहमे नै देलन्हि.. एकलव्यक औंठा द्रोण कटबा लेलन्हि, मुदा एतऽ तँ गुरुक औंठा मलंगियाजी कटबा रहल छथि..

Gajendra Thakur मलंगिया जीक एकटा बयान आयल रहए, जे विदेहमे सेहो आएल रहए, ओ कहने रहथि जे नेपाली नाटकक स्थिति बड्ड दयनीय छै, मुदा ओतुक्का रंगकर्मीक प्रशंसा केने रहथि। विदेहक ऐ न्यूजक बाद हमरा जनकपुरमे हंगामा भेल रहै आ हमरो मेल पर नेपालसँ ढेर रास मेल आएल रहए, ई लिखैत जे मलंगिया जी जइ थारीमे खेलन्हि ओहीमे छेद केलन्हि। हुनकर मैथिली एकांकी संग्रहमे संकलित एकांकी सभक संकलन हुनकर नाटकीय सोचपर प्रश्न लगबैत अछि। ओइमे किछु एहेन एकांकी राखल गेल जे कहियो कोनो रूपमे नाटककार/ रंगमंचकर्मी नै रहथि; ओतै बहुत रास श्रेष्ठ नाटककार जातिक आधारपर बारल गेलाह। ओइ संग्रहक (साहित्य अकादेमीसँ २००३ ई.मे प्रकाशित)क भूमिकामे मलंगिया जीक अभद्रता ओही तरहेँ अछि जेना २०१० ई.मे प्रकाशित हुनकर छुतहा घैलमे अछि.. हुनकर जातिगत कट्टरता आर बढ़ल अछि। हुनकर सोच आर घटल अछि।

Ram Bharos Kapari Bhramar Sthiti aab spast bharahal aichh.Chintaniya aa bicharniye bat aichh. Ashish Anchinhar मलंगिया जीक नाटक विद्वेष बढ़बैत अछि, हुनकर राड़ आ शोल्कन्हक प्रति आ ओकर भाषाक प्रति घृणा गएर ब्राह्म्ण केँ मैथिलीस‘ं दूर केलक अछि। Monday at 09:08 · Like · 3

Lalit Kumar Jha SRIMAN APAN SOCH BADHAU DOSAR KE SOCHAK CHINTA JUNI KARU Monday at 09:10 · Like · 1


Ashish Anchinhar जहिया गजेन्द्र ठाकुर आ भ्रमर अपन सोच बदलि लेता तहिया मैथिली मरि जाएत। Monday at 09:12 · Like · 4

Ashish Anchinhar Lalit Kumar Jha---ठीके कहैत छी भाइ ओना एकटा गदहाक मर्म दोसरे बड़का गदहा बुझि सकैए। एहि मामिलामे मतलब गदहपनमे अहाँ हमर सीनियर भेलहुँ। सधन्यवाद भाइ|... Monday at 09:14 · Like · 4

Ashish Anchinhar गजेन्द्र ठाकुर- छुतहर/ छुतहर घैल/ छुतहा घैल छुतहा घैल महेन्द्र मलंगियाक नवीन नाटकक नाम छन्हि। ऐ छोटसन नाटकक भूमिका ओ दस पन्नामे लिखने छथि। पहिने ऐ भूमिकापर आउ। हुनका कष्ट छन्हि जे रमानन्द झा “रमण” हुनका सुझाव देलखिन्ह जे “छुतहर घैल”केँ मात्र “छुतहर” कहल जाइ छै। से ओ तीन टा गप उठेलन्हि- पहिल- “तों कहियो पोथी के लेखी, हम कहियो अँखियन के देखी।” दोसर- यात्री जीक विलाप कविता- “काते रहै छी जनु घैल छुतहर आहि रे हम अभागलि कत बड़।” आ कहै छथि जे ओइ कविताक विधवा आ ऐ नाटकक कबूतरी देवीकेँ शिवक महेश्वरो सूत्र आ पाणिनीक दश लकारसँ (वैदिक संस्कृत लेल पाणिनी १२ लकार आ लौकिक संस्कृत लेल दस लकार निर्धारित कएने छथि..खएर…) कोन मतलब छै? तेसर ओ अपन स्थितिकेँ कापरनिकस सन भेल कहैत छथि, जे लोकक कहलासँ की हेतै आ गाम-घरमे लोक “छुतहर घैल” बजिते छैक!! मुदा ऐ तीनू बिन्दुपर तीनू तर्क मलंगियाजीक विरुद्ध जाइ छन्हि। “अँखियन देखी” आ लोकव्यवहार “छुतहर” मात्र कहल जाइत देखलक आ सुनलक अछि, घैलचीपर छुतहरकेँ अहाँ राखि सकै छी? लोइटसँ बड़ैबमे पान पटाओल जाइ छै तखन मलंगियाजीक हिसाबे ओकरा “लोइट घैल” कहबै। घैल, सुराही, कोहा, तौला, छुतहर, लोइट, खापड़ि, कुड़नी, कुरवाड़, कोसिया, सरबा, सोबरना ऐ सभ बौस्तुक अलग नामकरण छै। फूलचन्द्र मिश्र “रमण” (प्रायः फूलचन्द्रजी “छुतहा घैल” शब्दक सुझाव हँसीमे देने हेथिन्ह, आ जँ नै तँ ई एकटा नव भाषाक नव शब्द अछि!!)क सुझाव मानैत मलंगिया जी “छुतहर घैल” केँ “छुतहा घैल” कऽ देलन्हि, ई ऐ गपक द्योतक जे हुनका गलतीक अनुभव भऽ गेलन्हि मुदा रमानन्द झा “रमण”क गप मानि लेने छोट भऽ जइतथि से खुट्टा अपना हिसाबे गाड़ि देलन्हि। आ बादमे रमानन्द झा “रमण” चेतना समितिसँ ओइ पोथीकेँ छपेबाक आग्रह केलखिन्ह आ, चेतना समिति मात्र २५टा प्रति दैतन्हि तेँ ओ अपन संस्थासँ एकरा छपबेलन्हि, ऐ सभसँ पठककेँ कोन सरोकार? आब आउ यात्रीजीक गपपर, यात्रीजीकेँ हिन्दी पाठकक सेहो ध्यान राखऽ पड़ै छलन्हि, हुनका मोनो नै रहै छलन्हि जे कोन कविता हिन्दीमे छन्हि, कोन मैथिलीमे आ कोन दुनूमे, से ओ छुतहर घैल लिखि देलन्हि, एकर कारण यात्रीजीक तुकबन्दी मिलेबाक आग्रहमे सेहो देखि सकै छी। आ फेर आउ कॉपरनिकसपर, जँ यात्री जी वा मलंगिया जी “घैल छुतहर”, “छुतहर घैल” वा “छुतहा घैल” लिखिये देलन्हि तँ की नेटिव मैथिली भाषी छुतहरकेँ “घैल छुतहर”, “छुतहर घैल” वा “छुतहा घैल” बाजब शुरू कऽ देत। से कॉपरनिकस सेहो मलंगियाजीक विरुद्ध छथिन्ह। कॉपरनिकसक किंवदन्तीक सटीक प्रयोग मलंगियाजी नै कऽ सकलाह, प्रायः ओ गैलिलीयो सँ कॉपरनिकसकेँ कन्फ्यूज कऽ रहल छथि, कॉपरनिकसक सिद्धान्तक समर्थन पोप द्वारा भेल छल आ कॉपरनिकस पोप पॉल-३ केँ अपन हेलियोसेन्ट्रिक सिद्धान्तक चालीस पन्नाक पाण्डुलिपि समर्पित केने रहथि। खएर मलंगियाजीक विज्ञानक प्रति अनभिज्ञता आ विज्ञानक सिद्धान्तकेँ किवदन्तीसँ जोड़बाक सोचपर अहाँकेँ आश्चर्य नै हएत जखन अहाँ हुनकर खाँटी लोककथा सभक अज्ञानताकेँ अही भूमिकामे देखब। Monday at 09:17 · Like · 4

Ashish Anchinhar गजेन्द्र ठाकुर- छुतहर/ छुतहर घैल/ छुतहा घैल------“अली बाबा आ चालीस चोर”- सम्पूर्ण दुनियाँकेँ बुझल छै जे ई मध्यकालीन अरबी लोककथा अछि जे “अरेबियन नाइट्स (१००१ कथा)” मे संकलित अछि आ ओइमे विवाद अछि जे ई अरेबियन नाइट्समे बादमे घोसियाएल गेल वा नै, मुदा ई मध्यकालीन अरबी लोककथा अछि, ऐ मे कोनो विवाद नै अछि। बलबनक अत्याचार आदिक की की गप साम्प्रदायिक मानसिकता लऽ कऽ मलंगिया जी कहि जाइ छथि से हुनकर लोककथाक प्रति सतही लगाव मात्रकँण देखार करैत अछि। “मिथिला तत्व विमर्श” वा “रमानाथ झा”क पंजीक सतही ज्ञान बहुत पहिनहिये खतम कऽ देल गेल अछि, आ तेँ ई लिखित रूपसँ हमरा सभक पंजी पोथीमे वर्णित अछि। गोनू झा विद्यापति सँ ३०० बर्ख पहिने भेलाह, मुदा मलंगियाजी ५० साल पुरान गप-सरक्काक आधारपर आगाँ बढ़ै छथि। हुनका बुझल छन्हि जे गोनूकेँ धूर्ताचार्य कहल गेल छन्हि मुदा संगे गोनूकेँ महामहोपाध्याय सेहो कहल गेल छन्हि से हुनका नै बुझल छन्हि!! गोनू झाक समयमे मुस्लिम मिथिलामे रहबे नै करथि तखन “तहसीलदारक दाढ़ी” कतऽ सँ आओत। लोकक कण्ठमे छुतहर छै ओकरा “छुतहा घैल” कऽ दियौ, लोकक कण्ठमे “कर ओसूली”करैबलाक दाढ़ी छै ओकरा “तहसीलदार”क दाढ़ी कहि साम्प्रदायिक आधारपर मुस्लिमकेँ अत्याचारी करार कऽ दियौ, आ तेहेन भूमिका लिखि दियौ जे रमानन्द झा “रमण” आ आन गोटे डरे समीक्षा नै करताह। एकटा पैदल सैनिक आ एकटा सतनामी (दलित-पिछड़ल वर्ग द्वारा शुरू कएल एकटा प्रगतिवादी सम्प्रदाय)क झगड़ासँ शुरू भेल सतनामी विद्रोह औरंगजेबक नीतिक विरोधमे छल आ ओइमे मस्जिदकेँ सेहो जराओल गेलै, मुदा गोनू झाक कर ओसूली अधिकारी मुस्लिम नै रहथि, लोककथामे ई गप नै छै, हँ जँ साम्प्रदायिक लोककथाकार कहल कथामे अपन वाद घोसियेलक आ लिखै काल बेइमानी केलक तँ तइसँ मैथिली लोककथाकेँ कोन सरोकार? फील्डवर्कक आधारपर जँ लोककथाक संकलन नै करब तँ अहिना हएत। महेन्द्र नारायण राम लिखै छथि जे लोककथामे जातित-पाइत नै होइ छै, मुदा मलंगियाजी से कोना मानताह। भगता सेहो हुनकर कथामे एबे करै छन्हि। आ असल कारण जइ कारणसँ ई मलंगिया जीक नाटकक अभिन्न अंग बनि जाइत अछि से अछि हुनकर आनुवंशिक जातीय श्रेष्ठता आधारित सोच। हुनकर नाटकमे मोटा-मोटी अढ़ाइ-अढ़ाइ पन्नाक घीच तीरि कऽ सत्रहटा दृश्य अछि, जइमे पन्द्रहम दृश्य धरि ओ छोटका जाइतक (मलंगियाजीक अपन इजाद कएल भाषा द्वारा) कथित भाषापर सवर्ण दर्शकक हँसबाक, आ भगताक भ्रष्ट-हिन्दीक माध्यमसँ छद्म हास्य उत्पन्न करबाक अपन पुरान पद्धतिक अनुसरण करै छथि। कथाकेँ उद्देश्यपूर्ण बनेबाक आग्रह ओ सोलहम दृश्यसँ करै छथि मुदा बाजी तावत हुनका हाथसँ निकलि जाइ छन्हि। आइ जखन संस्कृत नाटकोमे प्राकृत वा कोनो दोसर भाषाक प्रयोग नै होइत अछि, मलंगियाजीक भरतकेँ गलत सन्दर्भमे सोझाँ आनब संस्कृतसँ हुनकर अनभिज्ञताकेँ देखार करैत अछि आ भरत नाट्यशास्त्रपर हिन्दीमे जे सेकेण्डरी सोर्सक आधारपर लोक सभ पोथी लिखने छथि, तकरे कएल अध्ययन सिद्ध करैत अछि। Monday at 09:19 · Like · 4

Ashish Anchinhar गजेन्द्र ठाकुर- छुतहर/ छुतहर घैल/ छुतहा घैल----मलंगियाजीक ई कहब अछि जे नाटक जँ पढ़बामे नीक अछि तँ मंचन योग्य नै हएत, वा मंचन लेल लिखल नाटक पढ़बामे नीक नै लागत? हुनकर संस्कृत पाँतीकेँ उद्घृत करबासँ तँ यएह लगैत अछि। जँ नाटक पढ़बामे उद्वेलित नै करत तँ निर्देशक ओकर मंचनक निर्णय कोना लेत? आ मंचीय गुण की होइ छै, अढ़ाइ-अढ़ाइ पन्नाक सत्रहटा दृश्य, तथाकथित निम्न वर्गकेँ अपमानित करैबला जातिवादी भाषा, भगताक “बुझता है कि नहीं?” बला हिन्दी आ ऐ सभक सम्मिलनक ई “स्लैपस्टिक ह्यूमर”? आ जे एकर विरोध कऽ मैथिलीक समानान्तर रंगमंचक परिकल्पना प्रस्तुत करत से भऽ गेल नाटकक पठनीय तत्त्वक आग्रही आ जे पुरातनपंथी जातिवादी अछि से भेल नाटकक मंचीय तत्वक आग्रही!! की २१म शताब्दीमे मलंगियाजीक जाति आधारित वाक्य संरचना संस्कृत, हिन्दी वा कोनो आधुनिक भारतीय भाषाक नाटकमे (मैथिलीकेँ छोड़ि) स्वीकार्य भऽ सकत? आ जँ नै तँ ऐ शब्दावली लेल १८०० बर्ष पुरनका संस्कृत नाटकक गएर सन्दर्भित तथ्यकेँ, मूल संस्कृत भरत नाट्यशास्त्र नै पढ़ैबला नाटककार द्वारा, बेर-बेर ढालक रूपमे किए प्रयुक्त कएल जाइए? माथपर छिट्टा आ काँखमे बच्चा जँ कियो लेने अछि तँ ओ निम्न वर्गक अछि? ओकर आंगनक बारहमासामे ओ ऐ निम्न वर्गकेँ राड़ कहै छथि, कएक दशक बाद ई धरि सुधार आएल छन्हि जे ओ आब ओइ वर्गकेँ निम्न वर्ग कहि रहल छथि, ई सुधार स्वागत योग्य मुदा ऐ दीर्घ अवधि लेल बड्ड कम अछि। बबाजी कोना कथामे एलै आ गाजा कोना एलै आ ओइसँ बगियाक गाछक बगियाक कोन सम्बन्ध छै? मलंगियाजी अपन जाति-आधारित वाक्य संरचना, आ भ्रष्ट-हिन्दी मिश्रित वाक्य रचना कोना घोसिया सकितथि जँ भगता आ निम्न वर्गक छद्म संकल्पना नै अनितथि, ई तथ्य ओ बड्ड चतुराइसँ नुकेबाक प्रयास करै छथि, आ तेँ ओ मेडियोक्रिटीसँ आगाँ नै बढ़ि पबै छथि। आ तेँ हुनकामे ऐ नाट्य-कथाकेँ उद्देश्यपूर्ण बनेबाक आग्रह तँ छन्हि मुदा सामर्थ्य नै आबि पबै छन्हि। Monday at 09:19 · Like · 4

Lalit Kumar Jha GAJENDRA JI CHHERAIT CHHAITHI GAJENDRA JI K APRAMANIK TATHA ASANGAT TIPPNI SABH PADHLAK BAD EAH LAGAIT ACHHI JE GAJENDRA JI LIKHAIT NAHI CHHAITH CHHATHI, LIDDI KARAIT CHHATHI. AAOR E BAL- BAL KA NIKLAIT RAHAIT ACHHI. HINAK E LIDDI MAITHILI SANSAR KE GHINA DET. KIYEK TA MAITHILI SANSAR CHHOT ACCHI. TE HINKA ANGREJI ME LIKHBAK CHHAHI. KARAN AKAR CHHETRA VISAL CHHAIK. AK KON ME HINAK LIDDI PACHA LETAIN. Monday at 10:09 · Like

Ashish Anchinhar मलंगिया जीक नाटक विद्वेष बढ़बैत अछि, हुनकर राड़ आ शोल्कन्हक प्रति आ ओकर भाषाक प्रति घृणा गएर ब्राह्म्ण केँ मैथिलीस‘ं दूर केलक अछि। Monday at 10:12 · Like · 4

Ashish Anchinhar lalit ji ahank pita aa ahank bhasha dunu ekke tarahak achhi, abhadra Monday at 10:12 · Like · 4

Ashish Anchinhar मलन्गिया जी छेड़ि घिनौने छथि Monday at 10:13 · Like · 4

Ashish Anchinhar Lalit Kumar Jha---ठीके कहैत छी भाइ ओना एकटा गदहाक मर्म दोसरे बड़का गदहा बुझि सकैए। एहि मामिलामे मतलब गदहपनमे अहाँ हमर सीनियर भेलहुँ। सधन्यवाद भाइ|... लिद्दीक ज्ञान देखि हम आर बेशी सन्तुष्ट छी , अहाँ अवश्य गदहपनमे हमर सीनियर भेलहुँ Monday at 10:14 · Like · 4

Ashish Anchinhar ललित जी अहाँ आ अहाँ पिता मलंगिया जी दुनू गोटेक भाषा एक्के तरहक अछि.. अभद्र Monday at 10:15 · Like · 4

Umesh Mandal मलंगिया जीक जीवनक प्रभाव हुनकर बच्चापर देखबामे अबैत अछि.. एतेक असभ्य? हुनकर (मलंगिया जी क) नाटक लोककेँ घृणा करब सिखेने अछि से सिद्ध भेल। ललित जी, गजेन्द्र ठाकुरक मैथिली/ अंग्रेजी/ तिरहुता मैथिली सभटा ग्रन्थक सूची एतए अछि: गजेन्द्र ठाकुर प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-१ सहस्रबाढ़नि (उपन्यास) सहस्राब्दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह) गल्प-गुच्छ (विहनि आ लघु कथा संग्रह) संकर्षण (नाटक) त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन (दूटा गीत प्रबन्ध) बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, कथा, कविता आदि) उल्कामुख (नाटक) सहस्रशीर्षा (उपन्यास) प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग दू (कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक-२) धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ (गजल संग्रह) शब्दशास्त्रम (कथा संग्रह) जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देवनागरी वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur.pdf  तिरहुता वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur_Tirhuta.pdf ब्रेल वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur_Braille.pdf सहस्रबाढ़नि_ब्रेल मैथिली (पी.डी.एफ.) सहस्रबाढ़नि_ब्रेल-मैथिली मिथिलाक इतिहास- भाग-२ (शीघ्र) जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी (शीघ्र) The Comet The_Science_of_Words On_the_dice-board_of_the_millennium A Survey of Maithili Literature- Vol.II- GAJENDRA THAKUR (soon) Learn Mithilakshar Script तिरहुता (मिथिलाक्षर) सीखू Learn_MithilakShara_GajendraThakur.pdf Learn Braille through Mithilakshar Script ब्रेल सीखू LearnBraille_through_Mithilakshara.pdf Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला सीखू Learn_International_Phonetic_Alphabet_through_Mithilakshara.pdf  गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा VIDEHA ENGLISH MAITHILI DICTIONARY जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध (Click this link to download) http://www.box.net/shared/yx4b9r4kab (Click this link to download) OR right click the following link and save target as:- http://videha123.wordpress.com/files/2009/11/panji_crc1.pdf AND click this link to download some of the jpg images of palm-leaf manuscripts of Panji. http://www.esnips.com/web/videha AND CLICK EACH OF THE FOLLOWING 17 LINKS TO DOWNLOAD ALL THE 11000 JPG IMAGES IN 17 PDF FILES. पंजी (मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र) दूषण पंजी मोदानन्द झा शाखा पंजी मंडार- मरड़े कश्यप-प्राचीन प्राचीन पंजी (लेमीनेट कएल) उतेढ़ पंजी पनिचोभे बीरपुर दरभंगा राज आदेश उतेढ आदि  छोटी झा पुस्तक निर्देशिका पत्र पंजी मूलग्राम पंजी मूलग्राम परगना हिसाबे पंजी मूल पंजी-२ मूल पंजी-३ मूल पंजी-४ मूल पंजी-५ मूल पंजी-६ मूल पंजी-७ MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES Maithili_English_Dictionary_Vol.I.pdf MaithiliEnglishDictionary_Vol.II_GajendraThakur.pdf ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES EnglishMaithiliDictionary_Vol.I_GajendraThakur.pdf विदेहक सदेह (प्रिंट) अंक VIDEHA print form विदेह ई-पत्रिकाक पहिल 25 अंकक रचनाक संग containing matter from first 25 issues of Videha e-magazine देवनागरी वर्सन SADEHA_VIDEHA_DEVNAGARIVERSION_PART_1.pdf SADEHA_VIDEHA_DEVNAGARIVERSION_PART_2.pdf तिरहुता वर्सन SADEHA_VIDEHA_TIRHUTAVERSION_PART_1.pdf SADEHA_VIDEHA_TIRHUTAVERSION_PART_2.pdf विदेह ई-पत्रिकाक २६ म सँ ५० म अंकक बीछल रचनाक संग containing matter from 26th to 50th issue of Videha e-magazine विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक PANJI_CRC.pdf - File Shared from Box - Free Online File Storage www.box.com Monday at 10:32 · Unlike · 4

Umesh Mandal ललित जी, सात जन्म लेबए पड़त अहाँकेँ आ मलंगिया जी केँ, अहाँ लिद्दीक विश्लेषण करैत रहू Monday at 10:33 · Unlike · 5

Ashish Anchinhar ललित जी तँ गदहा छथि तँए खाली लिद्दिएक विश्लेषण कए सकैत छथि Monday at 10:48 · Like · 4

Shiv Kumar Jha सात जन्म नै ललित जी,आ मलंगिया जी केँ,सत्तरि जन्म लेबऽ पड़तन्हि। Monday at 10:55 · Like · 3

Sanjay Kumar Jha हद क देलियै अपने सब. अपना में लड़ी क , गारी फज्जती क क की मैथिलि आ मिथिला के निक होयत, इ अहाँ सब सोचलाहूँ एको बेर. बंद करू इ प्रलाप आ सब गोटे मिली के एहन काज करू जाहि से की मैथिलि आ मिथिला के उन्नति हुअय. धन्यवाद. Monday at 22:02 · Like · 1

Gunjan Shree आई काल्हि सब एक दोसरा के दुसबा में लागल अछी,जौ कियो ग़लत केलक अछी त जिनका खराब लगलैन्ह हुनका चाही जे ओहि सौ आगू आबि क ओहि सौ बढ़िया करै,कोनो डैरि(line) के मेटा क छोट केनेय छोट लोकक काज होइत चेक,ओना facebook पर इ सब झगड़ा नही करय जाय से निबेदन..... Tuesday at 02:30 · Like · 3

Vinit Utpal दिल्ली में भेल साहित्य अकादमी कथा गोष्ठी में मलंगिया जी के सुपुत्र अप्पन पिताजीक नाम से पुरस्कार शुरू करबाक लेल लोक सें निहोरा करैत छलाह. अहि लेल अजित आजाद जी के खुशामद सेहो करैत छल जे अहां हमर बाबूजी के नाम पर अहि काजक ले आगा आबू. अजित आजाद जी के कहब छल जे अहि लेल एक लाख टका अहां कोनो संस्थान के जमा क दियो आ ओकर ब्याज से पुरस्कार शुरू भ जायत. मुदा हमरा जानल ई गप आगू नहि बढ़ल. ललित जी, अहिना गजशास्त्र लिखैत रहू. अहां के बुझले होयत जे 'हाथी चले बाजार, कुत्ता भूके हजार'. हाथी के डर से जंगल के राजा नुकायल घुरैत अछि आ अहां ते चिट्टा ते छी नहि जे गज के नाक में घुसि के किछु क सकब. Tuesday at 04:35 · Unlike · 4

Ashish Anchinhar गुंजन बौआ, ई ककरो दुसबाक नै वरन् मलंगिया जीक जातिवादी रंगमंचक विरोध छै, आ ओइसँ कए किलोमीटर पैघ डैरि बेचन ठाकुर जी द्वारा खीचि लेल गेल छै, देखल जाए http://maithili-drama.blogspot.in/ विदेह मैथिली नाट्य उत्सव maithili-drama.blogspot.com Tuesday at 07:28 · Like · 4 ·

Umesh Mandal http://maithili-drama.blogspot.com/2011/09/blog-post_25.html Tuesday at 09:28 · Like · 3

Umesh Mandal http://maithili-drama.blogspot.com/2011/08/blog-post_1815.html विदेह मैथिली नाट्य उत्सव: बेचन ठाकुर -बाप भेल पित्ती maithili-drama.blogspot.com Tuesday at 09:29 · Like · 3

Umesh Mandal http://maithili-drama.blogspot.com/2011/08/blog-post_8210.html विदेह मैथिली नाट्य उत्सव: अधिकार- बेचन ठाकुर maithili-drama.blogspot.com Tuesday at 09:29 · Unlike · 5

Umesh Mandal जाधरि समीक्षाकेँ खिच्चातानी आ खिच्चातानीकेँ समीक्षा अहाँ बुझैत रहबै गुंजनश्रीजी, ललित जी आ संजय जी ताधरि अहाँसभ अहिना ओझरीमे रहब, Tuesday at 09:36 · Unlike · 5

Ashish Chaudhary कलकत्तामे गंगा झा छथि, नाट्य निर्देशक, ओ मलंगिया जीसँ कहलखिन्ह जे नाटकमे जातिवादी गारि कम कऽ दैले तैपर हुनका मलंगियाजी जवाब देलखिन्ह जे मलंगियाजीकेँ जतेक गारि अबै छनि तकर दसो प्रतिशत नाटकमे नै आएल छै, शर्मनाक। Yesterday at 06:23 · Like · 2

Ashish Chaudhary बेचन ठाकुर नाटककार आ नाट्य निर्देशक http://maithili-drama.blogspot.in/p/blog-page.html मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ नाटककार आ नाट्य निर्देशकक रूप्मे उभरि कऽ आएल छथि, तै पाछाँ बेचन जीक उत्कृष्ट जिनगी आ सोच छन्हि। विदेह मैथिली नाट्य उत्सव: पेटार maithili-drama.blogspot.com Yesterday at 06:26 · Like · 2

Ashish Anchinhar मैथिलीक समानान्तर रंगमंचक जन्मदाता: सभसँ बेसी मैथिली नाटकक निर्देशन: राजरोगसँ दूर: जातीय रंगमंचक विरुद्ध बेचन ठाकुर जीक संघर्ष (मुन्नाजी आ अजित आजादक सोझाँमे मलंगिया जीक भड़ैत प्रकाश झा जकरा लेल कहै छथि- भरि दिन केश काटैत रहै छल- पाठकक लेल ई सूचना जे जातिवादी रंगमंचसँ जुड़ल लोक केश काटनाइकेँ खराप बुझै छथि, संगहि ईहो सूचना जे बेचन ठाकुर सैम पित्रोदा (जे भारतमे टेक्नोलोजी मिशनक प्रारम्भ केलन्हि) सन बरही जातिक छथि, जातिवादी रंगमंचकर्मी लोकनि हुनकर गौँआ अंतिकाक सहायक सम्पादक श्रीधरमसँ कन्फर्म कऽ सकै छथि): हिनका नामसँ कतेको रेकॉर्ड दर्ज अछि, जेना संस्कृतक बाद पहिल बेर मैथिलीमे भरत नाट्यशास्त्रक रंगमंचक संकल्पनाक अनुसार नाटक, मात्र महिला नाट्यकर्मीक माध्यमसँ ६-६ घण्टासँ ऊपरक नाटकक मंचन (जखनकि जातिवादी नाट्यकर्मी अदहा घण्टा- ४५ मिनटक नाटकक निष्पादन लेल महिला रंगकर्मीक लेल बौखैत रहै छथि, कारण हिनकर सभक बलगोविना प्रवृत्तिक कारण आ कुकुरचालिक कारण बहुत रास महिला मैथिली नाटकसँ दूर भागि गेलीह। मुदा सभ कान्तिदर्शीकेँ जातिवादिताक कोप, गारि गंजन सुनऽ पड़ै छै, मुदा बेचन ठाकुर एक्केटा छथि...हमरा सभ नाट्यकर्मी, रंगमंचकर्मी, नाटककारकेँ हुनकर मैथिली समानान्तर रंगमंच, जे २५-३० सालसँ अनवरत चलि रहल अछि, पर गर्व अछि। मिथिलाक समाज जँ जातिवादी रंगमंचक बावजूद नै टूटल अछि तँ तकर कारण अछि बेचन ठाकुर जीक मैथिली समानान्तर रंगमंच... आ से मलंगिया जीक काल्हि जन्मल भड़ैत सभकेँ नै बुझल छन्हि, मुदा मलंगिया केँ बुझल छन्हि जे हुनकासँ बेशी संख्यात्मक आ गुणात्मक नाटक/ एकांकी बेचन जीक लिखल छन्हि आ ओइ बेचन ठाकुर आ गुणनाथ झाक एकांकी मैथिली एकांकी संग्रहमे नै देलन्हि.. एकलव्यक औंठा द्रोण कटबा लेलन्हि, मुदा एतऽ तँ गुरुक औंठा मलंगियाजी कटबा रहल छथि..


Vinit Utpal साहित्य अकादेमी कथा गोष्ठी: सगर राति दीप जरय: एकटा बहन्ना (सम्पूर्ण लेखमे लेखक सेहो शामिल अछि, हुनका परछाय कऽ नै देखल जाए) लोकतंत्रक परंपरा अछि जे आलोचना हेबाक चाही। जौं आलोजना सहबाक क्षमता केकरोमे नै अछि तँ ओ लोकतांत्रिक तँ कोनो विधिए नै भऽ सकैत अछि। ओ तँ तानाशाह भेल। अहिनामे तँ समाजमे विकृति अएबे करत आ से विकृति मिथिलामे देखल जा रहल अछि। एकरा कहएमे कोनो संदेह नै अछि जे गारि सभ लोक संस्कृतिक हिस्सा अछि। मुदा कोनो भी रचनात्मक लोक अहि शब्दक प्रयोग, जातिवादी गारिक प्रयोग, कोना करैत अछि, अहि पर हुनकर योग्यता आ क्षमताक आकलन कएल जाइत अछि। दिल्ली मे आयोजित साहित्य अकादमी कथा गोष्ठी तथाकथित ७६म सगर राति दीप जरय (!) संपूर्ण देश आ विदेश मे रहए बला मैथिली भाषीक आगू कतेको रास प्रश्न छोड़ि देलक। जइ राति ई गोष्ठी भऽ रहल छल, मात्र १८ लोक भोर धरि बचल, ३४ टा लोकक सोंझा अप्पन-अप्पन खिस्सा कागज देख कऽ सुना रहल छल, तखने राजधानी दिल्ली सँ एक हजार किलोमीटर दूर मिथिला क कतेको गाम मे रहए बला लोक द्वारा मचान आ चौबटिया पर कतेको रास लोक मुहजबानी खिस्सा-पिहानीक क्षमताक परिचय दऽ रहल छल। हुनका नै तँ कोनो माइकक जरूरत छल, नहिये मसनदक आ नहिये खाइ कऽ चिंता छल। ओ ओ लोक छल जे दिन भरि मजूरी कऽ सांझ केँ बैसि कऽ टाइम पास कऽ रहल छल। एना मे जे दिल्ली मे कथा गोष्ठी भऽ रहल छल हुनकर आयोजक लोकनि लेल नहिये बंगला कवि रवीन्द्र नाथ ठाकुर महत्वपूर्ण छल (रवीन्द्र नाथ ठाकुर साहित्य अकादेमीक मार्च क्लोजिंगक बचल फण्डक लूट बनि कऽ रहि गेलथि, कारण कथा रवीन्द्रमे रवीन्द्र छोड़ि सभ किछु छल) नहिये मैथिली/ हिन्दीक कवि बाबा नागार्जुन। ई वएह बरख छी जखैन रवीन्द्र नाथ ठाकुरक डेढ़ सएम बरखी मनाओल जा रहल अछि। तमाम संस्थान पाइ उगाहि रहल अछि। जखैन की ई बरख बाबा नागार्जुनक जन्म शताब्दी बरख सेहो अछि। बिहार सेहो अप्पन स्थापनाक सौवां बरख मना रहल अछि। अहि ठाम प्रश्न अछि जे की मैथिली भाषाक लेल रवीन्द्रनाथ ठाकुर अहम छथि वा बाबा नागार्जुन वा दुनू। तखन की मानल जाए जे पूंजी आम लोक आ संस्कृति पर हावी भऽ रहल अछि। एकटा कहबी अछि, पूंजी असगरे नै आबैत अछि, ओ अपना संगे एकटा संस्कृति सेहो आनैत अछि। यएह पूंजी मिथिला केँ खा रहल अछि। मुट्ठी भरि लोकक पाकेट भाषा मैथिली बनि रहल अछि, बाकी सभ मुँह ताकि रहल अछि। 2 minutes ago · Like Vinit Utpal रवीन्द्रक विरोध करबाक कोनो प्रयोजन नै अछि मुदा बाबा नागार्जुन केँ बिसुरि कऽ हम हुनका सम्मान दैक प्रयत्नक विरोध तँ अवश्य हेबाक चाही। जखैन देशक राजधानी दिल्ली मे कथा गोष्ठी भऽ रहल अछि, तखन हम अप्पन भाषाक कवि बाबाक नाम फण्डक लेल नै लऽ कऽ कवि रवीन्द्रकेँ नेमप्लेट बना कऽ सम्मान दिऐ, ई केहन मानसिकता अछि। अप्पन दीपक नीचाँ अन्हार आ भरि शहर ढ़िंढोरा, केहन सिद्धांत अछि? अप्पन घर केँ अन्हार राखि कऽ दोसर घरक लेल दीप लेसी, ई केहेन विकृत दुनियाक दृश्य अछि। एखन जखैन किसान मरि रहल अछि, संपूर्ण मिथिला बाढ़ सँ त्रस्त अछि। ढेर रास लेखन समाजसँ बेरल लोक लिखि रहल अछि आ गद्य/पद्यमे प्रमुखतासँ शामिल अछि। अहि परिस्थितिमे एकटा सामान्य मैथिलीक लोक लेल कवि रवीन्द्र प्रासंगिक अछि वा बाबा नागार्जुन। दिल्लीक लिट्ल थियेटर ग्रुप, मंडी हाउस मे हिन्दीक लेखक अज्ञेयक रचना पर हुनकर जन्म शताब्दीक लेल नाट्य प्रस्तुति केलक। मुदा जखैन जे संस्था अपनाकेँ नाट्य संस्था कहि कऽ पताका फहराबऽ चाहैत अछि, मुदा ओकरा भंगिमा, अरिपन, कोलकाता आ जनकपुरक रंगमंच आ विदेह समानान्तर रंगमंचक जानकारी नै अछि, ओकर सँ सभ कियो अपेक्षा करत जे ओ बाबा नागार्जुनक रचना पर कोनो कार्यक्रम जरूर करताह। मुदा, ई नहि भेल। किए? किएकि सरकार पाइ नै देलक। तखन सगर राति दीप जरयक माला उठेबाक कोन खगता छल, जोड-तोडसँ अर्द्धनारेश्वरक बोकारोक प्रस्ताव अस्वीकृत भेल (उमेश मण्डल जीक ऐपर विदेहमे विस्तृत रिपोर्ट आएल अछि। जखन राबड़ी बंटैत अछि तखन जे क्यो 'क्यू" मे ठाढ़ हेता, सभकेँ राबड़ी भेटत। मुदा, बलिहारी तखैन ने जखैन अहाँ लीक सँ चलि आ अप्पन शर्तक आधार पर सरकारी फंड लऽ सकी। फंडक लेल हम कोनो उत्सव करी, ई कतय क आ केहन सिद्धांत अछि। जौ हम कनी कालक लेल मानि ली जे हम रविंद्र सँ प्रभावित छी तखन हुनका सँ सीखैक जरूरत अछि नै की फंड लऽ पेट भरबाक। आइ धरि बंगालक सभ घरमे रवीन्द्र संगीत गायल आ सुनल जाइत अछि मुदा मिथिलाक घर मे विद्यापति संगीतक केहन हाल अछि, ई केकरो सँ नुकायल नै अछि। जातिवादी मैथिली रंगमंच तँ मैथिलीकेँ लेलिये गेल छल मुदा विदेह समानान्तर रंगमंच ओकर सोझाँमे अवरोध बनि आबि गेल। जखैन की कवि विद्यापति कवि रविंद्र सँ कतेक पुरान छथिन, ई सभकेँ बुझल अछि। समूचा बंगाल घुरि कऽ आबि जाउ, ओतय बंगला भाषाटा बाजल जाइत अछि मुदा मिथिलामे अंगिका, वज्जिका जेहन कतेको भाषा अही जातिवादी लेखन आ रंगमंचक कारण मैथिलीसँ निकलि कऽ अप्पन अस्तित्व टा नै बना लेने अछि, मैथिली केँ चुनौती सेहो दऽ रहल अछि। about a minute ago · Like Vinit Utpal आइ जकरा काल्हिक जन्मल मैथिली क टुच्चा नाटककार आ नाटक कहि कऽ जातिवादी रंगमंचक भड़ैत भर्त्सना कऽ रहल छथि ओ टुच्चा कोना भऽ सकैत अछि, जे बिना कोनो तामझामक, बिना मीडिया प्रबंधनक, बिना प्रचारक, बिना कोनो संस्थागत सहयोगक, अप्पन रचनात्मकता मे लागल अछि। ओ टुच्चा कोना अछि जिनकर नाटक देखहि बला लोक केँ दू टाइमक रोटी नै भेटैत अछि, मुदा नाटक जरूर देखैत अछि। आ नाटको दलित विमर्शपर, सूचनाक अधिकारपर, जाति-पातिक कट्टरतापर, भ्रूण हत्यापर। हुनका लग अप्पन गाड़ी नै अछि, बुल्लै दू कोस धरि चलि कऽ नाटक देखैत अछि। भरि-भरि राति हुनकर नाटक देखल जाइत अछि, ६-६ घण्टाक नाटक, एतेक पैघ नाटक मराठीमे सेहो एकाधेटा अछि, मैथिलीक जातिवादी रंगमंचक नाटक आ हिन्दीक नाटकक तँ चर्चे ब्कार। आ नै हुनका लग लाइट लेल बड़का-बड़का बल्ब अछि, नै ओतेक तकनीक, मात्र प्रतिभा अछि, समाजकेँ बचेबाक लेल जातिवादी रंगमंचक विरुद्ध समानान्तर रंगमंचक संकल्पना अछि आ तखन ओ टुच्चा कोना अछि। हुनकर नाटक लेल गाम-घरमे, चौबटिया पर गप होइत अछि, मुदा अखबार, मैथिलीक जातिवादी संस्था सभक पत्रिका या विदेहक अलाबे इंटरनेट पर चर्चा नै आबैत अछि, तखन ओ टुच्चा कोना अछि? जे कियो मैथिली केँ लऽ कऽ 'डिप्रेस्ड’ अछि, तँ ओहेन मानसिकता केँ किछु नै कएल जा सकैत अछि। हिन्दी राजभाषा अछि नै कि अप्पन सभक मातृभाषा। दुनियाक सभ भाषाक सम्मान करबाक चाही, मुदा अप्पन भाषाक दांव पर नै। ई छद्म रंगमंचकर्मी लोकनि अपन जातिवादी नाटकक तुलना हिन्दीक नाटकसँ कऽ गर्व अनुभव करै छथि, जखैन की सत्य अछि जे हिन्दीसँ पुरान साहित्यिक भाषा मैथिली अछि आ हिन्दीबला सभ ज्योतिरीश्वरक मैथिली धूर्त समागमक हिन्दी अनुवाद कऽ कहियासँ नै खेला रहल छथि, ऐ मैथिलीक जातिवादी रंगमंचकर्मी आ नाटककारकेँ ई बुझलो छन्हि जे भारतेन्दुक “अन्धेर नगरी...” ज्योतिरीश्वरक मैथिली धूर्त समागमक अनुकरण मात्र अछि? जे कियो असली मैथिल होएत ओ अप्पन मां केँ बेचि कऽ नै खा सकैत अछि। अप्पन मिथिला सीताक मिथिला अछि।,माँकेँ सम्मान दैबला। हिन्दी पेट भरयबला, नौकरी भेटयबला भाषा अछि। मिथिला आ मैथिली सँ सभक आत्म सम्मान जुड़ल अछि। जेकरा लग आत्मा नै अछि ओकरा लऽ कऽ किछु कहल नै जा सकैत अछि। आइ किछु लोक मिथिलाक गद्य/पद्य क हिन्दी मे अनुवाद कऽ रहल अछि। अहि ठाम सवाल अछि जे की अहि सँ मैथिली भाषाक प्रचार भऽ रहल अछि आ दोसर भाषा मजबूत भऽ रहल अछि? जखैन धरि आन भाषाक रचना मैथिली मे नै आएत ता धरि मैथिली मजबूत कोना होएत, आ जँ अहाँ घरमे मजगूत नै हएब तँ बाहरमे सम्मान भेटत? एक बेर अप्पन मोनमे ताकि कऽ हिम्मत करए पड़त जे हम अप्पन माँ मैथिली लेल की कऽ रहल छी। माँ अप्पन नेना केँ छातीक दूध पिआबै अछि मुदा ओ नेना पैघ भेले पर माँ केँ नै बेच दैत अछि। माँ, माँ होइत अछि। की अहाँ अप्पन माँ केँ जिंस-टॉप पहिरा कऽ बाजार मे लऽ जाइत छी? की अहाँ अप्पन माँ केँ बाजार मे ठाढ़ कऽ नीलाम करैत छी? की अहाँ कोनो पुरस्कार पेबा लेल अप्पन माँ केँ केकरो आर लग पोसिया लगाबैत छी, नै ने। तखन मैथिली संग ई किए कऽ रहल छी, एक बेर कनी सोचियौ तँ।



Rishi Kumar Jha GAJENDRA JI CHHERAIT CHHAITHI GAJENDRA JI K APRAMANIK TATHA ASANGAT TIPPNI SABH PADHLAK BAD EAH LAGAIT ACHHI JE GAJENDRA JI LIKHAIT NAHI CHHAITH CHHATHI, LIDDI KARAIT CHHATHI. AAOR E BAL- BAL KA NIKLAIT RAHAIT ACHHI. HINAK E LIDDI MAITHILI SANSAR KE GHINA DET. KIYEK TA MAITHILI SANSAR CHHOT ACCHI. TE HINKA ANGREJI ME LIKHBAK CHHAHI. KARAN AKAR CHHETRA VISAL CHHAIK. AK KON ME HINAK LIDDI PACHA LETAIN. — in New Delhi. Like ·  · Monday at 9:58am · Shubh Narayan Jha and 3 others like this. 

Lalit Kumar Jha bahut badhiya Monday at 10:07am · Like 

Naresh Jha bahut uchit likhne chi rishi Monday at 12:39pm · Like 

Ajit Azad are chhoro bhi yaar...apne dil ko itna bara kar lena chahiye ki isme saundar bhi sama jai


जातिवादी रंगमंचक भाषाक बानगी:

Mukesh Jha vinit utpal pyada/pyaja no -420विनीत उत्पल जी के लेल जिनका आँखी में रतौधी छैन | अपन आलेख मे लिखैत छैथ जे बाबा के उपर कोनो कार्यक्रम नई भेल अछि | यो उत्पल जी जौ नौकरी के बाद जे समय बचैत अछि से यदि चमचैई के अलावा अहि तरहक आयोजन देखबा मे केने रहितियेक त अहि तरहक भ्रम नहि होयत | उम्मीद अछि आगू स ध्यान राखब |


Mukesh Jha Sujhal yo vinit utpal jee


Mukesh Jha
जत्त मलंगिया जी के नाटक के तुलना भारतीय रंगमंच के प्रसिद्ध नाटककार जेना मोहन राकेश, विजय तेंदुलकर, गिरीश कर्नाड, बादल सरकार आदि स भ रहल छैक ओहि ठाम आई कालिह मे जनमल मैथिली के टुच्चा नाटकार आ नाटक स तुलना केनाई बेईमानी अछि |


Mukesh Jha से बेईमान सब स पुछियोक भाई |
23 hours ago · Like
Anuradha Jha अहि मे कोनो दू मत नई जे महेंद्र मलंगिया मैथिली के सर्वश्रेष्ट नाटककार छैथ |
23 hours ago · Like
Anuradha Jha मलंगिया जी पर जाही तरह फेस बुक पर किछु लोक अनाप सनाप लिखी क श्रेष्टता पाब चाही रहल छैथ से सर्वदा गलत अछि | श्रेष्टता पेबाक कोनो दोसर बाट ताकल जा सकैत अछि | किछु लोकक पोस्ट आ भाषा घोर आपत्ति जनक अछि | अहि स मिथिला मैथिली के अपमान भ रहल अछि | कुंठा स ग्रसित नई हाउ आ अपन नीक काज कय क अपन स्थान बनाव नई की खिच्चम तानी मे लागल रहैत जाऊ |
23 hours ago · Like
Prakash Jha मैथिली नाटकक ज्ञान सब के नै छनि. जे लोकनि नाटक वाकि रंगमंच स' जुड़ल छथि हुनका सभ स' विचार लेल जयबाक चाही. जेना कि कुणाल जी, गगन जी, किशोर केशव, प्रेमलता मिश्र प्रेम, शिवनाथ मंडल, यदुवीर यादव आदि आदि....बाँकी फेसबुक पर जे भ' रहल अछि ओकर तह मे किछु आर अछि. कोनो खास व्यक्ति केँ मात्र साहित्य अकादेमी पुरस्कार दियबाक लेल भ' रहल अछि. एही बीच महेन्द्र मलंगिया जीक पुस्तक आबि गेलन्हि कि ई लोकनि डरि गेल छथि... त' लगल्न्हि अछि उंटा चालि चल' ....
23 hours ago · Like
Mukesh Jha उचित कहल अनुराधा जी मुदा किछु बेकहल लोक के कोना रोकल जा सकैत अछि | जे की अपना आ अपन खानदान के श्रेष्ट बनेबाक लेल सब कर्म करबाक लेल तैयार छैथ | जिनका मे टेलेंट हेतैन तिनका जोर जबरदस्ती नई कर परैत छैक से के बुझेतैन महामुर्ख लोकनि के | मलंगिया जी के नाटक जतेक लोकप्रिय अछि प्रेक्षक के बीच मे किनक नाटक लोकप्रिय अछि से कहौत नबका जन्मौटी नाटक के हितेषी लोकनि ?
23 hours ago · Like
Mukesh Jha ओहो त एकर मतलब ई जे मात्र ई ओझराब के योजना भरी अछि ?


Ashish Anchinhar
एखन हमरा मोबाइल पर एकटा नम्बर सँ फोन आएल छल जकर नम्बर अछि----08595372399 । फोन करब बला कहलाह जे हम बजरंग मंडल छी। आ इ कहू जे आशीष चौधरी के छथि। हम कहलिअन्हि जे से तँ प्रकाश झासँ पूछि लिअ। ओ हमरा कहलाह जे हम प्रकाश झासँ किएक पुछबै। आ बातचीत क्रममे कहलाह जे हमर नाम किएक फेसबुक पर आएल। हम कहलिअन्हि जे हमरा जे अहाँ भोरमे अहाँ कहलहुँ जे रातिमे इ सभ मारए बला छलाह। मुदा हम रोकबा देलहुँ। बातचीतकेँ अंतमे बजरंग जी इहो कहलाह जे फेसबूक पर इ बात आनि बहुत गलत केलहुँ अछि। सभ गोटाकेँ धआन देआबी जे बजरंग मंडल मैथिली फांउडेशनसँ बेसी जुड़ल छथि जे की मैलोरंगसँ टूटि कए बनल एकटा संस्था अछि। मुदा फोन करए बला कहलाह जे हम दोसर बजरंग मंडल छी। भए सकैए जे दूटा बजरंग मंडल होथि मुदा ई संभव नै छै जे ओ दूनू के दूनू बजरंग मंडल हमरा चिन्हैत होथि। ओना जँ बजरंग जीकेँ अवाजसँ ई स्पष्ट छल जे कोनो दबाबमे जरूर छथि।ओना जँ बजरंग जी चाहथि तँ अपन पहिचान दए सकै छथि। फोन नम्बर सेहो ट्रेस भए जेतै।

संगे-संग प्रकाश झा स्वंय अपने मूँहसँ मुन्ना जीकेँ कहलकै जे अंतो-अंत धरि हम आशीष अनचिन्हारकेँ मारबै ताहि पर मुन्ना जी कहलखिन्ह जे हम अनचिन्हार संगे परिचय करबा दै छी कने छूओ क देखिऔ। ताहि पर प्रकाश झाक एकटा परम ब्राम्हणवादी सहयोगी मुन्ना जीकेँ कहलखिन्ह जे अहाँ बचा लेबै अनचिन्हारकेँ 

। ताहि पर मुन्ना जी कहलखिन्ह जे हम सभ कहै नै छिऐ करै छीऐ खाली एकबेर छू क देखिऔ। ताहि पर प्रकाश झा कहलखिन्ह जे कोनो बात नै देखिऔ जे की होइ छै। 

जँ साहित्य अकादेमीक ओहि कथा गोष्ठीक फोटो-विडियोकेँ देखल जाए तँ ई स्पष्ट अछि जे प्रकाश झा-मुकेश झा हमरा मरबा लेल व्यग्र छल।उपरमे एकटा फोटो राखि रहल छी जाहिमे की कए रहल अछि प्रकाश से देखू---- मुदा मुन्ना जीक कहलाक बाद डरें किछु नै कएल पार लगलै प्रकाश झा एनड मुकेश झा कम्पनीकेँ।







Ashish Chaudhary
मलंगिया आ प्रकाश झाक इशारापर भ्रमरजीक विरुद्ध मिथिलादर्शन आ आन-आन ठाम चिट्ठी भेजनिहार मुकेश झा आब इन्टरनेट पर आबि गेल अछि, ऐ फ्रॉड आइ.डी.सँ सावधान। ई ककरो दोसरा द्वारा संचालित होइत अछि.. सावधान। ... मलंगिया जीक नाटक लोककेँ बेसी कट्टर बनेलक अछि, गएर ब्राह्मण मैथिलीसँ दूर भागल अछि। ... प्रकाश झा आ मुकेश झा घोषणा केने रहथि जे २४ मार्च २०१२ क साहित्य अकादेमी कथा गोष्ठीमे आशीष अनचिन्हारकेँ मारताह, बजरंग मण्डल ओतए आशीष अनचिन्हारकेँ ऐ मादे सतर्क सेहो केने रहथि। मुदा छूलो भेलन्हि?malangiya ji jatek mehnati lathait posai me lagelanhi tatek jan neek naatak likhbai me lagabitathi te aai mukesh jha, rajiv mishra, lalit jha, prakash jha san nirlajjak aavashyakta nai rahitanhi
  • Bhaskar Jha भाई एहन ऎहन आपत्तिजनक गप के जतय तुलि देबय ओतय बढत! किनको व्यक्तिगत सोच आ आपत्ति के सार्वजनिक नहिं कयल जयबाक चाही। विद्वजन के अपन अपन मतानतर होयत छई। वोहि मतानतर पर हम - अहां आपस में नहिं लड़ि। दूनू महान व्यक्तित्व के धनी छथि। दूनू गोटे सं हमरा सबके सीखबाक चाही।
    7 April at 21:35 ·  ·  1

  • Ashish Chaudhary भाइ पत्रिका सभमे लठैतक छद्म नामसँ चिट्ठी पठेबाक प्रवृत्तिपर किछु तँ कमी आएत।




  • Ashish Chaudhary भाइ पत्रिका सभमे लठैतक छद्म नामसँ चिट्ठी पठेबाक प्रवृत्तिपर किछु तँ कमी आएत।
    7 April at 21:46 ·  ·  2

  • Bhaskar Jha हां सेहो बात सही अछि
    7 April at 22:05 ·  ·  1

  • Manoj Jha इ सब मिथिला मैथिली के लेल दुर्भाग्यक गप्प थिक ..
    7 April at 22:55 via Mobile ·  ·  3

  • Umesh Mandal सामंती लोकनि‍क बेवहारि‍क परि‍चय....
    8 April at 01:40 ·  ·  1

  • Shubh Narayan Jha kane positive bha chalba sa maithili ke vikas chhaik ne ki ek dosra ke khichay kela sa



Ashish Anchinhar जातिवादी रंगमंचक शब्दावलीक बानगी:-जातीय रंगमंचक भाषाक बानगी:- Prakash Jha सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना सुश्री पुनीता शर्मा आजकल दिल्ली में ही हैं. Like · · Unfollow post · 4 hours ago Mukesh Jha तो ? 4 hours ago · Like Prakash Jha तो इनसे मुलाकात अब जरूरी लगता है.... 4 hours ago · Like Mukesh Jha किस वजह से भाई साहेब ? 4 hours ago · Like Prakash Jha कुछ विक्षिप्त मानसिकता के लोग इन्हें मैथिली भाषा के सहारे बदनाम करने में लगे हैं. 4 hours ago · Like Mukesh Jha क्या बात कर रहे हैं वो बहुत अछि नृत्यागना हैं, उनके बारे मे ये अशोभनीय बात है | 4 hours ago · Like Prakash Jha जी, है तो पर... ऎसा नही करना चाहिए... खैर... आगे आगे देखिए होता है क्या.... चलता हूँ रीहर्शल के लिए.... 3 hours ago · Like Ashish Anchinhar जातिवादी रंगकर्मीक बलगोविना प्रवृत्तिक कारण आ कुकुरचालिक कारण बहुत रास महिला मैथिली नाटकसँ दूर भागि गेलीह। .... 3 hours ago · Like Mukesh Jha आ बहुत रास आहाँ एहन कुकर्मी लेखक के कारण अन्चिहाररजी आ किछु आहाँ लोकनि द्वारा पोसुवा प्यादा के कारण | आब चिन्हार भ जाव यो अनचिन्हार जी | 2 hours ago · Like Ashish Anchinhar जातिवादी रंगकर्मीक बलगोविना प्रवृत्तिक कारण आ कुकुरचालिक कारण बहुत रास महिला मैथिली नाटकसँ दूर भागि गेलीह। .... Vinit Utpal जातिवादी रंगमंच क प्राइवेट पार्टी मे ५-१० मिनट यात्री आ राजकमल कें देल गेलन्हि आ ओकर फोटो १०-२० साल धरि बेचल जाएत , ई जातिवादी रंगमंच अखबारक कतरन समेटैत अछि. 4 hours ago · Unlike · 1 Vinit Utpal (यात्रीक जन्म ३० जून १९११ छन्हि ) 4 hours ago · Like Ashish Anchinhar विनीत भाइ ई सभ फण्ड केर खेला छै जहिया फण्ड भेटतै तहिये बाबा मोन पड़तिन्ह आ सातो जन्म धरि फोटो लगा इ बाबू सभ हल्ला मचेताह।.... 4 hours ago · Like Ashish Anchinhar भाइ एकट गप्प इहो जे जेना जातिवादी रंगकर्मी सभ अपन दिमाग मे कूड़ा-कर्कट भरने रहै छथि तेनाहित अपन घर-आफिस कतरनसँ भरने रहै छथि। ई कतरन सभ फण्ड उगाही केर नीक साधन छै जातिवादी सभ लेल। जँ ई कतरन नै रहतै तँ फण्ड देतै के। ओना विनीत भाइ अहाँक जानकारी लेल ई कहि दी जे पेड पत्रकारितामे पाइ दए न्यूज छपा लेब जातिवादी सभ लेल कोनो बड़का गप्प नै। फोटोशापसँ ब्रोशर बना लेनाइ सेहो आसान छै। प्रिंटर सँ पर्चा सेहो छपा लिअ। भारत सरकार फण्ड देबा कालमे इएह सभ देखैत छै।.. 4 hours ago · Like Mukesh Jha यो अनचिन्हार जी काज कय क हल्ला करैत छीयेक आहाँ और आहाँ के ग्रुप भूते त बाबा के नाम पर एकटा गोष्टीयो नई कायल भेल | 4 hours ago · Like Mukesh Jha यो अन्चिहार जाहि ग्रुप के पोसुवा छी आहाँ ओही ग्रुप स एक बेर मंडी हाउस मे एकटा बाबा के नाम पर गोष्टी करबा क देखा दियह | 4 hours ago · Like Rajiv Mishra kya bat hai mukesh bhai gargara diye... 4 hours ago · Like Ashish Anchinhar जातिवादी रंगकर्मीक बलगोविना प्रवृत्तिक कारण आ कुकुरचालिक कारण बहुत रास महिला मैथिली नाटकसँ दूर भागि गेलीह। .... 12 minutes ago · Like Ashish Anchinhar राजीव मिश्रा, प्रकाश झा आ मुकेश झा सन भड़ैतक चलते कियो परिवार आ बहु बेटीक संग जातिवादी रंगमंचक समारोह (प्राइवेट पार्टी)मे नै जाइए। about an hour ago · Like Ashish Anchinhar जातिवादी रंगमंचक शब्दावलीक बानगी:Mukesh Jha साहित्य अकेदमी पुरस्कार के कारण भ रहल अछि राजनीति | जातिवाद के हवाला दय कय रहल छैथ किछु चिन्हार आ किछु अनचिन्हार लोक घिनायल राजनीति | यो महामहिम लोकनि साहित्य अकादेमी पुरस्कार कोनो जाती विशेष के नई भेटैत छैक, उत्कृष्ट रचना के देल जायत छैक | सबुर राखु रचना मे दम्म होयत त अवश्य भेटत, अन्धेर्ज जुनि हाउ | जिनका पुरस्कार दियाब चाहैत छियेन हुनका कहियोन जे साहित्य के कोनो एक विधा के मजबूत करताह | खने कविता, खने कहानी आ आब नाटक मे सेहो अपन कलम भाजीं रहला अछि, यो ताहि स नही चलत, | खैर हल्ला करब त दओ दिया से भारी बात नई | मुदा ऐना नई चलत, जाही नाटक के आहाँ लोकनि पुरस्कार दियाबह लेल व्यग्र छि, ताहि मे दम नई अछि, आधा किताब एक सीन मे आ बांकी आधा मे ७ गो सीन, से नई होयत छैक यो सरकार | आ कनि दिमाग लगाब लेल सेहो कहियोन नाटककार महोदय के -- | नाटक के अपन व्याकरण छैक तकरा अनुसरण करैत लिखता त मंचित होमा मे असोकर्ज नई हेतैक | ध्यान दियोक |आ बेसी स बेसी मंचिंत नाटक के महत्व होयत छैक | about an hour ago · Like Ashish Anchinhar ई डायलोग- "Mukesh Jha साहित्य अकेदमी पुरस्कार के कारण भ रहल अछि राजनीति | जातिवाद के हवाला दय कय रहल छैथ किछु चिन्हार आ किछु अनचिन्हार लोक घिनायल राजनीति | यो महामहिम लोकनि साहित्य अकादेमी पुरस्कार कोनो जाती विशेष के नई भेटैत छैक, उत्कृष्ट रचना के देल जायत छैक | सबुर राखु रचना मे दम्म होयत त अवश्य भेटत, अन्धेर्ज जुनि हाउ | जिनका पुरस्कार दियाब चाहैत छियेन हुनका कहियोन जे साहित्य के कोनो एक विधा के मजबूत करताह | खने कविता, खने कहानी आ आब नाटक मे सेहो अपन कलम भाजीं रहला अछि, यो ताहि स नही चलत, | खैर हल्ला करब त दओ दिया से भारी बात नई | मुदा ऐना नई चलत, जाही नाटक के आहाँ लोकनि पुरस्कार दियाबह लेल व्यग्र छि, ताहि मे दम नई अछि, आधा किताब एक सीन मे आ बांकी आधा मे ७ गो सीन, से नई होयत छैक यो सरकार | आ कनि दिमाग लगाब लेल सेहो कहियोन नाटककार महोदय के -- | नाटक के अपन व्याकरण छैक तकरा अनुसरण करैत लिखता त मंचित होमा मे असोकर्ज नई हेतैक | ध्यान दियोक |आ बेसी स बेसी मंचिंत नाटक के महत्व होयत छैक |" प्रकाश झा मुन्नाजीकेँ बेचन ठाकुरक नाटकक (जिनका ओ भरि दिन केश काटैबला कहैए) विषयमे ई गप कहने रहन्हि। आब सिद्ध् भेल जे ई मुकेश झा नै प्रकाश झा अछि। 5 minutes ago · Like Ashish Anchinhar प्रकाश झा बाउ: टिनही चश्मासँ देखू बेचन ठाकुरक नाटक: "आधा किताब एक सीन मे आ बांकी आधा मे ७ गो सीन"- दुनिया लग ई किताब छै आ अपन भड़ैती जारी राखू, झूठक खेतीक संग: अहाँ भड़ैतीक अलाबे आर किछु नै कऽ सकै छी बाउ। एतए पोथीक लिंक अछि, पढ़ू आ माथ पीटू https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/BechanThakur.pdf?attredirects=0 https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/BechanThakur.pdf?attredirects=0 8869256024489431480-a-videha-com-s-sites.googlegroups.com A few seconds ago · Like · Ashish Anchinhar मलंगिया जी केँ सेहो पढ़बा देबन्हि- गुणनाथ झा कहै छलाह जे होइ छल जे उमेरक संग मलंगियाजी आधुनिक रंगमंच बुझि जेताह., मुदा काश... https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/BechanThakur.pdf?attredirects=0‎8869256024489431480-a-videha-com-s-sites.googlegroups.com about an hour ago · Like · Sangeeta Jha gajendra jee prasidh hobay ke lel badhiya chai prasidh aadmi ke aalochna karu.aakhir malangia jee ke naam dekh ka lok kum sa kum aahan ke naam padhiye let.Ona suraj oar thuku tha thukappne par parai chai. mathili ke jeevan ahak soch par nirbhar chai aascharya 54 minutes ago · Unlike · 1 Gajendra Thakur जातिवादी रंगमंचक महिला विरोधी, दलित पिछड़ा विरोधी प्रवृत्ति दुखी करैत अछि। समानान्तर रंगमंच एकर विरोधमे आजन्म ठाढ़ रहत।

Poonam Mandal काल्हि मलंगिया जीक मैलोरंगक (जकर आइ काल्हि अध्यक्ष देवशंकर नवीन छथि) दूटा सदस्य प्रकाश झा आ मुकेश झा एकटा महिलाकेँ बदनाम करबाक कोशिश (हम कोशिशे कहब, कारण हिनका सभक औकात ततेक नै छन्हि जे ओइमे ई सफल होथि, साहित्यिक सम्वेदनाक विश्लेषण ओ कऽ सकता?) केलन्हि। संगे ई दुनू गोटा जगदीश प्रसाद मण्डल आ बेचन ठाकुर जीक प्रति जातिगत अपशब्द सेहो कहलन्हि। अही तरहक जातिगत टिप्पणी देवशंकर नवीन द्वारा वैदेही पत्रिकामे सुभाष चन्द्र यादव जीक विरुद्ध सेहो कएल गेल रहए। की एक्कैसम शताब्दीक ई सभ लेखक छथि? एक्कैसम शताब्दीक रंगमंचकर्मी छथि? मैलोरंग पत्रिकामे प्रेमराज नामसँ अनलकान्त (गौरीनाथ- अंतिकाक सम्पादक)केँ गारि देनिहार मैलोरंगक वर्तमान वा पूर्व अध्यक्ष अपन नाम किए नै सोझाँ आनलन्हि, किए प्रकाश आ मुकेशक कान्हपर बन्दूक राखि ओ प्रेमराजक छद्म नामसँ गारि पढ़लन्हि, पत्रिकामे जे ई मेल प्रेमराजक देल अछि ओ बाउन्स कऽ रहल अछि। मलंगियाकेँ बुजुर्गक रूपमे सम्मानदेबाक आग्रही जगदीश प्रसाद मण्डल आ बेचन ठाकुर केँ किए गरिया रहल छथि?
Ashish Anchinhar धरती गोल छै..... प्रेमराजकेँ त्रिकालज्ञसँ भेँट भैए गेलै।..

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